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परवरिश : डॉक्टर अरुणा पाठक

हर किसी को आते जाते…….. वह घर अपनी और आकर्षित करता था। करें क्यों ना आसपास के पूरे क्षेत्र में इतना सुंदर इतना महंगा इतना आलीशान घर, दूसरा नहीं था। वहां से गुजरने वाले उस घर को जरूर देखते बाहर एक बड़ी सी गाड़ी खड़ी रहती. और उसमें टोपी पहना हुआ ड्राइवर बैठा रहता। अक्सर…

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रावण का चेहरा

हर साल की तरह इस साल भी वह रावण का पुतला बना रहा था। विशेष रंगों का प्रयोग कर उसने उस पुतले के चेहरे को जीवंत जैसा कर दिया था। लगभग पूरा बन चुके पुतले को निहारते हुए उसके चेहरे पर हल्की सी दर्द भरी मुस्कान आ गयी और उसने उस पुतले की बांह टटोलते…

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भारतीय शिक्षण मंडल, काशी‌प्रांत और वाणिज्य संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला ‘शोध आनंदशाला’ : ‘फन्डामेंटल आफ सोशल साइंसेज रिसर्च’ का आयोजन।

कई विषयों के शोधार्थियों को मिला मार्गदर्शन वाराणसी, स्थानीय संवाददाता, 23 जुलाई  “जिज्ञासा ही शोध का मूल है। यह जिज्ञासा किसी सैद्धांतिक प्रश्न से उत्पन्न हो सकती है तो कभी कल्पनाशक्ति एवं व्यावहारिक जीवन की समस्याओं से पैदा हो सकती है। शोध पूर्वज्ञान की सीमाओं को रेखांकित करते हुए अनुत्तरित प्रश्नों का उत्तर देने का…

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घटती जी.डी.पी. वाला अर्थशास्त्र

पिछले दिनों भारत की जी. डी. पी. दर 5.8 से घटकर 5 पर आ गयी फिर क्या था कई अर्थशास्त्रीयों के माथे पर शिकन सी आ गयी जबकि विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर मोदी सरकार को घेरने मे जुट गया पर असलियत तो समझना होगा । भारत फिलहाल वैसी जटिल स्थिति में नहीं फँसा है जैसा…

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साहित्यिक गुरुओं , अध्यात्मिक जगद्गगुरु एवं साहित्यिक विभूतियों ने किया 11 पुस्तकों का लोकार्पण

नयी दिल्ली ( 8 जुलाई (शनिवार), गाँधी शांति प्रतिष्ठान , आई टी ओ, दिल्ली में अनुराधा प्रकाशन द्वारा पुस्तकों का लोकार्पण, काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया , आयोजन में प्रयाग पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ओंकारानंद सरस्वती जी महाराज , प्रोफेसर (ग्रुप कैप्टेन) ओ पी शर्मा जी (महानिदेशक-महर्षि विश्विद्यालय, नॉएडा), श्री पवन…

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लाल बहादुर शास्त्री

(जन्म 02 अक्टूबर, 1904 एवं निधन 10 जनवरी, 1966) प्रारंभिक जीवन :- लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 02 अक्टूबर, 1904 को उत्तर प्रदेश के मुग़लसराय में हुआ था। उनके पिता शारदा प्रसाद और माँ रामदुलारी देवी थीं। लाल बहादुर का उपनाम श्रीवास्तव था पर उन्होंने इसे बदल दिया क्योंकि वह अपनी जाति को अंकित करना…

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स्कूलों की चमक से आगे सीखने की गुणवत्ता

भारत में स्कूली शिक्षा की बहस लंबे समय तक विद्यालयों की संख्या, नामांकन और बुनियादी सुविधाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही। अब प्रश्न बदल रहा है। बच्चा विद्यालय में पहुंच रहा है या नहीं, यह महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे बड़ा प्रश्न यह है कि विद्यालय पहुंचने के बाद वह सीख क्या रहा है, उसकी जिज्ञासा कितनी…

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साबरमती के संत

अब तो रह-रह के राजघाट कसमसाने लगा,               मुझको साबरमती के संत तू याद आने लगा। गूंथ कर हार भ्रष्टाचार के गुलाबों का, तेरी तस्वीरों पै बेखौफ डाला जाने लगा। तेरे चित्रों से छपे कागजों के टुकड़ों पर, बड़े बड़ों का भी ईमान बेचा जाने लगा। पहले कातिल बने फिर…

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वोटर लिस्ट पर बवाल

राजनीतिक सफरनामा कुशलेन्द्र श्रीवास्तव वैसे तो बिहार विधानसभा के होने वाले चुनाव में अभी समय है पर उसको लेकर बिगुल बज चुका है । विपक्ष फिलहाल भाजपा से नहीं चुनाव आयोग से लड़ रहा है और इसमें भाजपा पर भी निशाना साध रहा है । दरअसल चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण कराने का…

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