Latest Updates

मैं कैसे पढ़ूँ?

       रोहन बड़े ही सहज भाव से पास आकर खड़ा हो गया,“मैम आप कहती तो हैं कि तुमलोग डॉक्टर, इन्जीनियर ,शिक्षक कुछ भी बन सकते हो, परंतु हमारे यहाँ तो दो जून का भोजन भी मुश्किल से बनता है, हमारे माँ-बाप हमें कहाँ से डॉक्टर और इन्जीनियर बनायेंगे? उसमें तो बहुत अधिक पैसे लगते हैं।”…

Read More

काल और उसके रहस्य : आशा सहाय

जब कब अब और तब जैसे शब्द निरर्थक हैं अगर इनके साथ काल नहीं जुड़ा हो।पूर्वोक्त शब्दों से हम काल को मापने का दम्भ भरते हैं। वस्तुतः भौतिक दृष्टि से इसे मापना अत्यंत कठिन है। यह अपनी व्यावहारिक सुविधा के लिए करना चाहते हैं ताकि दो घटनाओं के मध्य की स्थिति को हम मस्तिष्क मे…

Read More

अलविदा “अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर” — असरानी को भावभीनी श्रद्धांजलि

गोवर्धन असरानी, जिन्हें हम सब प्यार से असरानी कहते थे, भारतीय सिनेमा के सबसे प्रिय हास्य अभिनेता थे। उनके अभिनय में विनम्रता, सादगी और अद्भुत हास्य का संगम था। शोले के “अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर” से लेकर गोलमाल, बावर्ची और चुपके चुपके तक, उन्होंने हर किरदार में जीवन की सच्चाई दिखायी। युवा हों या…

Read More

यह दिवाली : खुशियों वाली

ये जो इस बार 2025 की दिवाली है  बहुत ही खुशगवार और निराली है खूब मज़बूत हो आपसी प्यार और भरोसा  उसी से ज़िंदगी गुलज़ार और खुशहाली है  प्रदूषण और पटाखों का असहनीय शोर  करे है सांसों की डोर को कमज़ोर  टा – टा बाय बाय कहो उसको नो मोर  फ़िर, चिंता की दरकार ही…

Read More

त्योहार मनाएं, लेकिन शरीर को सेहतमंद रखने के लिए ये फेस्टिव मंत्र भी अपनाएं

विजय गर्ग इस दौरान न तो खानपान पर लोगों का कंट्रोल रह पाता है और न ही वो यह ध्यान रख पाते हैं कि उनके शरीर के लिए कौन सी चीज ठीक है और कौन सी नहीं। इस दाैरान तले-भुने पकवान, मिठाइयां और अल्कोहल का जमकर इस्तेमाल होता है। जब खाने को आसपास इतनी सारी…

Read More

त्योहारों का सेल्फ़ी ड्रामा

(त्योहार अब दिल से नहीं, डिस्प्ले से मनाए जाते हैं — हम अब त्योहारों से ज़्यादा अपनी तस्वीरें मना रहे हैं।) अब त्योहार पूजा, मिलन और आत्मिक उल्लास का नहीं, बल्कि ‘कंटेंट’ का मौसम बन गए हैं। दीपक की लौ से ज़्यादा रोशनी अब मोबाइल की फ्लैश में दिखती है। भक्ति, व्रत और परंपराएँ अब…

Read More

कार्तिक माह में अहोई, प्रबोधिनी, अमावस्या एवं छठ का है  विशेष महत्व  : पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विशलेषक / पत्रकार जौनपुर यूपी

दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते।। कार्तिक माह में अहोई, प्रबोधिनी, अमावस्या एवं छठ का है  विशेष महत्व  पंकज सीबी मिश्रा , राजनीतिक विशलेषक / पत्रकार जौनपुर यूपी ध्वज, धनाढ्य, धर्म सम्मत और धार्मिक होना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है सनातन का अपितु मानवता का पालन करना ही…

Read More

अंधकार से प्रकाश की ओर : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

सर्वप्रथम आप सभी को आगामी पखवाड़े में पड़ने वाले त्यौहारों के लिए बधाई एवं अनन्त शुभकामना। दीपावली का दीप जगे आप सभी के घर में मन में, श्रीकृष्ण का ज्ञान मिले’ श्री गोवर्धन जी ‘ की पूजा के साथ और भाई-बहन के पचित्र प्रेम बंधन का प्रतीक भैयादूज पर्व के साथ भाई बहने का प्यार-सम्मान…

Read More

एक दीप मेरा, राष्ट के नाम

                                                                                                            कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक एक कर के बीत गया एक और साल और फिर आ गई दीपावली । जगमग रोशनी से जगमग होने लगे हें घर आंगन । आंगन तो अब रहे नहीं, कांक्रीट के जगल हमने पैदा कर दिए हैं । माटी के आंगन में माटी के दिए की मध्यम रोशनी कभी करती थी…

Read More