आज मैं प्रश्नाकुल हूँ ………
आज प्रश्नाकुल हूँ मैं क्योंकि आँखों का आदिम स्वप्न रोता, प्यासे मन में विषाद दिखता जीवंत सत्य बस गरल बोता ! आज प्रश्नाकुल हूँ मैं क्योंकि वृथा दंभ की परिधि फैली अभीष्ट जो था , अपवाद क्यों है ? पक्षपात, वेदना, निशा दृष्टिगत शिराओं में रक्त का संचार ज्यों है ! आज प्रश्नाकुल हूँ मैं…
