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बाल मजदूरी
माँ शारदे को सादर नमन बिषय:-बाल मजदूरी विधा:-काव्य सृजन तुम्हें गमगीन कर देंगे, गरीबों के ये आशियाने। थामकर दिल वहाँ जाना, मिलेंगे त्रस्त दीवाने।॥ ना होंगे पात्र भंडारण, अभावों से भरा जीवन। जरूरतें भी नहीं ज्यादा, ख्वाबों से विमुख मन॥ बडा़ परिवार एक कारण, अशिक्षा से भरा दामन। व्यस्त रहते भरण पोषण, दीनता इनका आभूषण॥…
एरोप्लेन और मैं
एरोप्लेन उड़ा मैं बैठी विंडो सीट बाहर देखा सागर चला मेरे साथ चलता गया साथ साथ फिर रुकने लगा थकने लगा चला गया कहीं पीछे। बस मेरा एरोप्लेन ही चलता गया। एरोप्लेन और मैं आज एरोप्लेन उड़ा मैं विंडो सीट बैठी। बाहर देखा मेरे साथ मेरा शहर चला। कुछ दूर चला । फिर रुकने लगा।…
रिश्तो में सामंजस्य
निहारिका की शादी खूब धूमधाम से हुई। वह बहुत खुश है। ससुराल में उसे खूब अच्छा लाड प्यार मिल रहा है। पग फेरे (गौने) की रस्म के लिए आज वह मायके आई हुई है। सुबह से ही चहक रही है। सभी को अपने ससुराल के किस्से बताने में लगी हुई है। शाम को उसके ससुराल…
देश में पनप रहें खतरनाक वीआईपी कल्चर से निजात कब..?
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, महाकाल मंदिर, अङ्गदानंद आश्रम इत्यादि जगहों पर तेजी से पनप चुके वीआईपी कल्चर ने ना सिर्फ आस्था को चोट पहुँचाना शुरू कर दिया है अपितु लोगो को सनातन और पूजा पाठ से भी दूर करने का काम किया है। मै अभी पिछले सप्ताह काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल धाम गया पर…
संसद की सुरक्षा व्यवस्था सरकार की नहीं, मेरी जिम्मेदारी है : लोकसभा स्पीकर
लोकसभा की सुरक्षा में बुधवार को हुई चूक के मामले में गुरुवार को भी लोक सभा में जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने सरकार के जवाब और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष सरकार की तरफ से जवाब की मांग करते हुए गृह मंत्री अमित…
अब नहीं रही
घुमंतु परिवार में भीख के रोजगार में, वह चलने से लाचार टांगें अब नहीं रहीं। रीते घड़े की पहेलियां दाना खोजती उंगलियां, वह पेट की पीड़ाएं अब नहीं रहीं। दिन में लकड़ी बीनना रात के लिए सहेजना, वो आग तापती रातें अब नहीं रहीं। कलुआ कई दिनों से आया नहीं शहर से, वो बेटे को…
10 दिसंबर मानव अधिकारों के जागरुकता का दिन
विश्व मानव अधिकार दिवस पर विशेष- लाल बिहारी लाल (वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार) नई दिल्ली। आज मानव के अधिकारों के संरक्षण का संवैधानिक दर्जा पूरी दुनिया में प्राप्त है। मानव अधिकारों से अभिप्राय ”मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रत से है जिसके सभी मानव प्राणी समान रुप से हकदार है। जिसमें स्वतंत्रता, समाजिक ,आर्थिक औऱ राजनैतिक रूप…
टनल में फंसे मजदूरों को जातिवाद का फायदा क्यों नहीं मिला …!
उत्तरकाशी टनल में फंसे मजदूरों के जगह अगर यहीं 41 वीआईपी लोग एलीट क्लास अथवा पिछड़े और दलित नेता टाईप के होते और वे ऐसे ही कहीं फंस जाते तो सदन के दलित नेता और मीडिया क्या करता ? पूरा देश सर पर उठा लेता। बोलने का मतलब है सरकार से सवाल करना मीडिया ने…
बढ़ते हुए तलाक कर रहे सामाजिक ताने-बाने ख़ाक
पश्चिमी मीडिया और वैश्वीकरण के प्रभाव ने भारतीय समाज की प्रेम और रिश्तों की धारणा को प्रभावित किया है। युवा पीढ़ी पारंपरिक पारिवारिक अपेक्षाओं की तुलना में व्यक्तिगत खुशी और अनुकूलता को प्राथमिकता देने लगी है, जिसके कारण जब उनकी शादी में संतुष्टि नहीं मिलती है तो वे तलाक को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप…
फिरी की घोषणायें ही बन चुकी हैं आधार
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव टनल में फंसे हैं मजदूर जिनको पन्द्रह दिनों की कवायद के बाद भी नहीं निकाला जा सका । हो सकता है कि जब तक यह आलेख छपे तब तक वे निकल जायें । ईष्वर ऐसा ही करे । पर टनल में मजदूरों के फंसने और एक लम्बी कवायद ने यह तो समझा ही…
