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संसद की सुरक्षा व्यवस्था सरकार की नहीं, मेरी जिम्मेदारी है : लोकसभा स्पीकर

लोकसभा की सुरक्षा में बुधवार को हुई चूक के मामले में गुरुवार को भी लोक सभा में जमकर हंगामा हुआ। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने सरकार के जवाब और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष सरकार की तरफ से जवाब की मांग करते हुए गृह मंत्री अमित…

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अब नहीं रही

घुमंतु परिवार में भीख के रोजगार में, वह चलने से लाचार टांगें  अब नहीं रहीं। रीते घड़े की पहेलियां दाना खोजती उंगलियां,  वह पेट की पीड़ाएं अब नहीं रहीं। दिन में लकड़ी बीनना रात के लिए सहेजना,  वो आग तापती रातें  अब नहीं रहीं। कलुआ कई दिनों से आया नहीं शहर से,  वो बेटे को…

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10 दिसंबर मानव अधिकारों के जागरुकता का दिन

विश्व मानव अधिकार दिवस पर विशेष- लाल बिहारी लाल (वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार) नई दिल्ली। आज मानव के अधिकारों के संरक्षण का संवैधानिक दर्जा पूरी दुनिया में प्राप्त है। मानव अधिकारों से अभिप्राय ”मौलिक अधिकारों एवं स्वतंत्रत से है जिसके सभी मानव प्राणी समान रुप से हकदार है। जिसमें स्वतंत्रता, समाजिक ,आर्थिक औऱ राजनैतिक रूप…

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टनल में फंसे मजदूरों को जातिवाद का फायदा क्यों नहीं मिला  …!

उत्तरकाशी  टनल में फंसे मजदूरों के जगह अगर यहीं 41 वीआईपी लोग एलीट क्लास  अथवा पिछड़े और दलित नेता टाईप के होते और वे ऐसे ही कहीं फंस जाते तो सदन के दलित नेता और मीडिया क्या करता ? पूरा देश सर पर उठा लेता।  बोलने का मतलब है सरकार से सवाल करना  मीडिया ने…

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बढ़ते हुए तलाक कर रहे सामाजिक ताने-बाने ख़ाक

पश्चिमी मीडिया और वैश्वीकरण के प्रभाव ने भारतीय समाज की प्रेम और रिश्तों की धारणा को प्रभावित किया है। युवा पीढ़ी पारंपरिक पारिवारिक अपेक्षाओं की तुलना में व्यक्तिगत खुशी और अनुकूलता को प्राथमिकता देने लगी है, जिसके कारण जब उनकी शादी में संतुष्टि नहीं मिलती है तो वे तलाक को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप…

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फिरी की घोषणायें ही बन चुकी हैं आधार

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव टनल में फंसे हैं मजदूर जिनको पन्द्रह दिनों की कवायद के बाद भी नहीं निकाला जा सका । हो सकता है कि जब तक यह आलेख छपे तब तक वे निकल जायें । ईष्वर ऐसा ही करे । पर टनल में मजदूरों के फंसने और एक लम्बी कवायद ने यह तो समझा ही…

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आप और मैं

काश! आप पॉजिटिव एनर्जी से ड्राइव होते। तो आप आप न होते। मैं मैं न होती। शायद आज आप और मैं हम होते। काश! आप न्यूट्रल  होते। तो आप आप न होते। मैं मैं न होती । शायद आज हम हमराज होते। काश! आप  अपनों की करतूतों पर पर्दा न डालते। बल्कि मेरी ढाल बनते…

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आज दिल जीते हैं, कल फिर कप जीतेंगे।

जन्म मरण के चक्र-सी है, हार जीत लग रही। लड़े-भिड़े शौर्य से, आज नही तो कल सही।। कप जितने से बड़ी बात दिल जीतना होता है। क्रिकेट खत्म नही हो गया। 46 दिन में 45 दिन आप जीते हो। हमारी भारतीय टीम ने 2023 वर्ल्ड कप के अंदर 10 मैच जीते और आज फाइनल हारने…

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सावधानी बरतें रहें सुरक्षित, एड्स से- लाल बिहारी लाल

विश्व एड्स दिवस ( 1 दिसंम्बर) पर विशेष एड्स का जागरुकता ही बचाव है – लाल बिहारी लाल Or सावधानी बरतें रहें सुरक्षित एड्स से- लाल बिहारी लाल ++++++++++++++++++++++++++++++++++लगातार थकान,रात को पसीना आना,लगातार डायरिया,जीभ/मुँह पर सफेद धब्बे,,सूखी खांसी,लगातार बुखार रहना आदि पर एड्स की संभावना हो सकती हैं।इस वर्ष 2023 का थीम है- “लेट कम्युनिटी…

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वर्तमान का क्षण : ललित पारिमू

मनुष्य अगर अपने दैनन्दिन कार्यों पर एक पैनी नज़र दौड़ाए तो वो इस निष्कर्ष पर पोहोंच सकता है कि  वो अपने दिन का अधिकतम समय भविष्य और भूत काल में ही बिताता है। वर्तमान क्षण से उसका सम्बन्ध कम ही बना रहता है । और जो दिन भर में उसे थोड़ा सा सुख और आनंद…

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