सँभल जाए अगर माली, महके हर रूह की डाली : कविता मल्होत्रा
एक प्राकृतिक आपदा की तरह कोरोना वायरस समूचे विश्व पर मँडराया और वैश्विक बँधुत्व की सीख देकर आगे निकल गया।लेकिन अब भी सीमा पार से परस्पर वैमनस्य के कारण शहादत की खबरें आती हैं तो एैसा लगता है कि अभी मानव को बहुत कुछ सीखना है। कई लोगों को बेरोज़गारी का रोना रोते देखा और…
‘प्रवासी मजदूर और बरसात का कहर’-
आज सारे संसार के सामने कोरोना महामारी का प्रकोप पांव पसार खडा़ है, मानव को झंकजोर कर रख दिया है.एक दूसरे की संवेदना शून्य सी जान पडती है. विश्व की सभ्यता, संस्कृति और सामाजिक ढांचे में अचानक बदलाव आया है, इन सब का शिकार मजदूर वर्ग हुआ है. भारत में प्रवासी मजदूरों के साथ एक…
यारो मैंने पंगा ले लिया… (सम्पादकीय)
जी हाँ मित्रो!, चीन ने पूरी दुनिया में कोरोना वायरस को फैलाकर कोहराम मचा दिया जिसके चलते सारा विश्व परेशान है और सबके निशान पर चीन अपने को देख रहा है । गलती की है और यदि मान लेते हो तो इसके अनेक उपाय हैं, बात बन जाएगी । किन्तु चोरी और सीनाजोरी न कभी…
“जीवन का समीकरण”
“ये ज़िन्दगी भी तो एक रक्कशा है साहेब अगर आप सफल हो, सारे खूबसूरत जलवे दिखाती है। पर अगर आप गोते लगाते हो, असफलता के गर्त में, तो फिर ये आपसे नजरें चुराती है।” सपने देखना अच्छी बात है। उन्हें पूरे करने के लिए कोशिश करना और भी अच्छी बात है। परन्तु सारी कोशिशों के…
