Special Article
मुखर राजनीति के महानायकों के लायक नहीं माहौल !
बिहार राजनीति में उठापटक ,बीते दस तारीख की देर रात्रि तब समाप्त हो गया जब बिहार विधानसभा चुनाव के सभी दो सौ तैतालिस सीटों के परिणाम जारी कर दिए गए । भाजपा, जदयू ,हम और वी आई पी की संयुक्त गठबंधन वाली एन डी ए ने एक सौ पच्चीस सीटों पर कब्ज़ा करके बिहार विधानसभा…
आती रहेंगी बहारें : कविता मल्होत्रा
किसी की वेदना है घर से पीछा छुड़ाने की किसी की व्यथा है अपने घर लौट जाने की ✍️ बीते साल ने कितना कुछ गँवा दिया ये एक नकारात्मक सोच है।बीते हुए लम्हों ने कितना कुछ सिखा दिया ये एक सकारात्मक सोच है। कोरोना-काल में कितने ही लोगों के रोज़गार छिन गए, कितने ही लोग…
वो जीत जो जीत सी ना लगे, वो हार जो हार सी न लगे
सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण ‘ हमारे भारत की सुन्दरता–भव्यता यहां के त्यौहारों में देखते ही बनती है । हालांकि 2020 वर्ष कोरोना काल की भेंट चढ़ गया । जनता ने अपना दृष्टिकोण भी सूक्ष्म कर लिया है और आज में जीना प्रारंभ कर दिया जिसमें आवश्यकता की, रोजमर्रा की चीजें और स्वास्थ्य ठीक है,…
कानून के साथ लिंग संवेदीकरण महिलाओं के लिए अच्छा साबित हो सकता है
लैंगिक भेदभाव का मूल कारण भारतीय समाज में प्रचलित पितृसत्तात्मक मन है. हालांकि अब ये शहरीकरण और शिक्षा के साथ बदल रहा है, फिर भी एक के लिए लंबा रास्ता तय करना है. सामाजिक कंडीशनिंग और कठोर लिंग निर्माणों की घटनाओं के कारण असमान संतुलन बना हुआ है) —-प्रियंका सौरभ रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,…
शक्ति नहीं, शक्ति पुँज हैं हम
मनुष्य की शक्ति का एहसास स्वयं उसके सिवा और कौन कर सकता है?अपने अन्दर की ऊर्जा को तभी जान पायेंगे,जब आप उमंग से भर कर कुछ नया करने की ठान लेंगे।विभिन्न वैज्ञानिकों ने बहुमूल्य खोजों से जहाँ जीवन को इतना आसान बना दिया उसके पीछे उनके अंतर्मन की शक्ति थी,जो एक शक्ति पुंज के रूप…
उपहारों को रिगिफ़्ट कीजिए और एक नए अंदाज़ में मनाइए पर्यावरणहितैषी दीपावली
पिछली दीपावली पर सूरत से एक वयोवृद्ध लेखिका ने मुझे दीपावली का एक ग्रीटिंगकार्ड भेजा जो डाक से आया था। आजकल डाक से ग्रीटिंगकार्ड भेजने का प्रचलन नहीं रहा लेकिन मैं इस वजह से ये चर्चा नहीं कर रहा हूं कि डाक से ग्रीटिंगकार्ड आया अपितु चर्चा का कारण है कि ये ग्रीटिंगकार्ड उनके पास…
मानसिक रोगी हो रहे हैं लोग।
लॉक डाउन खुलने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। ऐसा लगता है कि जनजीवन सामान्य हो गया है। सड़कों पर दौड़ती हुई गाड़ियाँ पब्लिक ट्राँसपोर्ट से लेकर प्राइवेट दुपहिए चौपहिए वाहनोऔर छोटे, मध्यम कोटि के शहरों, ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में पैदल चलनेवाले लोगों की बढ़ती हुई भीड़भाड़ देख कर ऐसा लगता है कि लोग…
अन्धेरे चौराहे पर अन्धा कुआँ
आज सच में हमारे देश की परिस्थिति कुछ ऐसी ही हो गई है,किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा कि सही दिशा में,सही विकास की राह पर कैसे आगे बढ़ा जाये। हर कोई अंधेरे में ही हाथ पांव मारता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के साठ साल के शासन को पानी पी पी कर…
नेहरू जयंती विशेष – आधुनिक भारत के सक्रिय राजनेता !
जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को ब्रिटिश शासन काल के भारत में इलाहाबाद बदला हुआ नाम प्रयागराज में हुआ था । जवाहर के पिता मोतीलाल नेहरू एक धनी बैरिस्टर जो कश्मीरी पण्डित थे। मोती लाल नेहरू सारस्वत कौल ब्राह्मण समुदाय से थे, उनकी माता का नाम स्वरूपरानी थुस्सू था, जो लाहौर में…
सत्याग्रह के सही मायने !
आज के समाज में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के विचार निसंदेह प्रासंगिक है । जिस सत्य अहिंसा और सद्भाव की बात राष्ट्रपिता गांधी करते थे वो आज के वर्तमान समय में लालच लाचारी और भ्रष्टाचार की भेट चढ़ चुकी है । प्रत्येक वर्ष हम दो अक्टूबर को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री जी का…
