भक्ति, बाबाओं की सत्ता और न्याय का विरोधाभास
जेल, पैरोल और धार्मिक प्रभाव के बीच उलझता भारतीय समाज – डॉ. सत्यवान सौरभ भारत में धर्म केवल आस्था का विषय नहीं है; वह सामाजिक प्रभाव, राजनीतिक शक्ति और आर्थिक संरचना का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। यही कारण है कि जब किसी बड़े धार्मिक बाबा, स्वयंभू संत या आध्यात्मिक संगठन के प्रमुख पर…
