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माँ (कविता-7)

पूरे घर का काम समेट कर थकान से चूर सुस्ताने को लेटी माँ बेटी के आते ही फुर्ती से रसोई में बेसन,सूजी ढूँढ पकौड़ी-हलवा बनाने लगती है! सबके सामने चुप रहने वाली माँ बेटी के आते ही उसके सम्मुख अकेले में मुखर हो उठती है! कुछ दिनों मायके में रहने आई बेटी को जाते समय…

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माँ (कविता-8)

माँ मेरी माँ है सबसे प्यारी इस जग में है सबसे न्यारी सुबह सवेरे जग जाती है सबको सुलाकर सो जाती है सबको यत्न से खूब संवारती स्वयं को सहज ही भूल जाती मेरी माँ… आज खुजतो हूँ तुम्हें तारों में, फूलों में, गलियारों में, एक बार सीने से लगा जाओ बाँहों में अपनी सुला…

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नशे की जद में भामाशाह की नगरी

” लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है “ आज में जिस विषय पर लिख रहा हूँ उस विषय पर बशीर बद्र साहब की यह पंक्तियां एकदम सटीक बैठती नजर आती हैं माफ करना आज में जो लिख रहा हूँ वो शायद आपको बुरा लग सकता है?…

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दफ्तरों के इर्द-गिर्द खुशियां टटोलते पति-पत्नी

आज एकल परिवार और महिलाओं की नौकरी पर जाने से दांपत्य सुख के साथ-साथ पारिवारिक सुख जो होना चाहिए वह नहीं है। बच्चे किसी और पर आश्रित होने के कारण टीवी मोबाइल में घुसे रहते हैं। कामकाजी पति-पत्नी के मामलों में यह बात सामने आ रही है कि दोनों ऑफिस के बाद घर में मोबाइल…

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दिल्ली सरकार ने IPL सहित अन्य बड़े आयोजनों पर लगायी रोक

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने सम्मेंलन में पत्रकारों से कहा, ‘‘दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस को फैलाने से रोकने के लिए आईपीएल समेत सभी खेल, बड़े सेमिनार, कोंफ़्रेंस आदि के आयोजन पर पाबंदी लगा दी है।’’ दिल्ली सरकार ने कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी में 31 मार्च तक…

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माँ

माँ तू ममता की मूर्ति है,तुझे दोष न दिखे संतानों में नव मास उदर में तूने पालादुःख सहकर भी मुझे संभालासौ बार न्योछावर तू हो जातीमेरी मीठी मीठी मुस्कानों मे,माँ तू ममता की मूर्ति है,तुझे दोष न दिखे संतानों में ।।1।। मैं हंसता हूं तू हँसती हैमैं रोता हूँ तू रोती है।मेरा संसार सजाती तुमअपने…

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बैसाख़ी के फिर मेले हों

श्रीमती कविता मल्होत्रा इतिहास गवाह है कि जहाँ रूह सहमत होती है वहीं रब की रहमत होती है।किसी भी तरह की अनहोनी का अंदेशा सबसे पहले अपनी ही रूह को होता है।ये और बात है कि मानव की चेतना अपने ही चैतन्य के इशारे को नज़रअंदाज़ कर देती है।यूँ तो मानव की पहुँच चाँद तक…

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खाली ‘संदेश’ से बात नहीं बनेगी : मनमोहन शरण ‘शरण’

फरवरी माह जाते–जाते फाल्गुन माह में प्रवेश करा गया और ठंड कम होने लगी और गर्मी प्रारम्भ होने का संकेत देने लगी । आसमान से /धुंध हटी और मौसम साफ होने लगा । मौसम विभाग तो दिल्ली का मौसम फरवरी माह में पिछले 8–9 वर्षों से बेहतर है–साफ है – प्रदूषण के दृष्टिकोण से ।…

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मनुवाद से मानवता तक : हमारे शौर्य पर किसका जोर..!

पंकज सीबी मिश्रा  / पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक जौनपुर यूपी पहले परशुराम फिर संत तुलसीदास , महान चाणक्य , स्वतंत्रता के समय मंगल पांडेय , बलिदान के समय वीर चंद्रशेखर आजाद और अब राजनीति में कई ब्राह्मण जिन्होंने मनुवाद के अलख को शीर्ष तक पहुंचाया । सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ ऐसे कई विभूतियों ने…

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साक्षात्कार : आने वाली पीढी के लिए ज्ञान का महासागर भरा पडा है। –रामदेव धुरंधर

मॉरीशस के वरिष्ठ साहित्यकार रामदेव धुरंधर से राजेन्द्र परदेसी की बातचीत । प्रश्न 1 – मित्र रामदेव धुरंधर जी, आपसे एक महत्वपूर्ण प्रश्न करता हूँ। हिन्दी जगत में एक धारणा बनी होती है आप भारत के नागरिक थे जो मॉरिशस में जा कर बस गए हैं। आप इस पर क्या कहेंगे?उत्तर – आपका प्रश्न स्वयं…

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