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आदिवासी समाज की लोकप्रिय नेत्री है द्रौपदी मुर्मू , अगली राष्ट्रपति बनने की ओर अग्रसर !

राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को चुनाव होने है और देश की राजनीति में पहला नागरिक कौन इसपर घमासान मचा है ! ममता बनर्जी अपने  अहम में चूर वामपंथ विचारधारा के साथ विपक्ष को भड़का रही जबकि बीजेपी ने धोबी पछाड़ लगा कर ममता समेत पुरे विपक्ष की हवा निकाल दी ।  अगला राष्ट्रपति…

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उम्मीद: नन्हे दीपों के उजियारे से

                                                                                                             कुशलेन्द्र श्रीवास्तव तिमिर के नाश का पर्व दीपोत्सव द्वार पर दस्तक दे रहा है । हमें अमावश्या की गहन काली रात को नन्हें दीपों का उजियारा कर प्रकाशवान करना है । प्रकाश ही तो हमारे पथ को आलौकिक करता है । पर अंधियारा इतना फेल चुका है कि नन्हे-नन्हे दीपों का प्रकाश हमारा मार्ग…

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चुनौती है बढ़ता तापमान, बदलता वायुमंडलीय पैटर्न।

वैश्विक समुद्री बर्फ में खतरनाक गिरावट को रोकने के लिए जलवायु कार्यवाही निर्णायक होनी चाहिए। अनुकूली नीतियों और बेहतर ध्रुवीय निगरानी से जलवायु लचीलापन बढ़ेगा। एक टिकाऊ भविष्य उत्सर्जन को कम करने और ग्रह के नाज़ुक क्रायोस्फीयर की रक्षा करने के लिए सभी के दृढ़ संकल्प पर निर्भर करता है। कई समुदायों में जलवायु परिवर्तन…

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होइए वहीं जो राम रचि राखा !

” राम ही जाने ,राम की लीला ” यह महज एक सोच ,एक भाव नहीं अपितु पूर्ण सत्यता है । “जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी”  का परम भाव भी जागृत हुआ, लोगो ने 5 अगस्त को अयोध्या में जो हलचल ,जो त्योहार देखा उसमें निश्चित ही उन्हे रामराज्य नजर आया होगा…

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अरुणा आसफ अली

16 जुलाई, 1909 – 29 जुलाई, 1996) प्रारंभिक जीवन :- अरुणा आसफ अली का जन्म 16 जुलाई, 1909 को कालका, पंजाब, ब्रिटिश भारत (अब हरियाणा, भारत) में एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता उपेंद्रनाथ गांगुली पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) के बारीसाल जिले से थे, लेकिन संयुक्त प्रांत में बस गए। वह एक…

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हाइकु माला

नवीन वर्ष घी, शकर, चूरमा मां का आंगन उन्मन मन ठिठुरता बदन ठंडा है चूल्हा सिकुड़ती मां आंचल में संतान स्नेह उड़ेले बीता बरस खोजता प्रतिपल खुशी के पल देव समाज प्यार भरा आंगन भरे उमंग नवीन वर्ष विद्यालयों का द्वार न रहे बंद बांह पसारे करो शुभ-आरंभ नवीन वर्ष… 2022 डॉ. नीरू मोहन ‘…

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आजादी के सही मायने, संसद में हंगामा करने वालों से समझिए.

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी             स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष मनाते है और प्रतिवर्ष एक नई स्वतंत्रता खुद के लिए जोड़ लेते है। इस वर्ष भी एक स्वतंत्रता हमने बड़ी सरलता से प्राप्त कर ली और वह है संसद में हंगामा करना और सिटिंग चेयर पर्सन को अपमानित करना। इस प्रकार…

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बिना बुलाए क्रोध नहीं आता है

बिना बुलाए क्रोध नहीं आता है,निमंत्रण देने पर ही वहआता है.स्वागत की पूरी तैयारी देखकर,मन केआँगन में प्रवेश करता है.अंदर घुसते ही तांडव-नृत्य कर, अपनी हाजिरी दर्ज करवाता है.शिव-तांडव  का सबको पता है,विध्वंस  करने  ही वह आता है.क्रोध कभी तांडव  करे ही नहीं,इस हेतु संयम से काम लीजिए.क्रोध के उठते तीव्र  उफान को,प्रेम के फुहारा से…

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जीवन गरम चाय की प्याली

पुस्तक समीक्षा : कविता मल्होत्रा ये गर्म चाय की प्याली नहीं बल्कि जीवन को सार्थक दृष्टिकोण देती वो खुशहाली है, जिसके अमृत पान से समूचे ब्रह्मांड में जागृति रूपांतरित हो सकती है। समीक्षा तो नहीं हो पाएगी मुझसे इस अनाहद नाद की कोशिश ज़रूर रहेगी,जागृति संग रहे आपके हर अल्फ़ाज़ की  कई दिन से इस अनूठे…

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क़लम से कलाम के दफ़्तर तक

कविता मल्होत्रा (वरिष्ठ समाजसेवी एवं स्तंभकार -उत्कर्ष मेल) क़लम से कलाम के दफ़्तर तक पहुँचना हर किसी के बस की बात नहीं है।जिस क़लम की बुनियाद में सँस्कृति के बीज फलित होते हैं और मानवतावादी फ़सल का अँकुरण होता है, उस क़लम को ही साहित्यिक समाज में उच्चकोटि  का सम्मान मिलता है। मानव मूल्यों को…

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