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अपने होने का आनंद- आत्म निरीक्षण 

सुख-दुःख का संबंध मन और शरीर से होता है, जबकि आनंद का संबंध अंतरात्मा से होता है। आनंद अगर मिल जाए तो व्यक्ति उसे छोड़ना नहीं चाहेगा। प्रश्न यह है कि आनंद की प्राप्ति कैसे हो? इसके लिए हमें स्वयं से प्रेम करना और दूसरों में प्रेम बांटना होगा। ईश्वर द्वारा निर्मित जीवों के प्रति…

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प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञानभिक्षु’150 से ज्यादा राष्ट्रिय अवार्ड्स से सम्मानित

प्रेम भारद्वाज ‘ज्ञानभिक्षु’,लेखक,कवि, समालोचक, 7 अंतरराष्ट्रीय साहित्य अवार्ड विजेता,150 से ज्यादा राष्ट्रिय अवार्ड से सम्मानित, हिन्दी, उर्दू, संस्कृत, अंग्रेजी आदि भाषाओं में साहित्य सर्जन,लगभग 100 पुस्तकें जिन पर समीक्षा संपादक,कई मासिक और पाक्षिक पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन और संपादक,टीबी , रेडियो पर 100 से ज्यादा काव्य पाठ और साक्षात्कार आदि के साथ अन्तर्राष्ट्रीय मंचों का…

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सही कदम

        घर के बाहर बारिश की झड़ी लगी हुई थी और अन्दर सीमा और रमेश चाय के साथ पकौड़े खाने का आनंद ले रहे थे । बारिश में ज्यादातर लोग चाय पकौड़े का आनंद लेते हैं। बातें करते करते सीमा को अपना बचपन याद आने लगा । कैसे वह बारिश में बाहर भाग जाती थी…

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आत्मालाप : उल्टे पांव भूत के

           देवेन्द्र कुमार पाठक गांव में अब मास्क कोई भी नहीं लगाता.हाँ, वे लोग घर, जेब, बैग-थैले में एक-दो मास्क जरूर रखे रहते हैं, जो कुछ पढ़े-लिखे हैं या फिर वे सयाने जिन्हें शासन-सियासत, आधि-व्याधि, सूखा-बाढ़, अकाल-गिरानी  और दुनियादारी की गहरी समझ है. जिनको ऐसे दुर्दिन भुगतने- झेलने के बड़े तल्ख और कड़वे अनुभव हैं….

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बंकिमचंद्र के जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन

भारतीय स्वतंत्रता काल में क्रांतिकारियों का प्रेरणास्रोत -‘वंदे मातरम्’- जो 1937 में भारत का राष्ट्रगीत बन गया, जिसके रचयिता बंग्ला भाषा के प्रख्यात उपन्यासकार एवं कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के जन्मदिन पर “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था) के तत्वावधान में संस्था के अध्यक्ष श्री देवेंद्र नाथ शुक्ल एवं महासचिव डॉ. मुन्ना लाल प्रसाद के संचालन…

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“एहसास चाँद के” काव्यसंग्रह  की समीक्षा

समीक्षक:- कमल कांत शर्माएहसासों  को जीवन की सफलता के मामले में  एक बड़ा मानक माना गया है, और जब अपनें दूर जाकर रहने लगते है तो इन एहसासों को सहेजने, संभालने की और भी ज्यादा  आवश्यकता  महसूस की जाती है।  मधुर रिश्तों के लिए सबसे जरूरी होता है, आपसी सामंजस्य और समर्पण का भाव, और जब…

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जीवन गरम चाय की प्याली

पुस्तक समीक्षा : कविता मल्होत्रा ये गर्म चाय की प्याली नहीं बल्कि जीवन को सार्थक दृष्टिकोण देती वो खुशहाली है, जिसके अमृत पान से समूचे ब्रह्मांड में जागृति रूपांतरित हो सकती है। समीक्षा तो नहीं हो पाएगी मुझसे इस अनाहद नाद की कोशिश ज़रूर रहेगी,जागृति संग रहे आपके हर अल्फ़ाज़ की  कई दिन से इस अनूठे…

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चिंता का सबब बनता गिरता हुआ रुपया 

-सत्यवान ‘सौरभ’ रुपये के मूल्यह्रास का मतलब है कि डॉलर के मुकाबले रुपया कम मूल्यवान हो गया है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 77.44 के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया। सख्त वैश्विक मौद्रिक नीति, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और जोखिम से बचने, और उच्च चालू खाता घाटे से भारतीय रुपये के लिए गिरावट…

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सम्मान की धज्जियां उड़ाता लूटतंत्र !

खुला समाज कभी खुला नही होता, रैपर में बंद होता है। पैक्डनेस ही ओपन सोसाइटी है , अपनी पॉलिटिक्स है अपना रहन सहन है ।ओपन सोसाइटी में अभिव्यक्ति का खुलापन किसी मुखौटे को लगा कर ही पाया जाता है ताजा उदाहरण विधानसभा में अखिलेश यादव जी है । मुखौटा लगाने और उसे ही वास्तविक चरित्र…

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पर्यावरण सुरक्षित रहे यदि मानव मन लक्षित रहे

कविता मल्होत्रा (संरक्षक, स्थायी स्तंभकार) भला चारित्रिक गठन अनुवांशिक कहाँ होता है अनासक्त प्रेम जहाँ पर्यावरण सुरक्षित वहाँ होता है ✍️ विश्व का असीम और निःशुल्क पुस्तकालय मानव मन में ही विद्यमान है, जो हर किसी को अपने मन का अध्ययन करने में सहायक होता है। लेकिन इस पुस्तकालय तक पहुँचने का न तो कोई…

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