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डिजिटल इंडिया में सबसे बड़ा झोल

ऑनलाइन ठगों से सावधान एक तरफ डिजिटल इंडिया की बात कहकर तथा ऑनलाइन ट्रांजेक्सन को बढ़ावा देने की बात कही जाती है कि कैशलेस ट्रांजेक्शन होंगी तभी डिजिटल इंडिया बनेगा, व्यापार करना, लेनदेन करना सुगम हो जाएगा । ठीक है, सच भी है, आजकल ऑनलाइन ट्रांजेक्सन को और अधिक बढ़ावा देने के लिए बाजार में…

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बसंत : डॉक्टर सरला

आयो बसंत मधुमाह सखी , सब ओर सुहानी ऋतु छाई । वृक्षों ने नवपत्र किए धारण, कलियां धीरे से मुस्काईं । गीत सुनाती कोकिल देखो, भौंरे  भी  राग   सुनाते  हैं । अम्बर खुश है देखो कितना , देख  धरा   मुस्काई   है । आयो बसंत मधुमाह सखी , सर्वत्र खुशी – सी छाई है । आम्रबौर …

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पर्यावरण सुरक्षित रहे यदि मानव मन लक्षित रहे

कविता मल्होत्रा (संरक्षक, स्थायी स्तंभकार) भला चारित्रिक गठन अनुवांशिक कहाँ होता है अनासक्त प्रेम जहाँ पर्यावरण सुरक्षित वहाँ होता है ✍️ विश्व का असीम और निःशुल्क पुस्तकालय मानव मन में ही विद्यमान है, जो हर किसी को अपने मन का अध्ययन करने में सहायक होता है। लेकिन इस पुस्तकालय तक पहुँचने का न तो कोई…

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वक्त इंसान को मजबूर कर देता है

वक्त इंसान को मजबूर कर देता है,‘लॉकडाउन’का पालन करबाता है.समय के सामने  हर  कोई बौना है,सबों को समय झुका कर रखता है. जग में किसी से डरिए या न डरिए,वक्त से हमेशा संभल कर ही रहिए.जीवन में सदा  शुभ कर्म करते हुए,समय का सदुपयोग करना सीखिए. वक्त को जिसने भी बर्बाद किया है,उसको वक्त भी…

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स्वतंत्रता दिवस का जश्न –  स्वतंत्र कौन ?

जनता या चोर (शासन-प्रशासन का विशेष ध्यानाकर्षण) आज के दिन यह शीर्षक पढ़कर थोड़ा अजीब अवश्य लगेगा किन्तु पत्रकार का धर्म है कि सत्य को सामने रखे। जी हाँ, दिल्ली की बात करें विशेषकर लाजवंती गार्डन, नई दिल्ली-110046 की जिसमें गली नम्बर 8 में 5 जून को दिन दहाड़े चोरी की घटना घटित होती है।…

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भव्य कल्चरल सोसाइटी द्वारा 11वें रंग महोत्सव को सफल आयोजन

पिछले दिनों दिसंबर हर शनिवार और हर रविवार 11वें रंग महोत्सव को सफल आयोजन नई दिल्ली के ओल्ड राजिंदर नगर के भव्य थिएटर स्टूडियो में किया गया। इस भव्य रंग महोत्सव में दर्शकों ने खूब आनंद लिया। इस भव्य रंग महोत्सव में 7 नाटकों का मंचन और एक करोके सिंगिंग प्रोग्राम का सफलतापूर्वक मंचन किया…

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बस कीजिये ! देशव्यापी व्यवस्था चलने दीजिये, धरनो से धारणा नहीं बदलेगी…!

सवर्णों से दूर हुई पार्टियों का ही अस्तित्व खत्म हुआ हैदेश का पॉलिटिकल लोकतंत्र दो संविधान चलवा रहा,एससी/एसटी एक्ट और यूजीसी रेगुलेशन देश विरोधी.! पहले गरीबों को उनका हक़ दीजिये तब जाति और आरक्षण की बात कीजिए पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी बड़ी ही विकराल स्थिति है एक सवाल का कुछ…

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“महाप्रलय मचाओ माँ”

बस बहुत हो चुका हलवा- पूरी कन्या पूजन भी बहुत हुआ अब नहीं सुरक्षित कहीं बेटियां सब कर रहे कर- बद्ध प्रार्थना  नवरात्रों में भोग लगाने अब घर- घर मत आओ माँ कितनी निर्भया और बलि चढ़ेंगी ? आज हमें बतलाओ  माँ मैया सीता तो  निष्कलंक थी क्यूंकि लंका में  रावण था जनक नंदिनी निष्कलंक…

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“मौसम खुशमिजाज है।”

बसंत यानि उल्लास। प्रेम और प्यार का आभास। ज़िन्दगी के लिए अति आवश्यक तत्व। गतिमान रहने के लिए एक आवश्यक बल। बसंत प्रतिवर्ष आता है। बीते वर्षों की कुछ यादें ताजा कर जाता है। फिर से मिठास भर जाता है। जीवन को महका जाता है। हर तरफ बिखरा हुआ रंग। रंग बिरंगे फूल खिले हुए।…

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राफेल की नींबू – मिर्ची

अपने देश के भीमकाय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह  जी ने  राफेल को छोटा सा नीबू क्या चढ़ाया  बाकी कांग्रेसियो को बड़ी सी मिर्ची लग गयी । अजीब बात है कुछ ना मिले तो नीबू मिर्ची को ही राष्ट्रीय मुद्दा बना दो और फिर अंधविश्वास – अंधविश्वास करके पूरे भारतीय संस्कृति का सत्यानाश कर दो । कब…

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