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असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे देश के प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद

लाल बिहारी लाल गुदरी के लाल देशरत्न डा.राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसम्बर 1884 को बिहार के तत्कालिन सारण जिला (अब सीवान)के जीरादेई गांव में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। इनके पिता महादेव सहाय हथुआ रियासत के दीवन थे। अपने पाँच भाई-बहनों में वे सबसे छोटे थे इसलिए पूरे परिवार में सबके लाडले थे।…

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रिटायरमेंट-नये जीवन की नई शुरुआत

सेवानिवृत्ति या रिटायरमेंट जीवन का एक अनमोल क्षण होता है।सर्विस के शुरू में ही रिटायरमेंट की तिथि तो तय ही होती है। पर हम पचास नहीं बल्कि पचपन वर्ष की उम्र के बाद ही थोड़े से सावधान होते हैं कि कैसे समय बिताएंगे,कैसे रहेंगे,क्या करेंगे। कुछ तो रिटायरमेंट के बाद ही सजग होते हैं।चाहे कुछ…

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महाराष्ट्र में सियासी नौटंकी का पटाक्षेप

राजनीति के द्वंद्व मे फँसी शिवसेना को मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली तब जाकर उद्धव ने राहत की सांस ली । संजय राउत ने तो शरद पवार को राजनीति का चाणक्य तक कह डाला  । वैसे बता दे कि बीते  शनिवार २३ तारीख को सुबह अचानक तब झटका लगा जब सुबह सवेरे…

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आदरणीय वशिष्ठ नारायण सिंह जी

अलविदा सर, अच्छा हुआ आपको इस‌‌ दुनिया से जल्दी ही मुक्ति मिल गयी । हां आपको सम्पूर्ण सम्मान इस दुनिया में नहींमिला इसका दुख अवश्य ही रहेगा। आपकी भी तो गलती थी राष्ट्र भक्ति के चक्कर में पड़ गये और वापस अपने वतन लौटकर आ गये। क्या मिला आपको अपने वतन में। किसी पैसे वाले…

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‘जीवन’ का दुरूपयोग‌

एक तरफ तो हम कहते हैं कि जल ही जीवन है और तो वही दुसरी तरफ हम अपने दैनिक जीवन में निरंतर जल संसाधनों का दुरूपयोग कर उनका दोहन करते जा रहे हैं। जल सभी के लिए अति आवश्यक है। जैसे मानव जीव जंतु पशु पक्षी पेड़ पौधे  फसल उत्पादन आदि सभी के लिए अति…

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बातों से बात नहीं बनने वाली

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) सुर्खियां थीं कि अब शिवसेना– एनसीपी–कांग्रेस के तिपहिया रथ पर सरकार बनने जा रही है । और रातों रात समीकरण बदले और अगले दिन भाजपा की सरकार बन चुकी थी, देवेन्द्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके थे । ऐसी क्या जल्दी थी कुर्सी/सत्ता की । यहां तक शिव सेना…

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हम सब तुम्हारे अपराधी हैं प्रियंका!

ख़ूब तड़पती रही गिलहरी गर्म तवे के भभके से सबने इसे तमाशा समझा, ताली पीटी, चले गए हम सब तुम्हारे अपराधी हैं प्रियंका! जाओ, अपने फफोलों के लिए मत तलाशो यहाँ कोई आँसू। परलोक में जाकर निर्भया को ख़बर कर देना, कि उसकी मौत पर जली मोमबत्तियों की रौशनी अब काली पड़ गई है। उसे…

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नारी (कविता-9)

नारी  नारी कुल की मर्यादा है।  नारी उपहास की चीज नहीं।  जो मान घटाए नारी का, तो उसको कोई तमीज नहीं।।  सम्मान आबरू है नारी।  सब कुछ समाज पर है वारी।  आगे बढ़ने दो नारी को,  उसकी सीमा दहलीज नहीं,,,,,,, प्रसव की पीड़ा कौन कहे।  हर गम को नारी मौन सहे।  सब्र का दूजा नाम…

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अलौकिक नारी (कविता-8)

नारी की एक अलौकिक कहानी है, उसकी जन्म से मृत्यु तक रवानी हैं। जब वो जन्मती हैं किसी आँगन में, तब वह सभी की प्यारी बन जाती हैं । जब वो छमाछम आँगन में खेलती हैं, तब वो सभी की हँसी बन जाती हैं। जब वो बड़ी होकर  शिक्षा लेती हैं, घर में सभी की…

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नारी (कविता-7)

हम नारी आज की हो या कल की सब को साथ लेकर चलती हैं   अपने सच्चे मन से बड़े जतन से  खेल गुडिया का हो या  हो प्रसाद की पुडिया  मायेका हो या ससुराल  सब कुछ साँझा करती हैं प्यार , दुलार या हो उपहार  खुद अपने लिए छाटती नहीं  काट  -छाट से बचा  रख लेती…

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