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जीवन का सच

अजीब है दुनिया वालों का बड़प्पन, अपने अपने ना रह जाते, कुछ गैर अपने हो जाते, मुश्किल तो तब होता है, सामने प्रेम जताते हैं और पीछे से, साजिशों के पुल बांधते हैं। जुस्तजू जिंदगी की, बस यही कहना बाकी रह गया कहते है संस्कार जिसे, उसे भी बखूबी छला गया। प्रेम कैसा श्रृंगार कैसा,…

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सार्थक भागीदारी के बिना कैसे हल होंगे आधी दुनिया के मसले

(अगर आधी आबादी से होते हुए भी महिलाएँ इस आबादी की कहानियाँ नहीं कहेंगी, तो कौन कहेगा? केवल महिला दिवस पर ही नहीं, हर रोज़ महिलाओं को लड़ाई लड़नी पड़ेगी इस बदलाव के लिए, अपने हक़ों के लिए। छोटी शुरुआत ही सही, लेकिन शुरुआत सबको करनी पड़ेगी। ये संघर्ष का सफ़र अंतहीन है। महिलाओं के…

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आज मैं प्रश्नाकुल हूँ ………

आज प्रश्नाकुल हूँ मैं क्योंकि आँखों का आदिम स्वप्न रोता, प्यासे मन में विषाद दिखता जीवंत सत्य बस गरल बोता ! आज प्रश्नाकुल हूँ मैं क्योंकि वृथा दंभ की परिधि फैली अभीष्ट जो था , अपवाद क्यों है ? पक्षपात, वेदना, निशा दृष्टिगत शिराओं में रक्त का संचार ज्यों है ! आज प्रश्नाकुल हूँ मैं…

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“मन के हारे हार है”

मन को कर तू शक्तिमय,ले हर मुश्किल जीत।      काँटों पर गाना सदा,तू फूलों के गीत।” मनुष्य का जीवन चक्र अनेक प्रकार की विविधताओं से भरा होता है जिसमें सुख- दु:ख,आशा-निराशा तथा जय-पराजय के अनेक रंग समाहित होते हैं । वास्तविक रूप में मनुष्य की हार और जीत उसके मन की मज़बूती पर आधारित होती…

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भैया मान लो कि बसंत आ गया है…

भैया मान लो कि बसंत आ गया है । अब बसंत तो ऐसे ही आता है । आप को मानना है तो मानो और नहीं मानना तो मन मत मानो । बसंत कोई राजनैतिक दल की तरह तो है नहीं कि झंडा-बैनर लगाकर बताये कि देखो मैं आ गया और न ही आन्दोलकारी है कि…

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दीपावली

            ” माँ आज भी ज्यादा दीये नही बिके ।”ठेले को किनारे लगाते हुए अशोक उदास होकर बोला ।     माँ ने उसे सांत्वना देते हुए कहा,” अरे कल बिक जायेंगे,क्यों परेशान हो रहा है ? देख मेरे भी दीये ज्यादा नहीं बिके हैं।”माँ बेटे को समझा तो रही थी पर मन ही मन बुरे…

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भारत – हमारा गर्व : सीमा तंवर

भारत  एक  शानदार  देश  रहा  है  जिस  पर  हमे  सदा  गर्व  रहेगा  दुनिया  ने  इस  बहुमूल्य  हीरे  को  कई  बार  परखा  भी  और  हर  बार  जी  भर कर  इसके  खजाने  से  अपनी  झोली  भर  ली . बड़े  ही  दुःख  की  बात  है  की  एक  आम  भारतीय  ही  कुछ  ज़हरीले  लोगो  की  साजिश  के  कारन  अपने …

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व्यंग्य : शठम् शाठयं समाचरेत्….

पंकज सीबी मिश्रा /राजनीतिक विश्लषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी जी हां  ! प्रस्तुत व्यंग्य शुद्ध मवेशी संस्कृति को इंगित करता एक आंखे खोलने वाला आलेख है जिसे पढ़कर कुछ ठौर और धिंढोर के आंखो में सूजन आ सकती है ।  कल किसी दिशा से आवाज़ आई- ‘ वोट चोर, गद्दी छोड़। वोट चोर ने इस…

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एक बैठक

एक दिन सभी महिलाओं के आत्मसम्मान  एवं  भावनाओं ने बैठक रखी। दूर एक निर्जन पहाड़ी की चोटी पर, जहाँ कोई मनुष्यरूपी प्राणी नहीं पहुंच पाता, सभी मिले। उनका साथ देने के लिए कल-कल बहती नदियां, ऊँची पहाडियाँ, आकाश में उड़ते पंछी थे। उनका हौसला बढ़ाने के लिए सूरज भी चमक रहा था और बादल भी…

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अजीम प्रेमजी ने 70 से अधिक केस दाखिल करने वाले शख्‍स को किया माफ, सुप्रीम कोर्ट ने की इस दरियादिली की तारीफ

 सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अक्‍सर दिलचस्‍प मामले आते हैं। इसी कड़ी में एक और वाकया सामने आया। एक शख्‍स ने विप्रो के मानद चेयरमैन अजीम प्रेमजी (Azim Hasham Premji) और उनके साथियों के खिलाफ 70 से अधिक मामले दर्ज कराए थे। बाद में शख्‍स को अहसास हुआ कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था।…

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