आँसू जो तेज़ाब बन गये
प्रवासी नहीं,ये भारतवासी हैं,सैंकड़ों हजारों किलोमीटर दूर पैदल चलने को मजबूर हैं,इन्हीं को आप राष्ट्र निर्माता कहते हैं,भाग्य विधाता कहते हैं,यही तो आपके मतदाता हैं, जिन्होंने आप को सत्ता तक पहुंचाया है, यही हैं वो,जिनके बारे में संविधान की प्रस्तावना में लिखा है-“हम भारत के लोग”जिन गाँवो को ये लोग लौट रहे हैं, वे सालों…
