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तितली के पंख : अरुण कुमार शर्मा

क्या, तितली के पंख को तुमने, हाथ लगा कर देखा है , जिसपर वो मंडराती है, उस फल को खाते देखा है ! क्या देखी है “अरुण” कभी, तनहाई सूरज की बोलो , क्या तुमने रवि की किरणों को, पास से जाकर देखा है! चंदा हँसता है खिलकर, और तारे मुसकाते तो हैं , मुझे…

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परछाईं

घर में प्रवेश करते ही त्रिशा माँ से लिपट कर उत्साह से चहक उठी ‘माँ मेरा प्रमोशन हो गयाl’ मिठाई का एक टुकड़ा माँ के मुँह में डाल मिश्राजी के सीने से लग कर उनका मुँह मीठा करते हुए उसने कहा ‘पापा आपके आशीर्वाद से इंक्रीमेंट भी अच्छा मिला हैl’ पापा ने त्रिशा के सिर…

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नाटिका :   “मिच्छामी दुक्कडम”

पात्र परिचय_: 1_ नव्या एक स्कूल गर्ल।उम्र 17 वर्ष 2_ नीलू कॉलेज गर्ल उम्र 18 वर्ष 3_झलक  कॉलेज बॉय  उम्र 20 वर्ष 4_ मां   उम्र 50 वर्ष 5 _पिता    उम्र  54 वर्ष 6 _नाना जी (बूढ़े आदमी साधु यानी भिक्षु वेश में) उम्र 75  वर्ष 7_ नानी जी  (बूढ़ी महिला साध्वी वेश में श्वेतांबरी सफेद…

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पत्नी अपने पति को बहुत प्यार से कहती है

जैसे शिव जी पार्वती के बिना अधूरे विष्णु जी लक्ष्मी के बिना अधूरे ठीक वैसे ही हर पति बिना पत्नी के अधूरे  “लड़की “इज्जत माता पिता के घर की “लड़की “ सिर का ताज ससुराल की नारी “ आन बान शान परिवार की शादी के बाद कुछ यूँ कहती अपने पति से “ माँग मेरी…

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क्यों संदिग्ध है अकादमी पुरस्कारों की वार्षिक गतिविधियां ?

पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों को भी सम्मान दिलवा रही है। इन पुरस्कारों में पारदर्शिता का…

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सच्चाई

कपिल जी ने अपनी बेटी का विवाह बड़े धूमधाम से किया। लेकिन विवाह के दो महीने पश्चात ही बेटी ससुराल छोड़कर मायके आ धमकी। दोनों पक्षों के बीच में वाद विवाद भी खूब हुए। कानूनी कार्रवाई कर कर फैसला कर लिया गया। अब कपिल जी अपनी बेटी के लिए किसी दूसरे अच्छे रिश्ते की तलाश…

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व्यंग्य – थप्पड़ खाकर उबरे नेता, मानुष, चून…….

    पंकज सी बी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर राजनीति में थप्पड़ खाना कभी कभी जरुरी हो जाता है। ये अलग बात है कि कभी थप्पड़ आप खुद आर्गेनाइज करवाते है और कभी कभी यह विपक्ष आर्गेनाइज करा के देता है या फिर कभी कभी देश के होनहार भगत सिंह टाइप के युवा  सधे…

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लाल बिहारी लाल पत्रकारिता के लिए सम्मानित

सोनू गुप्ता नई दिल्ली। हमारा मैट्रो हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के साहित्य संपादक सह साहित्य टी.वी.के संपादक  श्री लाल बिहारी लाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान एवं समाजिक सरोकार के लिए जैमिनी अकादमी ,पानीपत द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर युगल किशोर शुक्ल  स्मृति  सम्मान-2024 से डिजीटल रुप से सम्मानित किया गया है।…

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धूप में न निकला करो…… !

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव बहुत तेज धूप है, सूरज तप रहा है और धरती जल रही है । गर्मी तो हर साल आती है और मई के महिने में धूप भी बहुत तेज होती है, पर इतनी तेज धूप नहीं रही अभी तक शायद ! ऐसा बोला जा सकता है । धूप तेज है तो एक…

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लालच में मुर्गी का पेट चीरना बेमानी है और बेईमानी भी

30 मई, हिन्दी पत्रकारिता दिवस के बहाने 30 मई 2024 को भारतीय हिन्दी पत्रकारिता 198 वर्षों की हो गई। दो सौ साल होने में केवल दो साल शेष हैं, यह एक लंबा समय है। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में अपना अलग महत्व रखने वाला समाचार-पत्र “उदन्त मार्तण्ड” हिन्दी का प्रथम समाचार पत्र, 30 मई 1826…

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