Special Article
सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’
2 अक्टूबर, दो महान विभूतियों की जयंती, एक अहिंसा के पुजारी मोहनदास कर्मचन्द गाँधी जी जिन्हें प्यार से बापू भी कहा जाता है । दूसरी विभूति जिसने शून्य से शिखर तक की यात्र कर विपरीत परिस्थितियें में भी सत्य–साहस और पुरुषार्थ के बल पर कैसे विजय अर्थात् अपने लक्ष्य को साधा जा सकता है, ‘जय–जवान…
हिंदी लाओ देश बचाओ समारोह 2022
हिंदी लाओ देश बचाओ समारोह 2022 का शुभारंभ प्रातः देशभर के सहित्यकारों व विद्यालयी छात्र-छात्राओं की नगर परिक्रमा से हुआ। हाठों में पट्टिकाएं लिए बेंड बाजों की मधुर ध्वनि के साथ गगनभेदी उद्घोषों से माँ हिंदी का महिमा गान किया गया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता जनार्दन रॉय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ बलवंत शांतिलाल जानी, राजकोट,…
राष्ट्र गौरव को द्विगुणित करता वैदिक और वैज्ञानिक शिक्षा का स्वरूप।
(राष्ट्र निर्माण में वैदिक शिक्षा ,ज्ञान की समीचीन भूमिका) भारत में प्रागैतिहासिक वैदिक तथा सनातनी शिक्षा तथा ज्ञान का स्वरूप बड़ा ही विस्तृत है। भारत को भारतवर्ष भी आदिकाल की सांस्कृतिक शिक्षा और विशाल ज्ञान के भरपूर स्रोतों के कारण ही कहा जाता रहा है। भारत के ऋषि, मुनि, गौतम और अनेक संस्कृत के शिक्षकों…
राष्ट्रभाषा हिंदी के आगे आज भी नतमस्तक है समाज ..!
हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी भाषा की सार्थकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकतर कालजई रचनाएं हिंदी भाषा में ही उद्धृत है । हिंदी हमारी राजभाषा है अर्थात राज्य के कामकाज में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है। अंग्रेजों से स्वतंत्र होने के बाद भारत ने 14 सितंबर 1953…
शिकायत समोसे वाले की
राजनीतिक सफरनामा : कुशलेन्द्र श्रीवास्तव एक आम व्यक्ति ने एक समोसे वाले की शिकायत सी.एम. हेल्पलाइन पर कर दी ‘‘बताइए साहब ये समोसे वाला समोसे घर ले जाने के लिए पैकेट में तो समोसे रख देता है पर उसके साथ प्लेट नहीं देता हम समोसों को खायेंगें कैसे ? जबकि उसकी दुकान पर समोसा खाओ…
भारत के सांस्कृतिक पुनरूत्थान के विश्वकर्मा हैं नरेन्द्र मोदी
यह सुखद संयोग है कि आज देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा जी व राष्ट्रशिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन एक साथ है। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में अपने संबोधन में कहा था कि हुनरमंद ही आज के युग के विश्वकर्मा हैं। प्रधानमंत्री स्वयं भी इसी दायरे में आते हैं। भगवान विश्वकर्मा ने…
हमारी गुरु- शिष्य परम्परा
कष्ण पक्ष को पार कर पूर्ण चंद्र हमें प्रेरणा देता है पूर्णता की। पंद्रह दिवस की कटाई -छटाई के उपरांत जो पूर्ण रूप उसे पूर्णिमा को मिलता है वह द्योतक है उसकी अविराम साधना का।शायद इसीलिए वर्ष की बारहों पूर्णिमा अपने आप में समृद्ध हैं,किसी ना किसी सांस्कृतिक सौष्ठव से। श्रावणी पूर्णिमा रक्षाबंधन का पर्व…
जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।।
बच्चों के विकास में, शिक्षकों की आदर्श भूमिका सही मूल्यों और गुणों के प्रवर्तक और प्रेरक की होनी चाहिए। इस प्रकार, छात्रों को ज्ञान सीधे चम्मच खिलाने के बजाय, उन्हें बच्चों में पूछताछ, तर्कसंगतता की भावना विकसित करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि वे अपने दम पर, जुनून के साथ सीखने के लिए सशक्त महसूस…
व्यंग्य – जात न पूछिए नेता की…!
जीवन में कोई कब कोई नेता किस धर्म जाति संप्रदाय का हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता । आजकल के ट्रेंड में हर संप्रदाय का अपना रूल रेगुलेशन है । किसी को डॉगगिरी पसंद है तो किसी को घाघगिरी । अपने पलटूराम भैया को ही ले लीजिए ताजा ताजा मीम समर्थक बने थे और…
