Latest Updates

कच्चे धागों का पक्का बंधन रक्षाबंधन का त्योहार

डॉक्टर सुधीर सिंह कच्चे धागों का पक्का बंधन रक्षाबंधन का त्योहार,पूजा की थाली में राखी बहन का  है अनुपम प्यार. भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक यह पावन पर्व,वर्ष में एक बार आता है भाई-बहन का यह उत्सव. ससुराल में बस गई बहना करती  भैया का इंतजार,रेशम की डोरी में लिपटा है बहन काअनमोल प्यार….

Read More

शिक्षित वर्ग में जातीय पूर्वाग्रह का स्थायित्व

संविधान ने समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों को स्थापित किया, परंतु भारतीय समाज में जाति चेतना अभी भी गहराई से विद्यमान है। शिक्षित और शहरी वर्गों में यह चेतना प्रत्यक्ष भेदभाव के बजाय सूक्ष्म रूपों में प्रकट होती है—जैसे रोजगार, विवाह और सामाजिक नेटवर्क में। आर्थिक प्रगति और आधुनिकता ने जाति को कमजोर किया…

Read More

दीवाल पर टांग लिया नया कैलेण्डर

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक अलसाई सुबह के साथ नए कैलेण्डर के नए पन्ने पर अंकित नए वर्ष के उदित होते सूरज ने आंगन में अपनी रोशनी बिखेर दी है । ‘‘यह हमारा नव वर्ष नहीं है’’ के स्लोगन के बीच भी सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की भरमार है । हर साल 31 दिसम्बर…

Read More

गर्मी की कुण्डलियाँ

अजय कुमार पाण्डेय 1 दिन सारा जलता लगे, लगे सुलगती शाम  रवि को कुछ इसके सिवा, और नहीं है काम और नहीं है काम, धूप में लगा तपाने बरसा के फिर आग, लगा औकात दिखाने न विद्युत है न नीर, जी रहे दिन गिन गिन सब प्राणी बेचैन, कठिन अब गर्मी के दिन। 2 जल…

Read More

काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती

काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती फिर अन्य रंगों का क्या होता इंद्रधनुष में सात रंगी न होता आसमां नीला न होता और फूल,फल सब बहुरंगी न होते पत्तों का रंग हरा न होता न ही धरती अंतरिक्ष से काली दिखती न ही अंधेरे का कोई सम्राज्य होता। काश हर चीज़ गुलाबी हो जाती गोरी…

Read More

बदलती विश्व-व्यवस्था और जी-20 की चुनौती : बहुध्रुवीयता के बीच भारत की उभरती वैश्विक भूमिका

भू-राजनीतिक तनावों, आर्थिक अस्थिरता और नेतृत्व संकट से जूझते जी-20 में भारत का वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में उदय जी-20 वैश्विक आर्थिक समन्वय का सबसे प्रभावी मंच है, परन्तु आज यह गहरे भू-राजनीतिक विभाजनों, महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा, आर्थिक असमानताओं और नेतृत्व संकट जैसी कई चुनौतियों से घिरा है। इससे समूह की प्रासंगिकता एवं…

Read More

जाना कहाँ है जब हर तीर्थ यहाँ है

कविता मल्होत्रा (संरक्षक, स्तंभकार – उत्कर्ष मेल) मौसम ख़ुश्क,हर सू  धुँआ-धुँआ है असामयिक विदाइयाँ,सदी का बयाँ है क्रंदन मुखरित,आज ख़ामोश हर ज़ुबाँ है मानव गंतव्य भ्रमित,नकारात्मकता जवाँ है चंद धड़कनों की तलब में,प्यासा हर रोआँ है ✍️ आज हर तरफ, हर दिल की अशाँति के मुखरित पन्नों पर ओम शाँति के हस्ताक्षर दर्ज़ हो रहे…

Read More

क्या नए वर्ष 2026 की तश्वीर से साफ हो पायेगी 2025 की धूल..!

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  बीते वर्ष 2025 में कई चीजे रही जो भूलने के बाद भी याद आती रहेंगी जिनमें कुछ सामाजिक और राजनैतिक  अवसाद और संवैधानिक  अपवाद रहें। बिहार चुनाव में विपक्ष की हार हो या सोने चांदी के कीमतों की मार ! स्मृति मंधना की शादी टूटने की…

Read More

कमजोर नहीं रहा भारत : राजनाथ

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने चीन को दो टूक शब्दों में संदेश दिया कि भारत को कमजोर समझने की गलती ना करें. उन्होंने पूर्वी लद्दाख को लेकर बने गतिरोध को दूर करने के विषय में कहा कि  चीन से सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत चल रही है। भाजपा की ओर से मोदी सरकार के दूसरे…

Read More

महाशिवरात्रि महापर्व

विधा:-विधाता छंद करूँ मैं वंदना शिव की,सभी के हैं शरण दाता।  सवारी बैल की करते, किसी से द्वेष ना भाता।  भजें जो प्रेम से उनको, खुशी दें शरण पा जाता।  मिले वरदान मनचाहा, भजन से इष्ट का नाता॥  लिया अवतार पृथ्वी पर, शिवानी भी विवाही हैं।  त्रयोदश की शुभी तिथि के,रहेंगे गण गवाही हैं।  मनाते…

Read More