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बजट

बजट के माध्यम से बढेगी गरीबों,मजदूरों, किसानो और महिलाओ की शक्ति सभी क्षेत्रों में योजनाओं से होगी वृद्धि राष्ट्र की बढेगी आर्थिक समृद्धि । अमीरो की हाय-हाय गरीबों का सौभाग्य अतिरिक्त टैक्स चार प्रतिशत गरीबों के लिए लाएगा अनेक वित्तीय उपहार। टेक्स स्लैब में बदलाव नहीं पाँच लाख आमदनी वालो को टैक्स देने का अधिकार…

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लाॅकडाउन

            करीब चार महीने पहले ई रिक्शा पर कुछ सामान लादकर एक आदमी किराए का   एक कमरा खोज रहा था। उसके साथ उसकी पत्नी और दो बच्चे  भी थे जो बार बार रिक्शे से बाहर झांक रहे थे। शायद उनमें उस घर को देखने की उत्सुकता हो रही होगी जहां उनको रहना था। उन चारों…

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आदिवासी समाज की लोकप्रिय नेत्री है द्रौपदी मुर्मू , अगली राष्ट्रपति बनने की ओर अग्रसर !

राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को चुनाव होने है और देश की राजनीति में पहला नागरिक कौन इसपर घमासान मचा है ! ममता बनर्जी अपने  अहम में चूर वामपंथ विचारधारा के साथ विपक्ष को भड़का रही जबकि बीजेपी ने धोबी पछाड़ लगा कर ममता समेत पुरे विपक्ष की हवा निकाल दी ।  अगला राष्ट्रपति…

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धर्मो रक्षति रक्षितः बनाम अहिंसा परमो धर्म: ; इस विजयदशमी दोनों आमने – सामने

“नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।” लेख :- पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषणक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  यह  वर्ष खास है क्यूंकि दो अक्टूबर गाँधी जयंती और दशहरा दोनों एक साथ है। एक अहिंसा का प्रतीक है तो दूसरा धर्म के विजय अर्थात  हिंसा का। इस विजयादशमी पर संघ के 100 वर्ष पूर्ण…

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व्यंग्य : साहेब ! इतना लादीए, जामे कुटुंब समाए…!

पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी  यूजीसी पर मचे घमासान के बीच अब सोशल मिडिया पर लोग पूछ रहे कि आरक्षण की कोई सीमा है भी या जन्म जन्मांतर के लिए लागू हों चुका है  ? भारत के जिस जातिवाद पर सुप्रीमकोर्ट ने भी चिंता जताई है उसकी जड़ ही आरक्षण…

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आपका दिन

“मैं केक नहीं काटूँगी।” उसने यह शब्द कहे तो थे सहज अंदाज में, लेकिन सुनते ही पूरे घर में झिलमिलाती रोशनी ज्यों गतिहीन सी हो गयी। उसका अठारहवाँ जन्मदिन मना रहे परिवारजनों, दोस्तों, आस-पड़ौसियों और नाते-रिश्तेदारों की आँखें अंगदी पैर की तरह ताज्जुब से उसके चेहरे पर स्थित हो गयीं थी। वह सहज स्वर में…

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रहे इस रूह की चूनर धानी

मौसम ने करवट ली और शीत ऋतु ने आगमन की सूचना दी है।लेकिन भानु काका के तेवर अब भी तीखे हैं।ग्लोबल वार्मिंग की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय मानव जाति अब भी बदन उघाड़ू परिधानों के फ़ेवर में है।समस्या के मूल में न जाकर सतही समाधान खोजना और लापरवाही से संतुष्ट हो जाना ये असँवेदनशील पीढ़ी…

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सुरक्षित समाज और कार्यस्थल

पुरुषों की सारथी भूमिका ​एक प्रगतिशील समाज की पहचान इस बात से नहीं होती कि वहाँ कितनी ऊँची इमारतें हैं,बल्कि इस बात से होती है कि वहाँ महिलाएँ कितनी सुरक्षित और सम्मानित महसूस करती हैं। घर की चारदीवारी से लेकर दफ्तर के केबिन तक,महिलाओं ने अपनी योग्यता को साबित किया है। लेकिन इस सफर को…

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दिल के ज़ख़्म…..

ज़ख़्म अल्फ़ाज़ों के थेदवा करते भी कैसेख्वाबो आंखों ने देखे थेमुक़्क़मल होते भी कैसे सब ख़त्म हो रहा थामेरी आँखों के सामनेतदबीर कुछ होती तोफ़ना होते भी कैसे फ़ासले न होते तोज़ुदा होते भी कैसेमल्लिका ए दिल थीदग़ा देते भी कैसे तड़प दिल कीअब रुकती नही हैबिते हुये पलों कीकहानी बनेगी कैसे…. आरिफ़ असासदिल्ली

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नेहरू जयंती विशेष – आधुनिक भारत के सक्रिय राजनेता !

            जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को ब्रिटिश शासन काल के भारत में इलाहाबाद बदला हुआ नाम प्रयागराज  में हुआ था । जवाहर के पिता मोतीलाल नेहरू एक धनी बैरिस्टर जो कश्मीरी पण्डित थे। मोती लाल नेहरू सारस्वत कौल ब्राह्मण समुदाय से थे,  उनकी माता का नाम  स्वरूपरानी थुस्सू था, जो लाहौर में…

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