मैं “कंगना ” हूं सुन लो लोगों,
(सुनीता जायसवाल फैजाबाद उत्तर प्रदेश) अबला समझने की भूल ना करनाआऊंगी कलाई में “हथकड़ी” बनकरजेवर समझने की भूल ना करना! झुक गई हूं मैं जरा सा क्योंकि,मैं अदब की परवरिश हूँमेरी झुकी पीठ को तुम ,पायदान समझने की भूल ना करना! गिरेबान खाली नहीं तुम्हारा ,दुनिया भर की करतूतों से ,मेरे पाक दामन पर तुम,उंगली…
