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टनल में फंसे मजदूरों को जातिवाद का फायदा क्यों नहीं मिला  …!

उत्तरकाशी  टनल में फंसे मजदूरों के जगह अगर यहीं 41 वीआईपी लोग एलीट क्लास  अथवा पिछड़े और दलित नेता टाईप के होते और वे ऐसे ही कहीं फंस जाते तो सदन के दलित नेता और मीडिया क्या करता ? पूरा देश सर पर उठा लेता।  बोलने का मतलब है सरकार से सवाल करना  मीडिया ने…

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बढ़ते हुए तलाक कर रहे सामाजिक ताने-बाने ख़ाक

पश्चिमी मीडिया और वैश्वीकरण के प्रभाव ने भारतीय समाज की प्रेम और रिश्तों की धारणा को प्रभावित किया है। युवा पीढ़ी पारंपरिक पारिवारिक अपेक्षाओं की तुलना में व्यक्तिगत खुशी और अनुकूलता को प्राथमिकता देने लगी है, जिसके कारण जब उनकी शादी में संतुष्टि नहीं मिलती है तो वे तलाक को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप…

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मतलब के यार

चंद्र प्रकाश जी अपने मित्र रमेश की पौत्री का रिश्ता करने के लिए भागम भाग कर रहे थे। लड़का उनकी जानकारी में था। दोनों पक्षों में उनकी उठ बैठ थी। रिश्ता करने के चक्कर में कई बार उन्हें यात्रा भी करनी पड़ी। अपने घर पर भी उनको बातें सुननी पड़ती थी कि बे फालतू के…

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फिरी की घोषणायें ही बन चुकी हैं आधार

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव टनल में फंसे हैं मजदूर जिनको पन्द्रह दिनों की कवायद के बाद भी नहीं निकाला जा सका । हो सकता है कि जब तक यह आलेख छपे तब तक वे निकल जायें । ईष्वर ऐसा ही करे । पर टनल में मजदूरों के फंसने और एक लम्बी कवायद ने यह तो समझा ही…

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आप और मैं

काश! आप पॉजिटिव एनर्जी से ड्राइव होते। तो आप आप न होते। मैं मैं न होती। शायद आज आप और मैं हम होते। काश! आप न्यूट्रल  होते। तो आप आप न होते। मैं मैं न होती । शायद आज हम हमराज होते। काश! आप  अपनों की करतूतों पर पर्दा न डालते। बल्कि मेरी ढाल बनते…

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आज दिल जीते हैं, कल फिर कप जीतेंगे।

जन्म मरण के चक्र-सी है, हार जीत लग रही। लड़े-भिड़े शौर्य से, आज नही तो कल सही।। कप जितने से बड़ी बात दिल जीतना होता है। क्रिकेट खत्म नही हो गया। 46 दिन में 45 दिन आप जीते हो। हमारी भारतीय टीम ने 2023 वर्ल्ड कप के अंदर 10 मैच जीते और आज फाइनल हारने…

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सावधानी बरतें रहें सुरक्षित, एड्स से- लाल बिहारी लाल

विश्व एड्स दिवस ( 1 दिसंम्बर) पर विशेष एड्स का जागरुकता ही बचाव है – लाल बिहारी लाल Or सावधानी बरतें रहें सुरक्षित एड्स से- लाल बिहारी लाल ++++++++++++++++++++++++++++++++++लगातार थकान,रात को पसीना आना,लगातार डायरिया,जीभ/मुँह पर सफेद धब्बे,,सूखी खांसी,लगातार बुखार रहना आदि पर एड्स की संभावना हो सकती हैं।इस वर्ष 2023 का थीम है- “लेट कम्युनिटी…

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वर्तमान का क्षण : ललित पारिमू

मनुष्य अगर अपने दैनन्दिन कार्यों पर एक पैनी नज़र दौड़ाए तो वो इस निष्कर्ष पर पोहोंच सकता है कि  वो अपने दिन का अधिकतम समय भविष्य और भूत काल में ही बिताता है। वर्तमान क्षण से उसका सम्बन्ध कम ही बना रहता है । और जो दिन भर में उसे थोड़ा सा सुख और आनंद…

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सम्पादकीय : मानसिक व वायु प्रदूषण से मुक्ति जरूरी

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक) दीपावली का पंच– दिवसीय महोत्सव मनाते नवम्बर माह के दूसरे पखवाड़े में प्रवेश कर रहे हैं । धनतेरस – छोटी दीपावली – बड़ी दीपावली – गोवर्धन पूजा, भैयादूज और छठ पूजा आदि.एक समय था जब भक्तिमय भाव प्रमुख होता था । सभी त्यौहार हो अथवा ईष्ट देव, ईश्वर की आराधना करनी…

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मै नारी ही क्यों बनी ?

अपना जीवन देकर मैं, जीवन संगिनी तुम्हारी बनी हूँ अपना सब कुछ देकर तुम्हें, तुम्हारी अर्धांगिनी बनी हूँ तुम सभी को जैसे हो वैसे ही अपनाकर एक स्त्री बनी हूँ पुरे परिवार को भरपेट भोजन कराकर ही मै अन्नपूर्णा बनी हूँ मगर क्यों मुझे लगता है कि मेरा कोई अस्तित्व नहीं है मगर सच तो…

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