तुम गए तो आंखों में शोर था,
जैसे बारिश में छुपा कोई निचला ज़ोर था, मिट्टी की ख़ुशबू से भीगी पिच पर, तुम्हारे क़दमों का अभी तक कोई असर था। तुम्हारी हर इनिंग एक कहानी थी, पसीने से भीगी वो सफ़ेद जर्सी बेमिसाल निशानी थी, भीड़ की धड़कन, टीम की जान, तुम्हारे बिना ये मैदान कुछ वीरान था। तुम गए तो तालियों…
