आज़ादी हमारी
हिम्मत,ताक़त,शौर्य विहंसते,तीन रंग हर्षाये हैं ! सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काये हैं !! क़ुर्बानी ने नग़मे गाये, आज़ादी का वंदन है ज़ज़्बातों की बगिया महकी, राष्ट्रधर्म -अभिनंदन है सत्य,प्रेम और सद्भावों के,बादल तो नित छाये हैं ! सम्प्रभु हम,है राज हमारा,अंतर्मन मुस्काये हैं !! ज्ञान और विज्ञान की गाथा, हमने अंतरिक्ष जीता सप्त दशक का…
