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हरियाणा सरकार के बाबा बंदा सिंह बहादुर की स्मृति में स्मारक निर्माण की दिशा में बढ़ते कदम

मृत्यु एक अटल सत्य है, लेकिन ऐसे कम ही होते हैं जो शोषितों के अधिकारों और न्याय के लिए संघर्षपूर्ण जीवन जीते हुए किसी भी बलिदान के लिए तैयार हो जाते हैं। ऐसे ही एक योद्धा लक्ष्मण दास/माधोदास (बाबा बंदा सिंह बहादुर) का जन्म 27 अक्टूबर 1670 को राजौरी (जम्मू-कश्मीर) में राम देव के घर…

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परिवार

ढूँढ़ रही इस जगत में फिर     खुशहाली से भरा परिवार।     जिसमें थी बसती एकता     नेह अरु प्रेम गले का हार।     दादा-दादी औ चाचा-चाची     ताऊ ताई बुआ हर कोई।     चहल-पहल से घर जो गूँजे     सारी ही वो पलटन खोई।     सिमट गया दो जन में घर     रहता था…

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गंतव्य संस्थान ने मनाया विश्व पर्यावरण दिवस और किया प्रतियोगिता में विजेता और शिक्षकों को सम्मानित

गर्मियों की छुट्टियों में कई सामाजिक एवं रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी बच्चों के लिए समर कैंप का आयोजन कर रहे हैं ।आज 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया सभी संगठनों के अध्यक्ष/महासचिव , स्वयंसेवक शिक्षक व बच्चों ने इसमें भाग लिया ।कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्मगुरु पंडित चन्द्रवल्लभ बुडाकोटी जी ने की व अतिथियों के…

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गण और तंत्र की बढ़ती दूरी

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव सर्वजन हिताय, सर्वजन रक्षाय और सर्वजन सुखाय की भावना से निहित एक सार्वभौमिक संविधान की छाया के तले बहुभाषी, बहुजातीय, बहुधर्मावलंबियों का समूह स्वच्छन्दता और निर्भीकता के साथ जीवनयापन कर रहा हो वह गणतंत्र अपनी माधुर्य मुस्कान के साथ अपना 73 वां दिवस मनाने जा रहा है । स्तुत्य तो होगा ही ।…

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दिल्ली के नगरनिगम की नूराकुश्ती 

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव दिल्ली की नगर निगम का दंगल सभी की निगाहों से होकर गुजरा ‘‘ओह अच्छा ! तो हमें पार्षद बनकर ऐसे दंगल करना पड़ता है’’ । वैसे तो अब उम्मीद नहीं हैं कि किसी को ज्यादा आश्चर्य हुआ होगा, क्योंकि पिछले कुछ दशकों संे हम ऐसा होता हुआ विधानसभा से लेकर कुछ-कुछ संसद में…

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बैसाख़ पर गुलज़ार हो हर हृदय में प्रेम की शाख़

कविता मल्होत्रा (स्थायी स्तंभकार, संरक्षक) प्रेम के पल्लवों से गुलज़ार हो जाए हर शाख़ नवचेतना हर रूह में उतरे तो घटित हो बैसाख़ वक्त की रफ़्तार और प्रकृति के प्रहार धीमे धीमे अपने विभिन्न रंगों से समूचे विश्व को रंग रहे हैं।वैश्विक स्वास्थ्य केवल दैहिक उपकरणों की देख-भाल का परिमाण नहीं है, बल्कि वैश्विक मानसिकता…

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हर बाधा को स्वीकार करें

हर बाधा को स्वीकार करें। लड़ कर भी उसे पार करें।।       हर बाधा को स्वीकार करें…। यूँ ज़िन्दगी कहाँ आसान निकलती हैं। कहीं शोर तो कहीं शांत ही चलती हैं।।      हर बाधा को स्वीकार करें…। संघर्ष को पार करके जो चलते हैं। फ़िर वो ही नर फलते औऱ फूलते हैं।।      हर बाधा…

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राम से बड़ा राम का नाम : लता गोयल

राम हिंदू संस्कृति का प्रतीकात्मक शब्द है। राम शब्द के उद्बोधन में ईश्वरत्व का आभास होता है। राम शब्द हमें उस अलौकिक शक्ति का एहसास कराता है जो इस पूरे ब्रह्मांड का रचयिता है, जिस शक्ति के आगे बड़े से बड़े ऋषि और बड़े से बड़े वैज्ञानिक भी नतमस्तक होते हैं। फिर प्रश्न यह है…

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नए साल की नई सुबह : राजनीतिक सफरनामान

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव नए कैलेण्डर के नए वर्ष के सुनहरे पन्ने पर दर्ज नए साल के भावो को अंगीकार कर सूरज की शीतल रष्मियों से आल्हादित आंगन की भोर में नया भले ही कुछ भी न हो पर मन में नएपन का उत्साह अवश्य होता है । चिड़ियों की सहक तो पुरानी ही है पर…

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तन

मत कर तन का घमंडये तन तो नश्वर हैहंसखेल कर पूरी करले जीवन यात्राइस तन को एक दिन मिट्टी में मिल जाना है | मत भटक दर-दरमिलना और बिछुड़नासृष्टि का यही नियम है | आत्मा सुखमय तो सारा जग सुखमयसुख-दु:ख दिन रात का खेलसुख बाहर नहीं,छिपा बैठा है स्वयं के ही भीतर | इच्छाओं को…

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