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आखिर क्यों लोग वोट देने क्यों नहीं निकल रहे?
क्या नागरिक कथित राजनीतिक तानाशाही से उत्पीड़ित महसूस कर रहे हैं और ब्रिटिश राज की याद कर रहे हैं? क्या लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया में रुचि कम हो रही है? ये ज्वलंत प्रश्न समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उठाए जा रहे हैं, जो चुनावों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट से उजागर…
सार्थक भागीदारी के बिना कैसे हल होंगे आधी दुनिया के मसले
(अगर आधी आबादी से होते हुए भी महिलाएँ इस आबादी की कहानियाँ नहीं कहेंगी, तो कौन कहेगा? केवल महिला दिवस पर ही नहीं, हर रोज़ महिलाओं को लड़ाई लड़नी पड़ेगी इस बदलाव के लिए, अपने हक़ों के लिए। छोटी शुरुआत ही सही, लेकिन शुरुआत सबको करनी पड़ेगी। ये संघर्ष का सफ़र अंतहीन है। महिलाओं के…
चुनौती है बढ़ता तापमान, बदलता वायुमंडलीय पैटर्न।
वैश्विक समुद्री बर्फ में खतरनाक गिरावट को रोकने के लिए जलवायु कार्यवाही निर्णायक होनी चाहिए। अनुकूली नीतियों और बेहतर ध्रुवीय निगरानी से जलवायु लचीलापन बढ़ेगा। एक टिकाऊ भविष्य उत्सर्जन को कम करने और ग्रह के नाज़ुक क्रायोस्फीयर की रक्षा करने के लिए सभी के दृढ़ संकल्प पर निर्भर करता है। कई समुदायों में जलवायु परिवर्तन…
भगवान महावीर के उपदेशों का प्रचार करने वाली पुस्तक के लिए Rs.2 लाख का पुरस्कार
भगवान महावीर फाउंडेशन द्वारा 15/02/2025 को डॉ. नेमीचंद जैन मेमोरियल अवार्ड विजेता की घोषणा की गई। प्रोफेसर भागचंद्र जैन “भास्कर” द्वारा लिखित “जैन सांस्कृतिक चेतना के स्वर” को चौथे डॉ.नेमीचंद जैन मेमोरियल पुरस्कार के लिए पुरस्कार विजेता के रूप में चुना गया है। पुरस्कार में 2 लाख रुपये की नकद राशि, एक स्मृति चिन्ह और…
लाडला मुख्यमंत्री बोलकर राज्य और राजनीति छीन लेती है भाजपा
पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी आपको याद होगा कभी शिवराज सिंह लाडला मुख्यमंत्री हुआ करते थे, उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति छोड़नी पड़ी, वसुंधरा राजे लाडली मुख्यमंत्री हुआ करती थी, उनकी जगह एक नए चेहरे को बिठा दिया गया , कभी एकनाथ शिंदे लाडले मुख्यमंत्री हुआ करते थे और पॉवर में…
मोहन राकेश शताब्दी वर्ष के बहाने
अमृतसर में सौ साल पहले मदन मोहन गुगलानी के नाम से एक मध्यमवर्गीय सिंधी परिवार में जन्मे मोहन राकेश एक बेहतरीन लेखक थे, जिन्होंने कई विधाओं- कहानियों, उपन्यासों, नाटकों, अनुवादों, यात्रा-वृत्तांतों, आलोचना और व्यक्तिगत डायरियों में कथा-रचना करने की कोशिश की और कहानियों और नाटकों के क्षेत्र में विशेष रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। अमृतसर…
जीवन में बढ़ता हुआ “विकल्प “ सही या ग़लत ?
आधुनिक युग में जीवन में बढ़ता हुआ विकल्प चुनौतियां लेकर आता है ,चुनौतियों को अस्वीकार करना ही जीवन संघर्ष बन जाता है और तब जीवन में विकल्प की कमी हो तब विकल्प ढूँढो ताकि जीवन में एक नए मौके मिलतेरहे ….क्योंकि नए मौके जीवन को नई उम्मीद के साथ जोड़कर जीवन को सफलता की ओर…
लोककला के नाम पर अश्लीलता का तड़का
लोककला के नाम पर अश्लीलता का तड़का अश्लीलता फैलाने वाले कलाकारों पर लगे बैन, ग़लत दृश्य दिखाना, अश्लील नाटकों-गीतों का मंचन समाज से खिलवाड़। एक ओर जहाँ कई लोग संस्कृति को प्रमोट करने के लिए अपना करियर, अपनी मेहनत और अपना सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं तो कोई हमारी संस्कृति को इस तरह…
सोच बुद्धि और विचार – आशा सहाय
मैंने अपने चिन्तन की प्रक्रिया का आरम्भ संभवतः रात्रि के आकाश के निरीक्षण से ही किया था। निश्चय ही बाल मन की जिज्ञासा के तहत ही तरह तरह के प्रश्नों को जन्म देने वाली यह क्रिया अब एक विशाल चिन्तन प्रक्रिया बन गयी है और अन्ततः क्यों ,कैसे , कौन जैसे प्रश्नों से मस्तिष्क वैसे…
सिर्फ लूटते हैं फर्जी ट्रैवल एजेंट, एजेंसी और वेबसाइट
भारत में, हाल ही में धोखाधड़ी करने वाली ट्रैवल एजेंसियों में उछाल आया है जो अयोग्य व्यक्तियों को विदेश भेजने का वादा करती हैं। भले ही बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया हो, लेकिन निस्संदेह अभी भी बड़ी संख्या में लोग धोखाधड़ी से काम कर रहे हैं। अवैध छुट्टियों के पैकेज, पंजीकरण धोखाधड़ी…
