
आज की युवा पीढ़ी देश का भविष्य है, लेकिन आधुनिक समाज में वे तेजी से भटकाव का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति न केवल उनके व्यक्तिगत विकास को रोकती है, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करती है। युवा आंदोलनों का इनके जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह का प्रभाव पड़ता है, इसलिए यह पूरी तरह से जीवन बर्बाद नहीं करता बल्कि व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इतिहास गवाह है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आपातकाल विरोधी आंदोलनों तक में युवाओ ने मुख्य भूमिका निभाई है। भारत में 1974 का बिहार छात्र आंदोलन (जिसे ‘संपूर्ण क्रांति’ के नाम से भी जाना जाता है) बहुत मशहूर है। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में युवाओ ने भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा किया था।ये देश का भविष्य होते हैं, इसलिए जब भी समाज में कोई गलत बात होती है, तो युवा सबसे पहले उसके खिलाफ खड़े होते हैं। देश के बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध होता है। देश में फैले भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और अन्याय के खिलाफ लड़ना। अपनी मांगें मनवाने के लिए रैली निकालना, धरना देना, भूख हड़ताल करना ये सबका इनका अधिकार है । इतिहास गवाह है कि युवाओ में बदलाव लाने की बहुत ताकत होती है।
आंदोलनों से युवाओ में संगठन बनाने, भाषण देने और नेतृत्व करने का हुनर आता है। देश के कई बड़े नेता युवा राजनीति से ही निकले हैं। युवा अपने अधिकारों, सामाजिक मुद्दों और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सीखते हैं, जो उन्हें एक जागरूक नागरिक बनाता है। विपरीत परिस्थितियों में बातचीत करने और दबाव में काम करने की क्षमता विकसित होती है। युवा अपनी पढ़ाई/कार्य को पहली प्राथमिकता देते हुए, शांतिपूर्ण और कानूनी दायरे में रहकर किसी सही मुद्दे का समर्थन करते हैं, तो इससे उनका जीवन बर्बाद नहीं होता।
इसके कुछ नुकसान भी है जैसे विरोध प्रदर्शनों के कारण इनकी कक्षाएं छूटती हैं, परीक्षाएं टलती हैं और डिग्री पूरी होने में देरी होती है। हिंसक प्रदर्शनों में शामिल होने पर पुलिस केस होने से सरकारी नौकरी मिलने में स्थायी रूप से रुकावट आ सकती है। कई निजी कंपनियां और कॉर्पोरेट संस्थान ऐसे छात्रों को नौकरी देने से कतराते हैं जो विवादों में रहे हों। लगातार विवादों, कोर्ट-कचहरी या कॉलेज से निलंबन के कारण वे खुद और उनका परिवार भारी मानसिक तनाव में आ जाता है। लेकिन, यदि वे पढ़ाई छोड़कर हिंसा, तोड़फोड़ या किसी राजनीतिक एजेंडे का मोहरा बन जाते हैं, तो उनका करियर और भविष्य गंभीर रूप से संकट में पड़ सकता है।
कई बार राजनीतिक दल और नेता अपने स्वार्थ के लिए युवाओं को मोहरा बनाते हैं, जो चुनावी लाभ, भीड़ जुटाने और विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि, युवा केवल मोहरा नहीं हैं, बल्कि वे राजनीतिक बदलाव और देश की दिशा तय करने वाली एक बड़ी ताकत भी हैं। रैलियों, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और आंदोलनों में ऊर्जा के रूप में युवाओ का उपयोग किया जाता है ।
रोज़गार, शिक्षा और परिवर्तन के नाम पर वादे कर इनको आंदोलन मे लाते लेकिन बाद में इनसे किए वादे ,वादे ही रह जाते हैं। राजनीतिक फायदे के लिए युवाओं को उकसाना या वैचारिक संघर्षों में आगे करना। चुनावों में वोट की ताकत से सरकारें बनाने और बदलने की क्षमता रखता है आज का युवा लेकिन अनुभव की कमी के कारण इस्तेमाल हो जाता है ।
तमाम बड़े नेताओं के बच्चे विदेश में है और यह मूर्ख उनके बहकावे पर आकर पुलिस की लाठी खा रहे होते हैं । समाज इनसे एक बात कहता की, तुम्हें जो बहला फुसलाकर यहां लाया है तुम्हें सबसे पहले उनसे सवाल करना चाहिए कि तुम अपने बच्चों को यहां भेजो ।
आज आवश्यकता है इनको सकारात्मक दिशा देने की जैसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन, तथा मानसिक स्वास्थ्य एवं नेतृत्व के अवसरों पर ध्यान देना। समाज में युवाओं का स्थान देश और राष्ट्र के भविष्य को तय करता है। युवा वर्ग ऊर्जा, नई सोच और उत्साह का स्रोत होता है, जो बदलाव लाने और देश को आगे बढ़ाने में मदद करता है। भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में युवाशक्ति की भूमिका सबसे अहम है। वे देश के डेमोग्राफिक डिविडेंड (जनसांख्यिकीय लाभांश) हैं जो अपनी ऊर्जा, कौशल और तकनीकी ज्ञान से राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को बदल सकते हैं।
आज के युवा नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन रहे हैं। भारत को वैश्विक स्टार्टअप हब बनाने में युवाओं का बड़ा हाथ है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को नई तकनीक, एआई और डिजिटल समाधानों के जरिए साकार कर रहे हैं। भारत के युवा डिजिटल नेटिव हैं। वे सरकारी योजनाओं, वित्तीय समावेशन और तकनीकी साक्षरता को जमीनी स्तर तक पहुंचा रहे हैं। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग जैसे मंचों के माध्यम से युवा अब सीधे तौर पर नीति-निर्माण और शासन व्यवस्था में अपने विचार और सुझाव साझा कर रहे हैं। स्किल इंडिया मिशन के तहत युवा नए जमाने के कौशल सीखकर वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उच्च शिक्षा और अनुसंधान में उनकी बढ़ती भागीदारी देश के औद्योगिक और वैज्ञानिक विकास की रीढ़ है। सकारात्मक बदलाव के वाहक के रूप में युवा पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और स्वच्छता जैसे अभियानों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। वे ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देकर शहरी-ग्रामीण विभाजन को मिटाने में भी सक्रिय हैं। देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी युवाओं की भागीदारी को राष्ट्र निर्माण का मूल मंत्र माना है। इसके लिए कौशल विकास मंत्रालय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय और युवा मामले विभाग युवा मामले और खेल मंत्रालय जैसी सरकारी संस्थाएं युवाओं को सशक्त बनाने के लिए कई लाभकारी योजनाएं और मंच प्रदान कर रही हैं।
