ट्रॉली बैग…
‘सा’ब कुली?’ मैंने बिना उसकी ओर देखे ही ना कर दिया। ‘सा’ब, आपका सामान सीट तक पंहुचा दूंगा, बस पचास रुपए दे देना।’ मैंने मोबाइल से नजरें उठाई, बारह तेरह बरस का दुबला सा लड़का बड़ी आशान्वित नजरों से मुझे देख रहा था। मैंने कहा – ‘ज़रूरत नहीं है,’ और फिर मोबाइल पर नज़रें गड़ा…
