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नारी

धरती पर अनमोल रत्न और खुशियो का संसार है नारीघर की बढ़ती जिससे रोनक , ऐसा अदभुत श्रंगार है नारी। लहराती फूलों की बगिया और चन्दन सी शीतल है नारीदिखाती है जो सबको रास्ते,ऐसी अदभुत रोशनी है नारी। सह लेती हर कष्ट को हंसकर,सहनशक्ति की देवी है नारीढक लेती हर दुःख की धूप,ऐसी सुख की…

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चीन को जवाब

गिरगिट सा रंग बदलने लगा है कोई, हाथ मिला कर मुकर जाता है कोई दोस्ती मे हमारी नहीं है ऐसी फितरत हर बार दोस्ती मे गद्दारी करता है कोई ये मत सोच लेना की कोरोना वायरस बनाकर तुमने दुनियाँ मे धाक जमाई है ! अभी तक तुमको मिला नहीं बाप कोई अभी तो तुम्हारी वो…

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संकीर्ण सोच से सजी व्यवस्था में

डॉक्टर सुधीर सिंह संकीर्ण सोच  से  सजी व्यवस्था में, इंसान से ज्यादा शैतान  ही है यहां। कुछ व्यक्ति कहे  तो कोई बात नहीं, यह तो यहां के समूह  का है कहना। प्रश्न की गंभीरता ने जोर देकर कहा, जरा  इस सच्चाई का पता तो लगा। गौर से देखा तब  घर-घर काआंगन, लग गया कुछ तो …

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दीपावली

            ” माँ आज भी ज्यादा दीये नही बिके ।”ठेले को किनारे लगाते हुए अशोक उदास होकर बोला ।     माँ ने उसे सांत्वना देते हुए कहा,” अरे कल बिक जायेंगे,क्यों परेशान हो रहा है ? देख मेरे भी दीये ज्यादा नहीं बिके हैं।”माँ बेटे को समझा तो रही थी पर मन ही मन बुरे…

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कर ऊर्ध्व चेतना जाग्रत मन

ब्रह्माण्ड रूपिणी  भाव और चेतना स्वरूपिणी असुरत्व नाशिणी है अनादिकाल से संकल्पित तू दानव प्रकृति को मुक्ति दे देवत्व भाव से अग जग भर मन को प्रकाश ते भर दे माँ। था घनान्धकार था रुका काल गति बाधित थी सरिताएँ नही प्रवाहित थी संचरित नही वायु थी कहीं जीवत्व नहीं पोषित था कहीं अंधकार नष्ट…

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“कलयुगी राम”

जलाया जाता है हर वर्ष, पुतला रावण का। मगर क्या रावण जलता है? नहीं, हम भूल करते हैं। आज रावण नहीं, राम मरते हैं। रावण तो सर्वव्यापी हो गया है। भ्रष्टाचार, लूटपाट, डकैती और बलात्कार, क्या ये रावण के नाती नहीं हैं ? याद रखो, रावण कभी नहीं मरता है। हंसी बनाता है हमारी, कागज़…

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तुझसे इश्क इजहार करेंगे

मिलन प्रिये जब तुमसे होगा, दिल की हम तुम बात करेंगे। नयनों से हम नयन मिलाकर, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। इक दूजे का हाथ थाम हम, अपनी दिल की बात करेंगे। अपने दिलों के तरंग मिला, तुझसे इश्क इजहार करेंगे।। बाहों  में  बाहें  डाले  हम, प्रेम मिलन की बात करेंगे। इक  दूजे  को ले  बाहों …

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प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम

डॉक्टर विधु भूषण त्रिवेदी जी ने अपने हृदय से अशीष अमृत वर्षा द्वारा ‘हृदयागंन भजन संध्या’ सजाकर हृदयांगन परिवार के मन का कौना कौना पावन किया प्रोफेसर डॉ श्रीमति अलका अरोड़ा जी ने अपने सुदृढ संचालन द्वारा सजाई हृदयांगन की भजन-कीर्तन शाम देशभर के विभिन्न आईआईटी संस्थानों में दाखिले लेने के सन्दर्भ में आयोजित की…

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कंजके (कन्या भोज)पर कविता

चलों चलों आज फिर से गुलजार करतें हैं बचपनवो छोले पूड़ी हलवेकी महक ताजाकर कंजक(कन्या) बनगुल्लक भरते हैं फिरपुरानी यादों से …हर पर्व अपनी महक और स्वाद लिए आता है,रह रह कर बचपन की याद दिलाता है,क्या वो दिन थे औरक्या थे जलवे,आहा! वो छोले,पूड़ी और हलवे!चलों आज फिर सेगुलजार करतें हैं बचपनमाँ अंबा की…

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तोता मैना

कहता तोता सुन री मैना मान ले अब तो मेरा कहना मैं लाता हूं दाना पानी तुम घर पर ही रहना। नन्हे-मुन्ने लाल हमारे काला कौवा घात लगाए पंख फैलाकर उन्हें छुपाना चाहे भूख प्यास सब तजना। मानव अब हैवान बना है चारों और धुआं घना है बालक वृद्ध और नारी को पड़ता है सब…

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