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गायों की हो रही है दुर्दशा

भारतीय संस्कृति में जिस गाय को ‘मां’ की संज्ञा दी गई है, उसका ऐसा हश्र लम्पी बीमारी से पहले कभी नहीं हुआ। गायों की दुर्दशा को लेकर अब सिर्फ जिनके घर गाय है वो ही चिंतित हैं।  क्या गाय बचाने की जिम्मेवारी सिर्फ पशुपालन विभाग की ही बनती है, बाकी समाज केवल तमाशा देखे। आज…

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राष्ट्रभाषा  हिंदी के आगे आज भी नतमस्तक है समाज ..!

हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा की सार्थकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर  कालजई रचनाएं हिंदी भाषा में ही उद्धृत है । हिंदी हमारी राजभाषा है अर्थात राज्य के कामकाज में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है। अंग्रेजों से स्वतंत्र होने के बाद भारत ने 14 सितंबर 1953…

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शिकायत समोसे वाले की

राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक आम व्यक्ति ने एक समोसे वाले की शिकायत सी.एम. हेल्पलाइन पर कर दी ‘‘बताइए साहब ये समोसे वाला समोसे घर ले जाने के लिए पैकेट में तो समोसे रख देता है पर उसके साथ प्लेट नहीं देता हम समोसों को खायेंगें कैसे ? जबकि उसकी दुकान पर समोसा खाओ…

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पावन शिक्षक दिवस पर समर्पित चंद शब्द-पुष्प:

कृष्णजैसा सारथी जब अर्जुन को मिला, युद्धभूमि में तब गीता का उद्घोष हुआ. तब एकआज्ञाकारी शिष्य सा था कुंतीपुत्र, गुरु के रूप में देवकीनंदनको आना पड़ा. अन्याय,अत्याचार और भयंकर भ्रष्टाचार; जब भी समाज में निर्बाधबढ़ने लगता है. गिरिधारी सा गुरु और पार्थ साविद्यार्थी, काल के कोख सेतबतुरंतपैदा होता है. बिगड़ती हुई व्यवस्था को पटरी परलाना,…

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संविधान संशोधन का क्या फायदा जब कानून बनाने वाले अयोग्य और स्वार्थ से भरे हों।।

समावेशी नेतृत्व का अर्थ बड़ा ही व्यापक और संधर्ष करने वाला होता है,  जो संयम, धैर्य सहनशीलता के साथ सबको समान भावना के साथ समावेश कर आगे बढ़ने को प्रेरित करे।जो खुद की नहीं  अपितु अपने संगठन अपने लोगो के आगे बढाने की सोच रखे वही नेतृत्व कहलाता है। सभी को समान अवसर मिले,  सभी…

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भारत के सांस्कृतिक पुनरूत्थान के विश्वकर्मा हैं नरेन्द्र मोदी

यह सुखद संयोग है कि आज देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा जी व राष्ट्रशिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन एक साथ है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में अपने संबोधन में कहा था कि हुनरमंद ही आज के युग के विश्वकर्मा हैं। प्रधानमंत्री स्वयं भी इसी दायरे में आते हैं। भगवान विश्वकर्मा ने…

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पंच से पक्षकार

          हरिप्रसाद और रामप्रसाद दोनों सगे भाई थे। उम्र के आखिरी पड़ाव तक दोनों के रिश्ते ठीक-ठाक थे। दोनों ने आपसी सहमति से रामनगर चौराहे वाली अपनी पैतृक जमीन पर दुकान बनाने का सोचा, ताकि उससे जो आय हो उससे उनका जीवन सुचारू रूप से चल सके।       दुकान का काम चल ही रहा था…

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हिंदी भाषा भूषण की मानद उपाधि मिली.. उर्मिला को

छत्तीसगढ की साहित्यकार उर्मिला देवी उर्मि को हिंदी भाषा की अनुपम सेवा के लिए देश की प्रतिष्ठित संस्था.. साहित्य मंडल नाथद्वारा राजस्थान.. द्वारा हिंदी भाषा भूषण की उपाधि से विभूषित किया गया है ।हिंदी पखवाडे के अवसर पर संस्था द्वारा 14 से 16 सितं. 22 तक .. हिंदी लाओ,देश बचाओ.. शीर्षक से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी…

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संपादक मनमोहन शर्मा ‘शरण
को मिला ‘संपादक रत्न सम्मान’

साहित्य जगत में अपनी अनुपम अनूठी एवं गौरवमयी उपस्थिति दर्ज कराता विश्व विख्यात संस्थान ‘साहित्य मण्डल श्रीनाथद्वारा’ द्वारा 3 दिवसीय आयोजन ‘हिंदी लाओ देश बचाओ’ में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे साहित्य प्रेमियों, पत्रकार–संपादक, समाजसेवियों का मिलन हुआ जिसमें उत्कृष्ट साहित्य सृजन हेतु साहित्यकारों को तथा संपादन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर संपादक…

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हमारी गुरु- शिष्य परम्परा

क‌ष्ण पक्ष को पार कर पूर्ण चंद्र हमें प्रेरणा देता है पूर्णता की। पंद्रह दिवस की कटाई -छटाई के उपरांत जो पूर्ण रूप उसे पूर्णिमा को मिलता है वह द्योतक है उसकी अविराम साधना का।शायद इसीलिए वर्ष की बारहों पूर्णिमा अपने आप में समृद्ध हैं,किसी ना किसी सांस्कृतिक सौष्ठव से। श्रावणी पूर्णिमा रक्षाबंधन का पर्व…

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