कविता और कहानी
तुझसे इश्क इजहार करेंगे
मिलन प्रिये जब तुमसे होगा, दिल की हम तुम बात करेंगे। नयनों से हम नयन मिलाकर, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। इक दूजे का हाथ थाम हम, अपनी दिल की बात करेंगे। अपने दिलों के तरंग मिला, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। बाहों में बाहें डाले हम, प्रेम मिलन की बात करेंगे। इक दूजे को ले बाहों …
प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम
डॉक्टर विधु भूषण त्रिवेदी जी ने अपने हृदय से अशीष अमृत वर्षा द्वारा ‘हृदयागंन भजन संध्या’ सजाकर हृदयांगन परिवार के मन का कौना कौना पावन किया प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम देशभर के विभिन्न आईआईटी संस्थानों में दाखिले लेने के सन्दर्भ में आयोजित की…
कंजके (कन्या भोज)पर कविता
चलों चलों आज फिर से गुलजार करतें हैं बचपनवो छोले पूड़ी हलवेकी महक ताजाकर कंजक(कन्या) बनगुल्लक भरते हैं फिरपुरानी यादों से …हर पर्व अपनी महक और स्वाद लिए आता है,रह रह कर बचपन की याद दिलाता है,क्या वो दिन थे औरक्या थे जलवे,आहा! वो छोले,पूड़ी और हलवे!चलों आज फिर सेगुलजार करतें हैं बचपनमाँ अंबा की…
‘बापू’तेरी जैसी संतान पाकर,
डॉक्टर सुधीर सिंह ‘बापू’तेरी जैसी संतान पाकर, भारत माता धन्य हो गई थी. आज भी वैसी संतान के लिए, व्याकुल हो रही है माँ भारती! विषमता से भरे इस समाज में, देशभक्तों की बहुत ही कमी है. परेशान भारत माता कहती है, कोईअब महात्मा गांधी नहीं है. बापू! ईमानदारी की पूछ नहीं, दिव्य-दृष्टि से तुम…
❤️ ये बाईं ओर रहता है ❤️
*ये जो सीने में मेरे . बाई और रहता हैं बखूबी सारे रिश्ते निभाने को कहता है, हम काम में उलझ जाते तो, तो ये प्रकृति की धड़कन सुनाता है तर्क की बेरंग दुनिया में ये इश्क़ का रंग भरता है अक़सर यादों की सैर कराता है ये जो सीने में मेरे ❤️बाईं ओर रहता…
हिन्दी जन जन का आधार है
-राजकुमार अरोड़ा गाइड हिन्दी के लिये बड़े जागरूकता, हो सरल सुबोध,हिन्दी का प्रचार। यही भारत का गर्व,गरिमा,अभिमान इसी का ही तो करना है खूब प्रसार।। अंग्रेजी अंग्रेजी रटने वालो,तुमने स्वयं, ही तो मातृभाषा का मान घटाया है। क्या कभी अंग्रेजों ने,अपने देश में किसी भी तरह,अंग्रेजी दिवस मनाया है।। हिन्दी,मनभावन हिन्दी, दुलारी हिन्दी, हिन्दी पूरे…
एकमात्र हिंदी
हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो हमारे पूरे भारत में बोली और समझी जाती है ।चाहे हमारे बच्चे कितनी भी अंग्रेजी हया किसी और भाषा को सीख ले परंतु वार्तालाप तो हिंदी में ही करते हैं। क्योंकि हमारी जड़े तो हिंदी में ही हैं, जो बात हमारी मातृभाषा मैं है वह बात किसी और…
