जो जहां हैं वहीं पर रुक जाएं
Doctor Sudhir Singh जो जहां हैं वहीं पर रुक जाएं,‘होम शेल्टर’ का सहारा ले लें.घर-गांव आने की हड़बड़ी में,‘कोरोना’का खतरा बढ़ने न दें.सबों की अपनी जिम्मेवारी है,उससे हमलोग मुँह नहीं मोड़ें.देश आपात स्थिति में खड़ा है,हर प्रकार से सब सहयोग करें.वक्त कभी भी ढहरता नहीं है,आकर तेजी से गुजर जाता है.‘कोरोना’ भी जाएगा जरूर ही,जागरुक…
दंगाइयों की इंटरनेशनल बेइज्जती पर आमादा योगी सरकार !
आपको याद होगा कि दंगो पर एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी किया था कि दंगो को कुचलने का हुनर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से सीखें , ये टिप्पणी यूं ही नहीं था ना ही यह मिथ्या है क्योंकि योगी जी ने वो कर दिखाया जिसकी हिम्मत ना केजरीवाल सरकार…
धारा तीन सौ सत्तर से मुक्ति (घनाक्षरी )
सुखद घड़ी है आई सबको देते बधाई धारा तीन सौ सत्तर से मुक्ति जो पाई है। धैर्य और योजना से ऐसा पासा फेंक डाला कश्मीरी नेताओं की शामत जो आई है। जिन्हें छोड़ना पड़ा था कश्मीर रातों रात आज उन्हें न्याय वाली किरण दिखाई है घर घर दीप जले आज मोदी जी सारे ही भारत…
पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी का इन्द्रपार्क पालम में आगमन
आज 26 मार्च , देव मानव सेवा ट्रस्ट इन्द्रा पार्क पालम के प्रांगण को प्रयाग पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने चरणों से शुद्ध कर दिया बहुत ही सुन्दर प्रवचन सुनने को मिले बहुत ही शिक्षाप्रद विचारों का प्रदान किया, संस्था विशेष रूप से पूर्व पार्षद मेरे बड़े भाई श्री अनिल…
रसोईघर की मुहावरेदानी : डॉक्टर सरोजिनी प्रीतम
रसोईघर की पिटारी खोलकर देखिए तो लगता है, सारे मुहावरे भी यहीं पेट पालते रहे और फिर खिड़की के तांक-झांक करते हुए लोगों की जबान पर पहुंचे और सिर पर चढ़कर बोलने लगे। फिर उन्हें राख से मांज-मांज कर चमकाया गया और कहीं उस पर कलई की गयी और कहीं मुलम्मा चढ़ाया गया। कटोरदान…
गीत और ग़ज़ल को ऑक्सीजन देने वाला वट वृक्ष चला गया
सज्जनता, विनम्रता, सरलता और बड़प्पन सिखाना है तो डॉ. कुंअर बेचैन से सीखें। इतना बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद भी कोई अहम नहीं पला। गीत के शलाका पुरुष और ग़ज़ल के उस्ताद डॉ. कुंअर बेचैन अति विशिष्ट श्रेणी में आते थे। वे अत्यंत विद्वान और सतत् विचारशील थे। मैंने, उनके कवि सम्मेलनों के उनके…
किसी अच्छे संवाद लेखक से लिखवा लेते संवाद
कुशलेन्द्र श्रीवास्तव आदि पुरूष बहुत मंहगी फिल्म बनाई गई है । वैसे भी अब फिल्मों को अनावश्यक मंहगा करना फैशन जैसा बन गया है, ताकि कहने में अच्छा लगा कि हम कोई ऐसे वैसे फिल्म मेकर नहीं हैं कि सस्ती सी फिल्म बना दें । आदि पुरूष भी महंगी बना दी गई । जब इतनी…
कोरोना अवसाद में “संगीत” संजीवनी*
दुनिया के बड़े से बड़े शहर आज सुनसान हैं। लोग घरों में कैद हैं, तनाव में हैं और परेशान हैं। सोशल मीडिया से लेकर टेलीविजन, न्यूज चैनलों पर चल रहे नकारात्मक दृश्य व घटनाएं लोगों को विचलित और उदास महसूस करा रहे हैं। इस स्थिति में गायन एवं कला से जुड़े लोगों का कहना है…
