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लॉक डाउन में दिव्य ज्ञान

कोई न कोई ज़ुर्म तो जरूर था ही,जिसमें सभी शामिल थे,तभी तो हर इन्सान चेहरा छुपाए घूम रहा है” सच ऐसे हालात में घर रहना ही बचाव है, अंधेरे में हाथ थामने का समय है और सुनसान में गुनगुनाने का है, एक दूसरे को धीरज बंधाने का है पर इस दौरान पति पत्नी,बच्चे, छोटे बड़े,सब…

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ग़ज़ल,

शराफत हम से कहती है,शराफत से जिया जाए, कोई हद भी तो होती है,कहाँ तक चुप रहा जाए। ग़ज़ल से गुफ़्तगू हमने इशारों में बहुत कर ली, मगर अब दिल ये कहता है कि कुछ खुल कर कहा जाये। अभी ज़िंदा हैं हम साँसें भी अपनी चल रहीं हैं न, तो फिर क्यों ना बुरे…

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कहा भरोगे पाप की कमाई , ढाबे से लेकर चाय वाले तक ने लूट मचाई

पंकज सीबी मिश्रा  / राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर,  यूपी सम्पूर्ण प्रयागराज इन दिनों श्रद्धालुओं से पटा पड़ा रहा । चारों तरफ कई दिन तक भीसड़ जाम की स्थिति बनी रही । गाड़ियों के बीच बीस से तीस घंटे तक लोगों को सड़कों पर फंसे रहना बेहद कष्टदाई रहा । फरवरी माह में माघी पूर्णिमा…

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मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ गर्व करूँ, या खुद से ही डर जाऊँ मैं। डर के साये में मैं जीती, क्या खुद ही मर जाऊँ मैं।। बेटी हो जाए  घर में, उसे बोझ समझ के पाला है। खुशियाँ जब आती घर में, हो जाए एक लाला है।। क्या किस्मत पाई नारी,बचपन से ही हीन हुई। देख के…

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रूस के व्लादिवोस्तोक शहर पर चीन के दावे ने मचाई हड़कंप

रूस के व्लादिवोस्तोक शहर पर चीन के दावे ने अंतरास्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। इस कारवाई  मे चीन की दिलेरी कम और बेवकूफी ज्यादा नज़र आ रही है।आज के वक़्त में जब दुनिया के सारे बड़े देश चीन के खिलाफ है तथा इस मुश्किल वक़्त में जब चीन को सबसे ज्यादा रूस की…

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हिन्दी दिवस एक दिन पर हिन्दी की बात हर दिन

हिन्दी भारत की मातृभाषा हैं।यह सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषाओ में से एक हैं।एक ऐसी भाषा जिसे हम जैसे लिखते हैं वैसे ही बोलते भी हैं।हिन्दी शब्द का वास्तविक अर्थ “सिन्धु नदी की भूमि” हैं।1918 ईस्वी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु अपने विचार रखे…

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सुबह

सुप्रभात अलविदा करता रात कोखिले कमल औरसूरज की किरणों की लालिमालगती चुनर पहनी होफिजाओं ने गुलाबीखिलते कमल लगतेतालाब के नीर नेलगाई हो जैसेपैरों में महावारभोर का ताराछुप गया उषा के आँचलपंछी कलरव ,माँ की मीठी पुकारसच अब तो सुबह हो गईश्रम के पांव चलने लगेअपने निर्धारित लक्ष्यऔर हर दिन की तरहसूरज देता गयाधरा पर ऊर्जासंजय वर्मा…

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” सेवाराम”

अर्चना त्यागी (जोधपुर , राजस्थान ) अपने गांव गए हुए दो साल से अधिक समय हो चुका था। काम की व्यस्तता के चलते जा ही नहीं पा रहा था। रह रह कर गांव की पगडंडी जैसे पुकार रही थी मुझे। आम के बाग, खेत खलिहान सभी जैसे आवाज लगा रहे थे। घर से बहुत दूर…

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माँ पर लाल बिहारी लाल के कुछ दोहे

माँ जीवन का सार है, माँ है तो संसार। माँ बिन जीवनलालका,समझो है बेकार।1।   माँ की ममता धरा पर, सबसे है अनमोल। माँ जिसने भूला दिया,सब कुछ उसका गोल।2।   माँ सम गुरू नहीं मिले, ढ़ूढ़े इस संसार। गुरु का जो मान रखा,नैया उसका पार।3।   माँ के दूध का करजा,चुका न पाया कोय।…

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श्री गुरु नानक देव जी के 550 में प्रकाशोत्सव पर सविता चडढा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ ऑनलाइन कवि दरबार

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में ऑनलाइन बहुभाषी कवि दरबार आयोजित किया गया ।इस कवि दरबार की अध्यक्षता हिंदी की जानी मानी लेखिका श्रीमती सविता चडढा ने की। इस बहुभाषी कवि दरबार में सतीश सोहल, सरदार सुलकखन सिंह, प्रीतम सिंह प्रीतम,दिनेश छिमवाल , सरदार परमजीत सिंह…

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