स्वयं को पहचान लो
कुछ ठान लो अपने मन में, आ स्वयं को पहचान लो। भीड़ भरी इस दुनिया में, तुम भीड़ नहीं हो जान लो। चलो प्रकृति की गोद में, फिर खुशियों की कुटी छवायें। वादियों के आँगन में, …
कुछ ठान लो अपने मन में, आ स्वयं को पहचान लो। भीड़ भरी इस दुनिया में, तुम भीड़ नहीं हो जान लो। चलो प्रकृति की गोद में, फिर खुशियों की कुटी छवायें। वादियों के आँगन में, …
आज सुबह जितेश का फ़ोन आया; हिमांशु ने फ़ोन रिसीव किया बोला: हेल्लो, क्या हालचाल जितेश, कैसे हो ?जितेश बोला; क्या भाई तबियत खराब है ?”भाई जितेश तुम अब बार-बार बिमार कैसे हो जाते हो ?” हिमांशु ने पूछा ! “भाई याद है मुझे आज भी वह दिन जब मै बच्चा था,और गाँव में रहता था…
अधूरे ख़्वाब की ताबीर हूँ मैं कहीं ख़यालों की तेरे तस्वीर हूँ मैं कहीं।। लम्हा-लम्हा तू साथ रहता मेरे। तेरे जीवन की जागीर हूँ मैं कहीं।। हो मुक़म्मल मेरी भी हस्ती कभी। रंग लाती मुहब्बत की तासीर हूँ मैं कहीं।। जर्रे-जर्रे में तेरा अक्स दिखता मुझे। रहगुज़र की तेरे तक़दीर हूँ मैं कहीं।। चलती रहती…
प्रधान मंत्री जी का मुरीद सारी दुनिया है,एक-एक इंसान उनको नमन कर रहा है.जो लोग विश्व-हित में शुभ-कार्य करते हैं,इतिहास उनको युगों तक याद रखता है. ‘कोरोना’ के जाल मेंआज फंसा है संसार,उससे उबर जाना अब बहुत ही जरूरी है.अन्यथा प्रगति की गति ही रूक जायेगी,विकास से सबकी तकदीर जुड़ी रहती है. संकट की घड़ी…
This is the way kinderjoy Playway School celebrated earth day.Paintings made by our super talented KinderkidsKinderjoy playway schoolD-1/65, JANAKPURI
जिन्दगी इतनी सरल तो कभी भी नहीं थी,कठिनया ऋजु भी रही।लोगों के लिये तो यह ऐसी पहेली जिसको सब ने अपने अपने ढंग से हल करना चाहा,पर वो बिना हल हुएफिसलती रही,मचलती रही।जिन्दगी के अर्थ कोजिसने भी सिर्फ अर्थ में ही ढूंढना चाहा,उसकी जिन्दगी अर्थहीन हो कररह गई।जिन्दगी के अर्थ का वास्तविक मज़ा तोसन्तुष्टि में…
दूर से ही करबद्ध प्रणाम करेंजिम्मेदार बनेकेवल घर परिवार के लिए ही नहींजिसको जहां आवश्यकता हैसहयोग करें समाज औरदेश के साथ खड़े होकरइंसानियत का फर्ज़ निभाए” कोरोना” नाम की महामारी कोआस पास ना और बढ़ाएडरना नहीं समझना है जरूरीघर में रहना ना बाहर जानासावधानी , स्वच्छता का हैपाठ पढ़ना और पढ़ानाहाथो को धोना , चहेरा…
Doctor Sudhir Singh युद्ध जीतने के लिए योजना बहुत जरूरी है,इसके साथ जोश-जुनून ,विवेक भी चाहिए.धीरज का आकलन भी समर में ही होता है,जंग में जागरुकऔर सावधान रहना चाहिए.संकल्प के अभाव में जीतना संभव ही नहीं,सत्प्रयास संकल्प को सदा जीवंत रखता है.‘कोरोना’से महायुद्धआज कर रहा है इंसान,सामूहिक साधना से ही युद्ध जीता जाता है.‘कोरोना’ जानता…