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UP Election 2022 Voting: चौथे चरण की 59 सीटों पर कुल 61.65 प्रतिशत मतदान

उत्तर प्रदेश में 18वीं विधानसभा के गठन के लिए नौ जिलों के 59 क्षेत्रों में चौथे चरण का मतदान खत्म हो चुका है। इस दौरान मतदान केंद्रों पर मतदाताओं का काफी उत्‍साह दिखा। सुबह से ही वोटरों की लंबी-लंबी लाइनें देखने को मिलीं। इस चरण में चार मंत्रियों सहित 624 प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनकी किस्मत फैसला ईवीएम…

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बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधक है इसे रोकना जरुरी : लाल बिहारी लाल

================================================================ आज जनसंख्या रोकने के लिए सबको शिक्षा होनी चाहिये जिससे इसे कम करने में मदद मिलेगी शिक्षा के साथ-साथ जागरुकता की सख्त जरुरत है ताकि देश उनन्ति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ सके । वर्ष 2021 में असम सरकार इस ओर सख्त पहल की है और उ.प्र. सरकार भी आज जनसंख्या स्थिरिकरण…

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“राजनीति के बीज”

इंसान अपना मूल धर्म, इंसानियत खो रहा है। जातिवाद का जहर रगों में सरपट दौड़ रहा है।। खुलम-खुला व्याभिचार और सब कुछ तो हो रहा है। फिर भी, आजकल सुन रहा हूँ के “विकास” हो रहा है।। अब तो राष्ट्रवाद को विचारधारा की गर्म और तेज आंच पर पकाया जा रहा है। मीडिया ट्रायल में…

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दिल्ली सरकार ने IPL सहित अन्य बड़े आयोजनों पर लगायी रोक

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने सम्मेंलन में पत्रकारों से कहा, ‘‘दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस को फैलाने से रोकने के लिए आईपीएल समेत सभी खेल, बड़े सेमिनार, कोंफ़्रेंस आदि के आयोजन पर पाबंदी लगा दी है।’’ दिल्ली सरकार ने कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में 31 मार्च तक…

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सुख

        घर के बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी और अन्दर सीमा और रमेश चाय के साथ पकौड़े खाने का आनंद ले रहे थे । बारिश में ज्यादातर लोग चाय पकौड़े का आनंद लेते हैं। बातें करते करते सीमा को अपना बचपन याद आने लगा । कैसे वह बारिश में बाहर भाग जाती थी…

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उचित फीस

लॉक डाउन के समय में अपने बच्चों की पढ़ाई खराब होने का डर शर्मा जी को लगातार हो रहा था।फिर कुछ खबर आई कि बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन होगी।अब शर्मा जी को कुछ तस्सली हुई।उन्हें लगा शायद अब बच्चों का 1 साल खराब होने से बच जाएगा।ऑनलाइन पढ़ाई शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही…

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लघुकथा: “चार बजे की माँ”

(लेखिका: डॉ. प्रियंका सौरभ) सुबह के चार बजे थे। बाहर अभी भी अंधेरा पसरा था, मगर प्रियंका की नींद खुल चुकी थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँखें खुल गई थीं — जैसे उसकी जिम्मेदारियाँ अलार्म से भी पहले जाग जाती हों। बिस्तर छोड़ते ही ठंडी ज़मीन पर पैर रखते हुए एक ही ख्याल…

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उम्र का तकाज़ा है पर ज़िन्दा हैं अरमान अभी

“उम्र का तकाज़ा” है कि छोड़ दूँ तमाम सुखों की ख़्वाहिशें करना और साथ बढ़ती उम्र के बढ़ती ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दब पिस कर फ़ना कर दूँ हस्ती अपनी किसी भी आम इंसान की मानिंद… लेकिन ऐसा होगा क्या? मुमकिन तो नहीं सब की मर्ज़ी हो जो वही मर्ज़ी हो मेरी भी कैसे ख़त्म…

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कोऊ नृप होऊ, हमें का हानि……..

आजकल बड़े बैनर के अखबारों का झुकाव विज्ञापन के लिए काफ़ी हद तक सरकारों के पक्ष में रहती है। शुरुआती  दिनों में मैं ज़ब अखबार में काम नहीं  करता था और दुर्भाग्य से एक बार एक अख़बार खरीद लिया था। उसमें लिखा था सरकारी  छँटनी होनी थी वो हो चुकी थी औऱ हम कुछ ऐसे…

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