Latest Updates

“समर्पण से मिलती है राह।”

समर्पण का अर्थ है “समस्त अर्पण” उस सर्वशक्तिमान के समक्ष जिसने हमें बनाया है। किसी निर्धारित उद्देश्य से हर प्राणी को पृथ्वी पर भेजा है। जब आप समर्पण भाव से जीवन को बिताते हैं तो सभी मुसीबतों से अपना नाता तोड लेते हैं। जो जैसा है उसे वैसा ही स्वीकार कर लेते हैं। ईश्वर के…

Read More

सच्ची आजादी, अमृतोत्सव भी सच्चा!

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) यह सच है कि अभी भारत में कोरोना के मामलों में काफी कमी देखी जा रही है किन्तु ध्यान रहे आगे बरसात का मौसम आने को है तब हमें विशेष सावधानी बरतनी है और कोरोना गाईडलाइन्स का कड़ाई से पालन करते हुए इसको पैर पसारने नहीं देना है । कोरोना वैक्सीन…

Read More

विकास के लिए जनसंख्या दर को कम करना जरुरी

विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष(11 जुलाई) — लाल बिहारी लाल ============================================== आज जनसंख्या रोकने के लिए सबको शिक्षा होनी चाहिये जिससे इसे कम करने में मदद मिलेगी शिक्षा के साथ-साथ जागरुकता की सख्त जरुरत है ताकि देश उनन्ति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ सके । वर्ष 2021 में असम सरकार इस ओर सख्त…

Read More

 कनाडा दिवस पर  संस्मरण – ए – संवाद का सफल आयोजन

वैकुंवर कनाडा से “मनस्विनी” किचन से कलम तक ग्रुप का एक और सफल आयोजन सम्पन्न हुआ।वैकुंवर कनाडा में शिखा पोरवाल व अस्मिता लॉरेंस ने    एक अनूठी शाम   ‘संस्मरण – ए – संवाद’ (आपकी मेरी कहानी]   अप्रवासी भारतीयों की   आपबीती अपनी जुबानीकार्यक्रम का मनस्विनी तथा अनुराधा प्रकाशन के पटल पर लाइव दिखाया गयाकार्यक्रम शनिवार 3 जुलाई  की शाम (कनाडा में) , (भारत में 4 जुलाई प्रातः) को खुशनुमा व यादगार माहौल में सम्पन्न किया गया .कार्यक्रम के तीन विशिष्ठ अतिथि थें। 1 नूतन ठाकुर जी –  स्पाइस रेडियो 1200 AM ,2 मनमोहन  शरण शर्मा जी – लेखक, प्रकाशक, पत्रकार व संपादक , अनुराधा प्रकाशन3 राकेश तिवारी जी –  टोरेंटो कनाडा में कवि, पत्रकार, संपादक और प्रकाशक।वैंकूवर में  अन्य सामुदायिक भागीदारों के साथ मिलकर किया। मनस्विनी की महिला सदस्यों ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया जैसे नरिंदरजी, मधुजी, दीपाजी , विजया जी, सुचित्रा जी व रेशमा जी ।किसी ने  सुन्दर कविता सुनाकर तो किसी ने अपने संस्मरण सुनाकर संमा बांध दिया। कसा हुआ  मंच संचालन अस्मिता  व शिखा पोरवाल  ने किया। कुल मिलाकर एक बेहतरीन शाम बीती अपनों से दूर  पर  अपनों के बीच। “मनस्विनी” ग्रुप की कोशिश…

Read More

दिल के ज़ख़्म…..

ज़ख़्म अल्फ़ाज़ों के थेदवा करते भी कैसेख्वाबो आंखों ने देखे थेमुक़्क़मल होते भी कैसे सब ख़त्म हो रहा थामेरी आँखों के सामनेतदबीर कुछ होती तोफ़ना होते भी कैसे फ़ासले न होते तोज़ुदा होते भी कैसेमल्लिका ए दिल थीदग़ा देते भी कैसे तड़प दिल कीअब रुकती नही हैबिते हुये पलों कीकहानी बनेगी कैसे…. आरिफ़ असासदिल्ली

Read More

बातों से बात नहीं बनती साहब!

सम्पादकीय (मनमोहन शर्मा ‘शरण’) पूरे विश्व में मानव जाति पर कोरोना बहुत बड़े संकट के रूप में छाया हुआ है । भारत की बात करें तो दूसरी लहर में क्या–क्या घटित हो गया यह किसी से छिपा नहीं है । दूसरी लहर में युवाओं पर कहर टूटा और संख्या गिनती से परे है । कुछ…

Read More

एक दिन सब यहीं छूट जाएगा

यह दुनिया तो है एक सराय यहां कभी कोई आए तो कभी कोई जाए फिर भी लगी है सबको पैसों की हाय हाय यह पैसा भी एक दिन रूठ जाएगा एक दिन सब यहीं छूट जाएगा। चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात सुख दुख तो है एक आनी जानी बात हैवानियत के मोहरों की…

Read More

अंतिम प्रताड़ना

आंचल ने बी.ए. की परीक्षा दी थी। आंचल के माता पिता (रमा व चेतराम )ने उसका विवाह एक छोटे शहर में अमल नाम के लड़के से कर दिया। एक कंपनी में नौकरी करता था।आंचल के ससुराल वालों को मायके के लोगों का आना-जाना बिल्कुल पसंद नहीं था।आंचल कोई भी काम करती थी उसे तायने ही…

Read More

उत्तर प्रदेश को अब पुनः ब्राह्मण मुख्यमंत्री चेहरे की जरूरत !

उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व मंथन करने में जुट गया है । मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा ये अब गंभीर विषय बन रहा । बात करें योगी आदित्यनाथ जी के कार्यकाल की तो उनके कार्यप्रणाली से सवर्णों का एक बड़ा वर्ग, ब्राह्मण वर्ग नाराज है । कारण…

Read More

जब कभी

जब कभी महफिल भी रुलाने लगे। तन्हा-तन्हा पल जब सताने लगे।। हमको आवाज देना मगर दिल से तुम। चाहे इसके लिए अब जमाने लगे।। रिश्ते हर रोज बनते हैं मिटते यहां। दिल लगाना यहां बस फसाने लगे।। ग़मों से अगर बात हो अपनी कभी। इन्तहां में भी हम मुस्कुराने लगे।। रंग भरते हैं ख्वाबों में…

Read More