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गिरगिट ज्यों, बदल रहा है आदमी

गहन लगे सूरज की भांति ढल रहा है आदमी। अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥ आदमी ने आदमी से, तोड़ लिया है नाता। भूल गया प्रेम की खेती, स्वार्थ की फ़सल उगाता॥ मौका पाते गिरगिट ज्यों, बदल रहा है आदमी। अपनी ही चादर को ख़ुद छल रहा है आदमी॥ आलस के रंग…

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सावधानी बरतें रहें सुरक्षित, एड्स से- लाल बिहारी लाल

विश्व एड्स दिवस ( 1 दिसंम्बर) पर विशेष एड्स का जागरुकता ही बचाव है – लाल बिहारी लाल Or सावधानी बरतें रहें सुरक्षित एड्स से- लाल बिहारी लाल ++++++++++++++++++++++++++++++++++लगातार थकान,रात को पसीना आना,लगातार डायरिया,जीभ/मुँह पर सफेद धब्बे,,सूखी खांसी,लगातार बुखार रहना आदि पर एड्स की संभावना हो सकती हैं।इस वर्ष 2023 का थीम है- “लेट कम्युनिटी…

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उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात स्त्रियों को नौकरी करना चाहिए या नहीं?

लेखक – नवीन कुमार जैन (बड़ामलहरा) उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद लड़कियों का नौकरी करना जरूरी है और लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त कर नौकरी करनी चाहिए क्योंकि इससे वे स्वावलंबी बनेंगी, आत्मनिर्भर बनेंगी और उन्हें उनके कार्यक्षेत्र पर उन्हें अपने कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्राप्त होगा, उन्हें वहाँ अपने विचारों…

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प्रिवांशी होंगी राष्ट्रीय स्त्री शक्ति सम्मान से सम्मानित

गंतव्य संस्थान द्वारा आयोजित 25 वें राष्ट्रीय स्त्री प्रिवांशी जी को सम्मानित किया जाएगा . यह सम्मान उनके महिला हिंदी साहित्य लेखन के कार्यो और सेवा भाव को देखते हुए  दिनांक 30 अगस्त 2025 कांस्टीट्यूशन  क्लब आफ इंडिया रफ़ी मार्ग  नई दिल्ली ,जिसमें सभी सम्मानित सदस्यों के साथ दिया जायेगा . इस सम्मान सम्मान हेतु…

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कोरोना अब सामूहिक संकट के समान है.

डॉक्टर सुधीर सिंह कोरोनाअब सामूहिक संकट के समान है.संकल्प और संयम ही उसका निदान है.कोरोना वायरस से दूरी बनाकर रहने से,कोई भी इंसान तब होता नहीं परेशान है.इस महामारी से बिल्कुल नहीं घबड़ाना है,घबड़ाहट इंसान को बुजदिल बना देता है.आदरणीय बूढ़े-बुजुर्गों ने हमें सिखाया है,संकट में विवेक और धीरज साथ देता है.कोरोना के संक्रमण से…

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माँ (कविता-2)

मार्टिन उमेद नज्मी मैंने जमीं पे चलती फिरती ख़ुदा की अंजा देखी है , मैंने जन्नत नहीं देखी कभी मैंने अपनी माँ देखी है ॥ ———————- बेटी की शादी में गरीबी सह विधवा माँ खर्चे को हिचकिचाती रही , वो ज़बां पर ख़ामोशी के ताले डाल इक इक रस्म-ओ -रिवाज निभाती रही ! ———————- माँ…

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जनहित में जो अब जरूरी हो गया है

डॉक्टर सुधीर सिंह जनहित में जोअब जरूरी हो गया है आदमी का आचरण ही बदल गया है, खून का रिश्ता भी  पराया हो गया है। जिनको लोग कल अपना समझते थे, वही छिपकर  आघात  करने लगा है। घर-बाहर जालसाजों  का  जमावड़ा, ईमानदारी  का  मजाक उड़ा  रहा है। चरित्रवान  पर  व्यंग्य-वाण छोड़ कर, खुलेआम उनको  घायल …

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सच्चा है एक प्यार तुम्हारा

सच्चा है एक प्यार तुम्हारा। बाकी तो सब यहाँ  झूठ हैं।। फैला हिय दीपक उजियारा। बाकी तो सब भृम रूप हैं।। इत उत ढूंढे कण कण में। पल्लवित तेरा ही स्वरूप है।। मूढ़ मन को समझ न आये। गूढ़ तेरा हर मन रूप हैं।। नैनो में दर्शन की चाह । तू नैनो में ही समाया…

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कागा सब तन खाइयो (कहानी)

कई दिनों से भयंकर बीमारी के बावजूद भी नीलिमा का चेहरा बहुत सुंदर दिख रहा था। उसके पति राकेश और बेटे खुश थे कि शायद अब वह बच जाएगी। पिछले कुछ समय से फ़ेसबुक पर लिखने से उसके काफ़ी दोस्त बन गए थे और जिस अकेलेपन के कारण उसकी जान पर बन आई थी, आज…

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दुनियादारी

दोस्त, तेरा चेहरा जो है बिल्कुल नूरानी है। सो,  तुझको  चाहने  की  हमें बीमारी  है।। उसकी आँखों में तेवर और होशयारी है। आज फिर से पड़ोसी ने की ग़द्दारी है।। दिल से दिल तक पहुँचती हैं जिनकी बातें। असल में वही बातें होती असर कारी हैं।। और बेटी से होती  हरेक आँगन में रौनक। सच …

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