Special Article
प्लास्टिक छोड़े जीवन से नाता जोड़े- लाल बिहारी लाल
++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++दुनिया में 128 देश पहले ही प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिवंध लगा चुके है। भारत भी इस कड़ी में सुमार हो गया है। जहां 2 अक्टूबर 2019 से सिंगल यूज प्लास्टिक बैन हो गया है। इसकी घोषणा लाल किले से प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2019 को की थी हालाकि पिछले दो दशक से इस पर बातचीत चल रही थी लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर एक्शन…
आदिवासी समाज की लोकप्रिय नेत्री है द्रौपदी मुर्मू , अगली राष्ट्रपति बनने की ओर अग्रसर !
राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को चुनाव होने है और देश की राजनीति में पहला नागरिक कौन इसपर घमासान मचा है ! ममता बनर्जी अपने अहम में चूर वामपंथ विचारधारा के साथ विपक्ष को भड़का रही जबकि बीजेपी ने धोबी पछाड़ लगा कर ममता समेत पुरे विपक्ष की हवा निकाल दी । अगला राष्ट्रपति…
सावन को आने दो
कुछ तो ख़ता ज़रूर हुई होगी जमाने से वर्ना सावन क्यूँ आनाकानी करता आने से ✍️ हम सभी ने अपने स्कूलों के बंधे बंधाए सिलेबस में ये तो ज़रूर पढ़ा होगा कि धरती का कितना सारा हिस्सा पानी से घिरा हुआ है।सागर का पानी भाप बनकर बादल का रूप धारण कर लेता है और बरसात…
8th INTERNATIONAL DAY OF YOGA-2022
CONSULATE GENERAL OF INDIAVANCOUVERCELEBRATES8th INTERNATIONAL DAY OF YOGA-2022In Collaboration withAarogya Canada Curtain Raiser Program Nutan Thakurpresent“Healthy Life Style through Yog”program was held on 13th June 2022 at 11a.m.which was live also on facebook @cgivancouver
हम कहां आ गये हैं, यूं ही साथ चलते चलते’
सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’ आप सभी को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की हार्दिक बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं । जीवन जीने का, स्वस्थ रहने का स्वआनन्द से परमानन्द तक की प्राप्ति का मार्ग दिखाने वाले भारत देश, जिसको पुन: विश्वगुरु बनाने का स्वप्न देखा जा रहा है । ऐसा हो तो सकता है किन्तु…
विरोध प्रदर्शन का बेहद घटिया तरीका !
पहले कानपुर फिर प्रयागराज और अब मुरादाबाद में पत्थर चले ,जबकि कानपुर में हुए पत्थरबाजी को लेकर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने जिस प्रकार कार्रवाई की है एक उदाहरण हो सकता है कानून व्यवस्था में शांति स्थापना का। लेकिन इसके बावजूद भी उन्मादियों में कोई सबक नहीं है। तब जब पूरे देश में योगी जी के…
अपनों की ही नजरबंदी
राजनीतिक सफरनामा (कुशलेन्द्र श्रीवास्तव) विधायकों को मौज-मस्ती करा दी गई है पर नहीं उनकी घेराबंदी कराई गई । क्या समय आ गया राजनीतिक दलों को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं रहा । चाहे जब उन्हें घेर कर बंद कर दिया जाता है । विधायकों का भी जमीर नहीं जागता कि वे कह सकें कि…
“एहसास चाँद के” काव्यसंग्रह की समीक्षा
समीक्षक:- कमल कांत शर्माएहसासों को जीवन की सफलता के मामले में एक बड़ा मानक माना गया है, और जब अपनें दूर जाकर रहने लगते है तो इन एहसासों को सहेजने, संभालने की और भी ज्यादा आवश्यकता महसूस की जाती है। मधुर रिश्तों के लिए सबसे जरूरी होता है, आपसी सामंजस्य और समर्पण का भाव, और जब…
सम्मान की धज्जियां उड़ाता लूटतंत्र !
खुला समाज कभी खुला नही होता, रैपर में बंद होता है। पैक्डनेस ही ओपन सोसाइटी है , अपनी पॉलिटिक्स है अपना रहन सहन है ।ओपन सोसाइटी में अभिव्यक्ति का खुलापन किसी मुखौटे को लगा कर ही पाया जाता है ताजा उदाहरण विधानसभा में अखिलेश यादव जी है । मुखौटा लगाने और उसे ही वास्तविक चरित्र…
