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अलौकिक नारी (कविता-8)

नारी की एक अलौकिक कहानी है, उसकी जन्म से मृत्यु तक रवानी हैं। जब वो जन्मती हैं किसी आँगन में, तब वह सभी की प्यारी बन जाती हैं । जब वो छमाछम आँगन में खेलती हैं, तब वो सभी की हँसी बन जाती हैं। जब वो बड़ी होकर  शिक्षा लेती हैं, घर में सभी की…

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नारी (कविता-7)

हम नारी आज की हो या कल की सब को साथ लेकर चलती हैं   अपने सच्चे मन से बड़े जतन से  खेल गुडिया का हो या  हो प्रसाद की पुडिया  मायेका हो या ससुराल  सब कुछ साँझा करती हैं प्यार , दुलार या हो उपहार  खुद अपने लिए छाटती नहीं  काट  -छाट से बचा  रख लेती…

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नारी (कविता-5)

प्रणाम तुझे ए नारी शक्ति, तू अपने में उत्कर्ष है। पार करे सारी विपदाएं, तू अपने में संघर्ष है। साहस और बलिदान की देती नई मिसाल है। तू मानव जननी,तू पालनकर्ता,तू ही तो ढाल है। आदरणीय है,सम्मानित है तू सेवा की मूरत है। मां रूप में देखो तो,तू ईश्वर की ही सूरत है। प्यार भरे…

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अनारी नारी (कविता-4)

अनारी नारी अशिक्षा की पिटारी बड़ी बीमारी।। शिक्षित नारी परिवारी जेवर फूलों की क्यारी।। नारी महान देती जीवन दान करो सम्मान।। नारी जनक पीढ़ियों की पोषक छुये फ़लक।। नारी दिवस लड़े अधिकार को मारे गर्भ को।। सशक्त नारी हर क्षेत्र पे कब्जा तोड़ती भ्रम।। क्रांति जगाती भ्रांतियां झुठलाती दिये की बाती।। केवल बेटा दकियानूसी सोच…

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नारी है इस जग की मूल… (कविता-3)

नारी है इस जग की मूल रे नर! दे न इनको शूल…..      त्याग, समर्पण, सेवा धर्म      करती यह तन्मय हो कर्म      रखती हरदम सबका मान      घर, आंगन की इनसे शान      झोंक न खुद आँखो में धूल      रे नर! दे न इनको शूल…. दिव्य गुणों से यह परिपूर्ण करती विपदाओं…

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नारी (कविता-2)

माना एक नारी की जिंदगी उसकी कब होती है पर उसे भी अधिकार है अपने मन से जिंदगी जीने का खिलखिलाने का गुनगुनाने का, पर ये अधिकार उसे स्वयं लेना होगा देना सीखा है लेना भी सीखना होगा कर्तव्य के साथ सचेत होकर आगे बढ़ कर अपना अधिकार लेना होगा, इससे नहीं बदलेगा उसका बेटी/…

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” नारी ” (कविता-1)

कोंख बसर में रख तूं पाला राम कृष्ण महावीर बुद्ध ; नानक ईशा कलाम विवेकानन्द मनीषी प्रबुद्ध! 🌹 पतिव्रत धर्म निभाने को पाहन रूप धरी अहिल्या ; सतीत्व को सत्यापित करने अग्नि परीक्षा से गुजरी सीता! 🌹 पति के स्वाभिमान की रक्षा में सती हो गयी हिमालय नन्दनी ; सबरी धीरज की सुकुमार हृदया नारी…

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मेरी नस नस में बजे वात्सल्य की सितार …..

प्रकृति से प्रेम होने के कारण अक्सर मेरी भोर अँतस्थली में बहते सागर मँथन से आरँभ हुआ करती थी। पावनता की तरँगें मानवता की सरहदें मानने को तैयार ही नहीं होतीं थीं।इसलिए मेरे मन में बहता भाईचारे का चिनाब निस्वार्थ मोहब्बत की रावी से मिलने को बेचैन हो उठता था। मेरा सारा वजूद वैश्विक बँधुत्व…

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क्या होंगे सावधान एक दिन ?

श्रीराम कथा में मिले परम पूज्य संत मोरारी बापू के आशीर्वाद से भारत के यशस्वी राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से भेंट तक की यात्र में माता–पिता एवं गुरुजनों का आशीर्वाद एवं आप सभी की शुभकामनाओं को अनुभव करता हूँ । यूं ही स्नेह बनाये रखें । हम होंगे सावधान एक दिन ? क्या यह दिन…

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अयोध्या पर फैसला

न्यायालय के फैसले, का सम्यक सत्कार नहीं किसी की जीत ना, हुई किसी की हार राजनीति के खेल में, उलझ गए थे राम आशा है लग जाएगा, उस पर पूर्ण विराम इस न्यायिक प्रक्रिया में, शामिल थे जो लोग अभिनन्दन हर किसी का, जिस जिस का सहयोग पांचों पंचों को करूं, बारंबार प्रणाम दर्ज हुआ…

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