रहे इस रूह की चूनर धानी
मौसम ने करवट ली और शीत ऋतु ने आगमन की सूचना दी है।लेकिन भानु काका के तेवर अब भी तीखे हैं।ग्लोबल वार्मिंग की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय मानव जाति अब भी बदन उघाड़ू परिधानों के फ़ेवर में है।समस्या के मूल में न जाकर सतही समाधान खोजना और लापरवाही से संतुष्ट हो जाना ये असँवेदनशील पीढ़ी…
