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मिले मेढक कॉकरोच

मिले मेढक कॉकरोच, भोजन में आज फिर कल मध्यान्ह भोजन में, था छिपकली का सिर था छिपकली का सिर, योजना है अति भारी बड़ा है कष्टप्रद, यह आदेश सरकारी अनपढ़ ही रह जाएँ, भले शिक्षा ही न मिले बच्चों को मध्यान्ह, का भोजन अवश्य मिले। 2 मँहगाई के दौर में, ज़िन्दा है ईमान  अचरज होता…

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योग करें, योग करें – चेतन पाल

योग करें हम योग करेंदूर सभी हम रोग करें,वरदान मिला जो हमकोहम उसका उपयोग करें। तन-मन स्वस्थ बनाता हैआलस दूर भगाता है,सदा सुखी वह रहता हैजो इसको अपनाता है। कहे संजीवनी बूटीजीवन को दे नए प्राण,ऐसा आशीर्वाद मिलाहोता सभी का कल्याण।उद्देश्य यही इसका हैसृजन स्वस्थ समाज का हो,भविष्य बनेगा बेहतरध्यान यदि बस आज का हो।…

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नव आंग्ल वर्ष के अवसर पर  हमारा विचारवाद   !

यूपी में रहते हुए और लगभग तीन दशकों तक कभी कभार ही इधर उधर की यात्रा करते हुए मैं‌ इस भूमि से लगभग कटा रहा। किन्तु भारत के इस बड़े राज्य इस भूमि को समझने का माध्यम-स्थल हो सकते हैं। दृष्टि होनी चाहिए। यहां के नगर न्यूयॉर्क जैसे नगर नहीं हैं। न्यूयॉर्क में अमीरी गरीबी…

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एरोप्लेन और मैं

एरोप्लेन उड़ा मैं बैठी विंडो सीट बाहर देखा सागर चला मेरे साथ चलता गया साथ साथ फिर रुकने लगा थकने लगा चला  गया कहीं  पीछे। बस मेरा एरोप्लेन ही चलता गया। एरोप्लेन और मैं आज एरोप्लेन उड़ा मैं विंडो सीट बैठी। बाहर देखा मेरे साथ मेरा शहर चला। कुछ दूर चला । फिर रुकने लगा।…

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विश्व रेडियो दिवस पर विशेष

यशपाल सिंह रेडियो दिवस के इस अवसर पर जब मैं पिछले 50-55 साल का रेडियो का इतिहास याद करता हूं तो बचपन से लेकर आज तक रेडियो के कई दौर याद आते हैं । गांव की चौपाल में रखा एक बड़ा सा रेडियो, हाथ हाथ में घूमता ट्रांजिस्टर, विविध भारती और बिनाका गीतमाला, अमीन सयानी,…

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हिन्दी दिवस (गीत)

बाज उठी होठों पर, आज मेरी हिन्दी। ममता के ऑचल में, माथे की बिन्दी। गाती है गली गली ,सावनी सुहानी। फागुनी हवा में ,रंग घोल रही पानी। सरमाते अगहन की, मुस्कान मंदी।                बाज उठी———— छायी मायुसी में ,रंग भर देती है। रूठे हुए नैनों में,ठंढ भर देती है। बहके हुए मन में,प्यार की कालिंदी।…

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“रहे उजाला हर दिल में,ना कोई तमस हो बारह महीने हर दिन बसँती प्रेम दिवस हो”

ना रहे किसी भी रूह में, मैं मेरी की हवस उतरे हर दिल में इश्क ए इब़ादत, तो मने समस्त ब्रह्माण्ड में बसँती एक प्रेम दिवस कितने भाग्यशाली होते हैं वो बच्चे जिन्हें उच्च शिक्षा के अवसर अपने देश में भी मिलते हैं और विदेशों में भी।अगर समाज के ये तथाकथित उच्च शिक्षित विद्वान अपनी…

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गाँधी जयंती पर आइये कुछ नया सोचें

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (सम्पादकीय) एक बार फिर आप सभी को गांधी जयंती की बधाई एवं अनन्त शुभकामनाएं ।पिछले वर्ष हमने गाँधी मनाई और स्वच्छता अभियान भी जोरशोर से चलाने की बात हुई । कुछ हद तक सफल भी हुए सफाई अभियान में । आपको भी स्मरण होगा कि गाँधी जी का एक चित्र् जो अधिकांश…

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यादे यूँ भी पुरानी चली आईं (गीत)

मन की बाते बताये तुम्हें क्याहै ये पहली मुहब्बत हमारीभले दिन थे वो गुजरे जमानेमीठी मीठी सी अग्न लगाई हम तो डरते हैं नजदीक आकेजान ले लो – ऐ जान हमारीकब से बैठे दबाये लबो कोकब से यारी है गम से हमारी चढगयी सर आसमाँ तकये नशीली रात खुमारीबजते घुघरू से आवाज आईदेखो कैसी चली…

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बधाईयां बधाईयां और केवल बधाईयां

डा.सर्वेश कुमार मिश्र सुबह से शाम हो गई किंतु कोई हलचल ना हुई कोई मनचल ना हुई कोई हिला भी नहीं कोई डुला भी नहीं कोई देखा भी नहीं कोई ताका भी नहीं। सच है खुद की लड़ाई खुद से लड़नी चाहिए बधाइयों के शहर में ना दुखड़े गाना चाहिए। खुद के मन की व्यथा…

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