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दो किलो रोज गाली का डोज

                                                                                                   कुशलेन्द्र श्रीवास्तव प्रधान मंत्री जी ने पूरा गणित लगाकर बता ही दिया है कि वे प्रतिदिन दो किलो गालियों का डोज लेते हैं हो सकता है कि वे इससे अधिक डोज लेते हों और उनको जानकारी मेे केवल दो किलो ही आइ्र हो । गालियों के वजन को मापने के किस यंत्र का उपयोग…

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भाजपा को चिन्तन के लिए प्रश्न छोड़ गया है कर्नाटक चुनाव 

           अंततः कांग्रेस ने कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में अपनी जीत दर्ज करा ही ली । वैसे तो इसकी संभावना बहुत पहले से ही व्यक्त की जाती रही है । कर्नाटक की भाजपा सरकार जिन हाथों में थी वो न तो सत्ता को संभाल पा रहे थे और न ही आम मतदातओं की उम्मीदों पर…

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सवाल किससे करें?

ज़हन में कई हैं ख्याल, सवाल किससे करें? सियासत का बुरा हाल, सवाल किससे करें? करते हैं नंगा नाच, संसद में अब नेता, अपनी ही ठोंके ताल, सवाल किससे करें? सब चाहते बिरयानी, चाँदी के थाल में, ना खाएं चावल दाल, सवाल किससे करें? लूट, हत्या व डकैती, राहजनी बेख़ौफ़, सड़क पर ताण्डव कमाल, सवाल…

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कोरोना को हल्के में लेना, कितना भारी पड़ रहा है

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक) कोरोना को हल्के में लेना हम सबको कितना भारी पड़ रहा है । हमने भी, सरकारी तंत्र् ने  भी, स्वयंसेवी संस्थाएं भी बार–बार निवेदन करती रहीं कि 2 गज की दूरी मास्क है जरूरी, कम से कम तब तक तो अवश्य ही जब तक कोरोना भारत से पूरी तरह से…

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भगवान भाष्कर करेंगे राम नवमी को राम का सूर्यतिलक 

– पंकज कुमार मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी 17 अप्रैल 2024 को रामनवमी के पावन अवसर पर, दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणों से अयोध्या मंदिर में प्रथम बार भगवान राम का राजतिलक होगा । हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2081’ की शुरुआत के साथ रामनवमी पर्व पर अयोध्या यह ऐतिहासिक आयोजन करने जा…

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जनहित में जो अब जरूरी हो गया है

डॉक्टर सुधीर सिंह जनहित में जोअब जरूरी हो गया है आदमी का आचरण ही बदल गया है, खून का रिश्ता भी  पराया हो गया है। जिनको लोग कल अपना समझते थे, वही छिपकर  आघात  करने लगा है। घर-बाहर जालसाजों  का  जमावड़ा, ईमानदारी  का  मजाक उड़ा  रहा है। चरित्रवान  पर  व्यंग्य-वाण छोड़ कर, खुलेआम उनको  घायल …

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मुसाफिर हूँ यारों

लगातार मजदूरों के पलायन की बातें सुन सुनकर और टीवी, व्हाट्सएप जैसे बहुत से माध्यमों के द्वारा बड़ी ही दुखदाई फोटो देख-देख कर मन बहुत ज्यादा व्यथित हो रहा था।सोच रहा था क्यों ना कुछ मजदूरों के पास जाकर उनकी स्थिति को जाना जाए।           मन के कोतुहल को मिटाने के लिए मैंने इन लोगो…

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आपस्तम्ब

हे श्रमवीर तुम्हारे कुदाल ने कंटकाकीर्ण मग सुगम किया । एक पैर पर थाम लिये जैसे अम्बर कर्मयोगी सूरज भी देख तुम्हे पिघल गया । ● लज्जित हैं कर्मवंचक अवसरवादी लोलुप तुम्हे देखकर; प्रतिमान तुम्हे मानते जिजीविषक स्वाभिमानी देखते तुम्हे मुड़मुड़कर।। ● तुम्हे देख स्मरण हो आती कृष्ण की कनिष्ठा पर धारित गोवर्धन पर्वत की…

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मौसम के रंग हेमंत के संग

मौसम कहता, पतझर है पर अभी नहीं आ गया मधुमास, परन्तु पीपल बृक्ष से चिपके सूखे पत्ते, हवा में हिलते डुलते जैसे बाय-बॉय करते कह रहे हों पतझर को  “जान बाँकी है अभी मुझमें” जैसे किसी बृद्ध की जान अटकी हो अपने नये वंशज को देखने के लिये। नौखेज पत्ते लगे हैं दिखने बृक्ष की…

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उन्माद कि जिजीविषा पर आहत होती जातिगत भावनाएँ…..

पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर यूपी   आप याद कीजिए पिछले कुछ समय से हर नायक की जयंती, पुण्यतिथि पर कई बड़े सोशल मिडिया हैंडल और पेजो द्वारा लिखे गए अभद्र लेखों की भरमार होती है। देवी देवताओं के लिए लगातार अभद्र लिखा ही जा रहा है, कितना एक्शन ले पुलिस प्रसाशन…

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