दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: एक संक्षिप्त विश्लेषण
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025, दिल्ली की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि यह चुनाव राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों का मिलाजुला रूप होगा। दिल्ली की कुल 70 विधानसभा सीटों में चुनाव होंगे, और यह दिल्ली की भविष्य की दिशा तय करेंगे। पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, लेकिन इस…
बनें रब का सेवादार
कविता मल्होत्रा (संरक्षक, स्तंभकार) “माता-पिता केवल शब्द नहीं ये जीवन का हैं सार ईश्वरीय श्रवण कुमार वही जो सृष्टि का सेवादार” शिक्षा के क्षेत्र में अनेक प्रकार की संभावनाएँ होती हैं जो किसी भी व्यक्ति के अस्तित्व को तराश कर एक सुघड़ आकार देतीं हैं।हर व्यक्ति की पसंद अलग होती है।अपनी पसंद के अनुसार हर…
ना दिख मजबूर
रूह की गर्त पर एक नकाब लपेटे हूँ। टूटे सपनो में अब भी आश समेटे हूँ।। दुखों की कड़कड़ाती धूप बहुत है। खुशी की सर्द हवा की उम्मीद समेटे हूँ।। क्यूँ हुआ तू किनारे , सोचता है क्यूँ भला। देख पीपल के नीचे रखे भगवान का नजारा, टूट जाये अगर भगवान की मूरत का कोना,…
खुशी-एक सामूहिक जिम्मेदारी
“असफलता” जैसी कोई चीज़ नहीं होती। सदियों से बुद्धिमान लोग यही कहते आए हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने स्पष्ट रूप से कहा था, “…असफलता का अर्थ है “सीखने का पहला प्रयास”। कलाम जी की इस परिभाषा को मुझसे बेहतर शायद कोई और व्यक्ति नहीं अपना सकता। 21वीं सदी की शुरुआत में अपने गृह…
मैयत के मेरे फूल खिल उठे
मैयत के मेरे फूल खिल उठे हैं अब थोड़ा पहले आते आधा जल चुके हैं अब तुमने कहा था कि जा रहे हो अपने रास्ते तो हम भी अपने रास्ते निकल चुके हैं अब कई लम्हे पत्थरो से बात करता रहा मगर कई पत्थर पिघल चुके हैं अब आज फिर मेरी उनसे बात हुई लगा…
सोच बदलनी होगी।
गीता—अध्याय3 श्लोक5 न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठतिकर्मकृत। कार्यते ह्यवशःकर्मसर्वःप्रकृतिजैर्गुणैः।। श्लोक का दूसरा पद द्रष्टव्य है जिसमें इंगित है कि सारा मनुष्य समुदाय प्रकृतिजनित गुणों द्वारा परवश हुआ कर्म करने को बाध्य किया जाता है।इसी सन्दर्भ में एक अन्य श्लोक है– नियतं कुरु कर्म त्वम कर्म ज्यायो ह्यकर्मनः। शरीर यात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः।।–श्लोक-8 –तू…
क्लिक के दलदल में फँसा समाज: गालियों से ग्रोथ, शोर से शोहरत
(जहाँ सच सन्नाटा है, तमाशा उत्सव है — क्लिक की संस्कृति में खोता हुआ समाज और डिजिटल मंच पर किनारे पड़ा विवेक) डॉ. सत्यवान सौरभ डिजिटल दुनिया कभी ज्ञान, संवाद और रचनात्मकता की प्रयोगशाला मानी जाती थी। यह विश्वास था कि इंटरनेट लोकतंत्र को मज़बूत करेगा, हाशिये पर खड़े लोगों को आवाज़ देगा और असली…
काले कोट, काले नोट और काले चश्मे वालों का काला षड्यंत्र
पंकज सीबी मिश्रा / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी इंसान को जस्टिस शेखर यादव की तरह स्पष्टवादी होना चाहिए वरना तो कई लोग केवल चुनावी टिकट के लिए काला कोट पहन आतंकियों को आधी रेत बेल दिलवाने के लिए जद्दोजहद करते है और अब जजों को महाभियोग की धमकी दें रहे। खैर जस्टिस शेखर…
दिल्ली-राष्ट्रवाद की नई प्रयोगशाला दिल्ली चुनाव भाग 1
कुछ दिनों में देश की राजधानी दिल्ली में चुनाव होने वाले हैं | जैसे जैसे वक़्त क़रीब आता जा रहा है, यहाँ की फिजाओं में राजनीति की महक फैलती जा रही है | पर दिल्ली का चुनाव किसी के लिये भी आसान नहीं है, न तो 5 साल अच्छा सरकार चलाने का दावा करने वाली…
