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न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदने पर सरकार विचाराधीन : पासवान

नई दिल्ली: केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने शुक्रवार 29 मई को बताया कि सरकार, किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर मक्का खरीदने पर विचार कर रही है।  उन्होंने बताया कि देश में इस वर्ष मक्के का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान है और रबी सीजन में मक्के…

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जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं,वह देश मूक है

डॉक्टर सुधीर सिंह ‘राष्ट्रीय हिंदी दिवस’ के शुभ अवसर पर समर्पित चंद पंक्तियां:-जिसकी राष्ट्रभाषा नहीं;वह देश मूक है.हिंदी से हिंदुस्तान की पहचानअचूक है.हिंदी हिंदुस्तान  की लोकप्रिय  भाषा है,हिंद की एकता की  उत्कृष्ट परिभाषा है.समृद्ध हिंदी हेतु मिलकर सत्प्रयास करें,आइए!हिंदी में काम करने की शपथ लें.बच्चों को शिक्षा मिले हिंदी के ही जरिए,अंग्रेजी को उसकी दासी…

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आरोपों की अन्त्याक्षरी

राजनीतिक सफरनामा :   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव तुकबंदी का दौर आ चुका है और यह तुक बंदी उत्तरप्रदेश से प्रारंभ हुई है । वहां के मुख्मंत्री ने एक नारा दिया ‘‘बंटेगें तो कटेंगें’’ अब इस नारे की काट खाजने के लिए तुकबं दी प्रारंभ हो गई । समाजवादी पार्टी ने अन्त्याक्षरी के जैसे इसे लपक लिया…

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गर्मी के दोहे

सूरज आतिश बन गया,तपे नगर,हर गाँव। जीव सभी अकुला उठे,ढूँढ रह सब छाँव ।। सूरज का आक्रोश है,बिलख रहे तालाब । कुंओं,नदी ने भी ‘शरद’,खो दी अपनी आब ।। कर्फू सड़कों पर लगा,आतंकित हर एक । सूरज के तो आजकल,नहीं इरादे नेक ।। कूलर,पंखे हँस रहे,ए.सी.का है मान । ठंडे ने इस पल “शरद’,पाई नूतन…

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दीपगीत

शुचि शारदी  शान्त  अमा में दीप जलता  है अकेला।             अनुराग- प्रकाश  फैला है  दिशा  में             छितरा  रही  नभ   में    गंगा- कली             कमलासिनी- कमले!  कल केशनी!             तारकों  से   होड़   लेने   है     चली एक दीया रख दो ड्योढ़ी, दूसरा कुएँ पर, हो उजेला।              साधना   का       दीप     है   यह              श्वास    में     उन्माद    …

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गीत : सावन में,पीहर याद आए,गीत

सावन में,पीहर याद आए, बाबुल का, अंगना वो बुलाए। बीता बचपन, जिन चौवारों में, यादों का बादल, नैन भिगाए। भाई बहन संग,  खेल खेले, लड़ने मिलने  में, दिन बिताए। वो बारिश में,  भीगना छत पे, कागज़ की नौका, मिलके बहाए।  बाते अब वो, जाने कहा है,  मिलने के दिन, रैना न आए। छूटा पीहर, बंधी…

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सफलता की दौड़ में बुनियादी शिक्षा का पतन

डॉ विजय गर्ग  आज का समय प्रतिस्पर्धा का समय है। हर विद्यार्थी, हर अभिभावक और हर संस्थान एक ही लक्ष्य की ओर भाग रहा है—सफलता। लेकिन इस अंधी दौड़ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न धीरे-धीरे पीछे छूटता जा रहा है: क्या हम वास्तव में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, या केवल परीक्षा पास करने की कला…

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 ‘बुरा न मानो होली है : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव

बुरा न मानो होली है ……अब तो कोई बुरा मानता भी नहीं है और न ही कोई रंग से भय खात है, वैसे कोई किसी को रंग लगाता भी नहीं है, सारे चेहरे स्याह रंग में यूं ही रंगे हुए हैं । राजनीति के मैदान में रंगों का त्यौहार तो चलता ही रहता है, वो…

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कोरोना को हल्के में लेना, कितना भारी पड़ रहा है

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) कोरोना को हल्के में लेना हम सबको कितना भारी पड़ रहा है । हमने भी, सरकारी तंत्र् ने  भी, स्वयंसेवी संस्थाएं भी बार–बार निवेदन करती रहीं कि 2 गज की दूरी मास्क है जरूरी, कम से कम तब तक तो अवश्य ही जब तक कोरोना भारत से पूरी तरह से…

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सोच बुद्धि और विचार – आशा सहाय

मैंने अपने चिन्तन की प्रक्रिया का आरम्भ संभवतः रात्रि के आकाश के निरीक्षण से ही किया था। निश्चय ही बाल मन की जिज्ञासा के तहत ही तरह तरह के प्रश्नों को जन्म देने वाली यह क्रिया अब एक विशाल चिन्तन प्रक्रिया बन गयी है और अन्ततः क्यों ,कैसे , कौन जैसे प्रश्नों से मस्तिष्क वैसे…

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