फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ: नौकरशाही, सत्ता और संवेदनहीनता
जब शासन सेवा से अधिक अहंकार बन जाए — फ़ाइलों के बीच मरती संवेदनाएँ, सत्ता का चेहरा संवेदना का शून्य बनकर, लोकतंत्र को मशीन बना देता है जहाँ नियम ज़्यादा हैं और रिश्ते कम। – डॉ. सत्यवान सौरभ हमारे समय की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं है कि समाज अन्याय से भर गया है, बल्कि…
