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शिव समान मोहि प्रिय नही दूजा !

श्रावण माह कैलाशपति भगवान नीलकंठ के कृपा का माह माना जाता है । सड़को पर रंग बिरंगे कावड़ो से सजे कावड़ियों की यात्रा अनायास ही भक्ति भाव से ओत प्रोत कर देती है । आजकल सड़को पर नमाज और हनुमान चालीसा का मुद्दा जोर पकड़ रहा । भक्ति और श्रद्धा केवल सहज शुद्ध हृदय से…

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अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद

.डॉक्टर मनोज कुमार (23 जुलाई, 1906 से 27 फरवरी, 1931) प्रारंभिक जीवन :-             चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के बदर गाँव में हुआ था। उनके पिता पंडित सीताराम तिवारी और माता श्रीमती जगरानी थीं। पंडित सीताराम तिवारी तत्कालीन अलीराजपुर की रियासत में सेवारत थे (वर्तमान में…

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उथल पुथल,

 हम अक्सर कहते हैं… इस दुनिया में इतनी उथल पुथल क्यों है कोई किसी की नहीं सुनता हर कोई अपनी राह चलता है…. कोई सामंजस्य नहीं है.. ज़रा सोचो.. हमारा शरीर भी तो हमारी दुनिया है.. क्या इसमें उथल पुथल नहीं होती हर अव्यय अपनी चाल चलता है.. मन कुछ कहता है , दिल कुछ…

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पश्चाताप

मंजू लता (राजस्थान) आज रामदीन  बहुत ही उदास बैठा था ।आज फिर उसके बेटे रमेश ने लड़ाई की।उसे घर छोड़ने को कह दिया। यह रोज की बात हो गई थी। वह बैठे-बैठे पुरानी यादों में खो गया । जब चार बेटियों के बाद बेटा रमेश हुआ था । दोनों पति पत्नी बहुत ही खुश हुए…

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कालजयी रचनाकार बंकिमचन्द्र चटर्जी-राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के प्रणेता

*(26 जून जन्मदिवस के बहाने)* पहले कलकत्ता में कवियों कलाकारों का भी अपना एक दौर था, जो अपने इस समाज में निस्संदेह सबसे ऊपर और लोकवरेण्य माना जाता था। कलकत्ता का बंगाली समाज आज भी अपने मुकुट के रूप में इसी वर्ग को धारण करता है। बंगाल के लोग अपनी अस्मिता की पहचान आधारभूत तौर…

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नारी (कविता-6)

विश्व की शान है नारी विश्व की …………. हर घर की पहचान है  नारी नारी है तो मान है नारी है तो सम मान है क्यों भूल जाते हो नारी ही नर की खान है नारी है हर सफलता है नारी है तो ममता है नारी से ही समता है नारी नहीं विफलता है ।…

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काफल (एक सत्य कथा )

(ये बात एक सच्ची घटना पर आधरित एक सच्चा लेख है़ ! जिसको की मैने जब सुना तो इस घटना को लिखे बिना नहीं रह पाया ! वेसे तो यहाँ कई घटनाए कहानियो का रूप ले चुकी है़ ! मानकों द्वारा ये भी नहीं की कभी इस घटना को मुद्रित नहीं किया गया होगा !…

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चूनर

धानी सी चूनर पहन धरा इतराये सुंदरता पर अपने। चहुँदिशि ही शोभा है बढ़ी पूरित हों  ज्यों सारे सपने। लहराती सी हैं नदियाँ डोलें मन चंचल है खिला-खिला। जंगल वन सब मुदित लगें जीवन का मानों मंत्र मिला। चहुँदिशि ही शोभा है बढ़ी पूरित हों  ज्यों सारे सपने। नद नदियाँ सब सूख रहे थे जीव…

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लिख जाएँ एक इतिहास नया

(श्रीमती कविता मल्होत्रा ) लॉकडाऊन की अवधि के दौरान तमाम लोगों की सोच के अनुसार कई तरह के सँदेशों का आदान-प्रदान दिखा। अधिकतर लोगों के बीच चर्चा का एक ही विषय था कि कोरोना वायरस मानव-निर्मित है या प्राकृतिक आपदा। इस प्रश्न के उत्तर में स्थित सबकी अपनी अलग सोच दिखी। ज़्यादातर लोग, जो केवल…

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हीमा

तुम द्युति गति अनन्त सीमा हो श्वासों का ऊर्जित प्रवाह ऊषा प्रस्फुट हीमा हो! °°°°°°°° तुम गति लय भारत की तुम उत्तंग शिखर पताका तुम गौरवपथधावक विजयी तुम अग्निशिखा शलाका! ••••••••• तुम धीरजधात्री धरणी तुम लक्ष्यभेदक करणी तुम एकलव्य पार्थ हो भारत अस्मिता भवतरणी! °°°°°°°° तुम जठराग्नि अभाव तुम अकिंचन दबाव हो तुम प्रभंजन नियतिकाल…

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