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मैं “कंगना ” हूं सुन लो लोगों,

(सुनीता जायसवाल फैजाबाद उत्तर प्रदेश) अबला समझने की भूल ना करनाआऊंगी कलाई में “हथकड़ी” बनकरजेवर समझने की भूल ना करना! झुक गई हूं मैं जरा सा क्योंकि,मैं अदब की परवरिश हूँमेरी झुकी पीठ को तुम ,पायदान समझने की भूल ना करना! गिरेबान खाली नहीं तुम्हारा ,दुनिया भर की करतूतों से ,मेरे पाक दामन पर तुम,उंगली…

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हिन्दी दिवस एक दिन पर हिन्दी की बात हर दिन

हिन्दी भारत की मातृभाषा हैं।यह सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषाओ में से एक हैं।एक ऐसी भाषा जिसे हम जैसे लिखते हैं वैसे ही बोलते भी हैं।हिन्दी शब्द का वास्तविक अर्थ “सिन्धु नदी की भूमि” हैं।1918 ईस्वी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु अपने विचार रखे…

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स्त्री विमर्श और महिलायें

स्त्री विमर्श एक ऐसा मुद्दा है जो आज हिंदी साहित्य में अपनी एक अलग अहमियत रखने के साथ साथ सामाजिक स्थितियों और मान्यताओं को भी बखूबी प्रभावित कर रहा है। आज स्त्री और  पुरुष दोनों ही साहित्यकारों द्वारा स्त्री विमर्श को उकेरने वाले इनके लेख या इनकी कहानियां समाज में विचारों के मंथन के लिए…

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हमारी शान है हिंदी (गीत)

हमारी शान है हिंदी हमारा मान है हिंदी मेरी नज़रों से देखो तो हमारी जान है हिंदी विधाता ने दिया अद्भुत हमें वरदान है हिंदी हिंदी है तो हिन्दुस्तान हिंदुस्तान है हिंदी। सुनो माँ भारती का धानी परिधान है हिंदी जिसे माना ज़माने ने अटल वो ज्ञान है हिंदी वीरों की शहादत का मान सम्मान…

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देश के विकास इंजन को पुनर्जीवित करने के लिए नए अवसर पैदा करने होंगे

(वर्तमान स्थिति निवेश को बढ़ावा देने, मौजूदा नौकरियों की रक्षा करने और नई नौकरियां पैदा करने के लिए साहसिक कदम उठाने का अवसर प्रस्तुत करती है।) — डॉo सत्यवान सौरभ, रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट, कोविद-19 महामारी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदल दिया है और…

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बेटी दोहरा रही है

माँ अपनी आँखों से काजल उतार कर मेरे माथे पर टिका लगाती| मेरे होंठों पर लगे दूध को अपने आँचल से पोछती होठों से प्यार की चुम्बन देती माथे पर शुभ आशीष की तरह | फिर भी माँ के मन मे नजर ना लग जाए कहीं भय समय रहता | भले ही माँ भूखी हो…

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मनहरण घनाक्षरी

जल का जो मीठा कूप ,अपने ही पास है तो दूजे के ही कूप से जी ,जल मत पीजिए ! देकर राजभाषा का,दर्जा जो हिंदी को बस नाम मात्र का सम्मान , आप मत कीजिए! जननी  हमारी है ये,कई भाषाओं की प्यारी गर्व से इसे जो आप , हाथों-हाथ लीजिए! छोड़िए जी आप अब ,मतभेद…

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हिन्दी की व्यथा

ये अंधेरा क्यों है? आज तो बत्ती जला दो, वैसे तो कोई आता नहीं मेरे घर, शायद आज कोई भूले भटके आ जाये  आज “हिन्दी दिवस  है न किसी न किसी को तो मेरी याद आ ही जायेगी। सूना रहता है मेरा आंगन, मेहमान क्या…कोई कौवा भी                                                 मेरी मुंडेर पर नहीं बैठता है। क्या मैं…

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वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर तार्किक है

नवीन चौबे (गाडरवारा) भारतीय भाषाओं की वर्णमाला विज्ञान से भरी है। वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर तार्किक है और सटीक गणना के साथ क्रमिक रूप से रखा गया है। इस तरह का वैज्ञानिक दृष्टिकोण अन्य विदेशी भाषाओं की वर्णमाला में शामिल नहीं है। जैसे देखे*  क ख ग घ ड़ – पांच के इस समूह को…

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हिंदी की दिव्य-ज्योति से हिंद जगमगाता कहे

डॉक्टर सुधीर सिंह पंजाब से पूर्वांचल,कश्मीर से कन्याकुमारी,विचार-विनिमय का  सरल माध्यम है हिंदी.राष्ट्रभाषा हिंदी  यहां जन-जन की भाषा है,राष्ट्रीयअस्मिता का अनुपम आँचल है हिंदी. हम हमेशा आर्यभाषा हिंदी का सम्मान करें,उसके प्रचार-प्रसार हेतु हम सभी सजग रहें.जनभाषा हिंदी  के संरक्षण,संवर्धन के लिये;130करोड़ हिंदुस्तानी एकजुट रह शपथ लें. बचपन से सभी बच्चों को हिंदी से लगाव…

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