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“पहलगाम में आतंकी हमला: राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय”

“पहलगाम में आतंकी हमला: राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय” प्रश्न पूछने के अवसर भी आएँगे, अभी राष्ट्र के साथ खड़े होने का समय है। राष्ट्र सर्वोपरि। हाल की पहलगाम घटना में एक हिंदू पर्यटक को आतंकवादियों ने धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि भारत की…

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दीया

मिट्टी ढ़ो ढ़ो कांधे-सिर भार कुम्हार का जुटा परिवार ; गढ़ेंगे दिया भरूकी चाक पर खभारू यापन जीवन संसार! ⭐ रौशनी दूर से टिमटिम झांके अनुरागी आगत को मनाने, हांथ बांध कमर कस तैयार जीवन अंधस तिमिर भगाने! ⭐ फोड़ती माटी का ढ़ेला उदह पानी माटी फुला रही, पैरों से रौंद रौंद कर वह गारा…

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कर्मवीर काशी के’ एवं श्री शंकर वाचनालय का लोकार्पण

31 अक्टूबर, 2022 “पुस्तकें और प्रकृति मनुष्य के दो आवश्यक सहचर हैं। पुस्तकें मनुष्य को शिक्षित करते हुए उसके आचरण का भी निर्माण करती हैं। आज के डिजिटल युग में भी छपी हुई पुस्तकों का महत्त्व है। ये पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान का संचार करती हैं।” ये बातें कहीं लेखक-समीक्षक डाॅ. अशोक कुमार ज्योति ने। ग्रामीण क्षेत्रों…

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स्वतंत्रता दिवस अमर रहे।

15अगस्त 2021                                क्या हम अपनी स्वतंत्रता खो रहे हैं? मार्टिन _उमेद, देहरादून 15अगस्त 1947  को भारत देश ने आज़ादी मे कदम रखा. आज 15 अगस्त 2021 को भारत अपनी आजादी के 74 साल पूरे कर रहा है। देश में स्वतंत्रता का जश्न मनाने के लिए चारो ओर की फिज़ाओ मे तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।…

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हॉन्गकॉन्ग को लेकर भारत ने बदले अपने सुर

चीन अपने पडोसी देशों से रिश्ते बद से बदतर करता जा रहा है, चाहे वह ताइवान हो, जापान हो या कोई और देश,वह  हर किसी से उलझने का साहस करता नजर आ रहा है। अगर हॉन्गकॉन्ग की बात करे तो ये बोलना कतई गलत नही होगा कि चीन ने  वहा लोक-तंत्र की हत्या कर दी…

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“एक थी शान्ता”काव्य-कृति का विमोचन

भारतीय साहित्य-कला परिषद् नयी दिल्ली के तत्वावधान में ‘अभी तक क्राइम टाइम’ सप्ताहिक समाचार पत्र, शाहदरा, दिल्ली के  कार्यालय  में 20 अगस्त 2024  को यशस्वी सम्पादक राजेन्द्र गुप्त की अध्यक्षता में हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.राहुल  की सद्यः प्रकाशित पुस्तक”एक थी शान्ता”(खण्ड-काव्य) का विमोचन सम्पन्न हुआ।माननीय अध्यक्ष ने अपने उद्बोदन में कहा कि,रामायण की कथा-श्रृंखला…

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हालात की सौग़ात : आरती परीख

बिमल खिड़की के पास बैठा बाहर झाँक रहा था। हवा धीरे-धीरे परदों से खेल रही थी। आसमान पर बिखरे बादल धूप को ढक रहे थे, जैसे कोई अनकही चुप्पी घर पर फैल गई हो। लेकिन बिमल का मन इस चुप्पी से ज़्यादा भारी था— कल रात से भीतर उमड़ा तूफ़ान अब भी थमा नहीं था।…

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बरसी एैसे प्रभु कृपा,दिलों से दिल की बात मिली उमड़ा सावन हिंदी भवन में स्नेह की सौग़ात मिली

इसे प्रभु कृपा नहीं तो और क्या कहा जाए, जब विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अभिन्न रचनाकारों ने, अपने लेखन से अनुराधा प्रकाशन को साहित्यिक समृद्धि देकर, इस काबिल बनाया कि एक साथ 15 पुस्तकों का लोकार्पण सँभव हो पाया। 21 जुलाई 2019 का दिन अनुराधा प्रकाशन के लिए एक ऐतिहासिक दिन बन कर आया, जिसमें…

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आज़ादी का दिन ( लघु कथा )

        सुबह लक्ष्मी काम पर जल्दी आ गई थी। वह बड़ी शीघ्रता से काम निपटा कर जाना चाहती थी। आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उसके विकलांग पुत्र राहुल को जिलाध्यक्ष महोदय की ओर से उत्कृष्टता का पुरस्कार मिलने वाला था। इस वर्ष उसने राष्ट्रीय स्तर की निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाकर जिले का…

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