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आत्मविश्वास : -अजय कुमार पाण्डेय

हैदराबाद की प्रतिष्ठित टेक कंपनी की सुबह हमेशा की तरह व्यस्त थी। सभी लैपटॉप, ई-मेल, ऑनलाइन मीटिंग और समय-सीमाओं के भीतर अपने लक्ष्य की दौड़ में व्यस्त थे।
कंपनी की चकाचौंध में साधारण कपड़े पहने घबराया हुआ चेहरा और आँखों में कहीं नौकरी से न निकाल दिए जाने की आशंका लिए रवींद्रन हड़बड़ी में कई गड़बड़ियाँ कर चुका था। यह उसकी नौकरी का पहला ही दिन था। अभी उसमें पर्याप्त आत्मविश्वास भी नहीं आ पाया था। उसे पहली ही नौकरी हाथ से निकल जाने का डर बना रहता था।
दोपहर तक उसने छोटी-मोटी कई गलतियाँ कर डाली थीं। किसी की फाइल गलत डेस्क पर रख दी, किसी की कॉफी ठंडी हो गई, एक मीटिंग रूम का प्रोजेक्टर समय पर चालू नहीं कर पाया।
उसके वरिष्ठ अधिकारी गुणशेखरन भड़क उठे-
“इतना भी नहीं आता है? पता नहीं तुम्हें नौकरी पर किसने रख लिया है।”
कमरे में बैठे लोग चुप रहे। कुछ मुस्करा दिए। रवींद्रन की आँखें भर आईं, पर उसने सफाई देने की कोशिश भी नहीं की। वह चुपचाप सिर झुकाए खड़ा रहा।
उसी समय कंपनी की सीईओ, रजनी माहेश्वरी वहाँ आ पहुँचीं। रजनी एक अनुशासित सीईओ थीं। उन्होंने पूरा दृश्य देखा, पर किसी को टोका नहीं।
उन्होंने केवल इतना कहा-
“रवींद्रन, मेरे साथ आओ।”
सबको लगा, अब उसकी नौकरी गई। कुछ को रवींद्रन से सहानुभूति हुई कुछ को लगा अच्छा हुआ, कोई भी काम ठीक से नहीं कर सकता है, इसकी जगह किसी दूसरे को आना चाहिए। लेकिन रजनी उसे अपने केबिन में ले गईं। मेज़ पर रखी पानी की बोतल उसकी ओर बढ़ाते हुए उन्होंने पूछा-
“पहली नौकरी है?” रवींद्रन ने सिर हिला दिया।
“डर लग रहा है?”
उसने पहली बार आँख उठाकर देखा। फिर धीमे से बोला, “जी…।” रजनी मुस्कराईं।
“जानते हो, मेरी पहली नौकरी के पहले दिन मैंने एक विदेशी क्लाइंट के सामने पूरी प्रस्तुति गलत स्क्रीन पर चला दी थी। मीटिंग खत्म होने के बाद मेरे बॉस ने सबके सामने कुछ नहीं कहा। उन्होंने केवल इतना कहा था—गलती नहीं, गलती के बाद इंसान का आत्मविश्वास टूटना सबसे बड़ा नुकसान होता है।” रवींद्रन की आँखों में आश्चर्य था। वह अपलक रजनी को देखे जा रहा था।
“गलती होने के डर से काम करोगे तो गलती अवश्य होगी। पूरे आत्मविश्वास से काम करो, गलती की सम्भावनाएँ भी कम हो जाएंगी।” रवींद्रन ने कुछ न कहा, बस सिर हिला दिया। रजनी ने आगे कहा –
“तुमने इतनी बड़ी कंपनी को ज्वॉइन किया है। तुम्हें तो गर्व होना चाहिए। स्वयं को कम मत आँको। यह कंपनी तुम्हारा दूसरा परिवार और यहाँ के लोग परिवार के सदस्य जैसे हैं।” रवींद्रन धीरे धीरे सहज होने लगा था। उसके मन में रजनी के प्रति श्रद्धा जाग उठी। रजनी ने कहना जारी रखा –
“गलती किसी कर्मचारी की अयोग्यता का प्रमाण नहीं होता है, उसकी अयोग्यता तो उस गलती से सबक न लेकर वहीं अटके रह जाने में है अतः पुरानी ग़लतियाँ भूल कर नये सिरे से पूरे आत्मविश्वास के साथ नई जिम्मेदारियाँ उठाना आवश्यक होता है।”
रजनी माहेश्वरी की बातों का असर अगले दिन से ही रवींद्रन पर दिखाई देने लगा था। उसका पहनावा साधारण अवश्य था किन्तु था बड़ा सलीकेदार। अब उसके कार्य करने का तरीका एकदम बदल चुका था। गलतियाँ होने पर वह बड़ी विनम्रता से क्षमा माँग कर उसे सुधारने का प्रयास करता और आगे बढ़ जाता था। उसके व्यवहार और कार्यशैली ने शीघ्र ही सब के मन में अपनी जगह बना ली। उसका आत्मविश्वास स्पष्ट दिखाई देने लगा था।

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