चित्रगुप्त पूजा—सिर्फ़ कायस्थ क्यों करें?
“जो कलम से सृष्टि के कर्मों का लेखा लिखते हैं, क्या वे केवल एक जाति के आराध्य हो सकते हैं?” भारतीय संस्कृति में पूजा, केवल देवी-देवताओं की आराधना नहीं, बल्कि अपने कर्म, साधन और दायित्व के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम भी है। यहाँ हल पूज्य है, शस्त्र पूज्य है, पुस्तक पूज्य है और…
राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है : महात्मा गांधी
महात्मा गांधी ने अदालती कामकाज में भी हिन्दी के इस्तेमाल की पुरजोर पैरवी की थी। वे कहते थे, देश की उन्नति के लिए राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि अपनों तक अपनी बात हम अपनी भाषा द्वारा ही पहुंचा सकते हैं। अपनों से अपनी भाषा में बात करने में…
सिक्सटी प्लस,पाओ यश
बचपन,यौवन,प्रौढ़ावस्था, बुढ़ापा ये तो प्रत्येक के जीवन की अमिट कहानी है।राजा हो या रंक,धनी हो या धनहीन,उद्योगपति हो या मज़दूर सब को हीइस चक्र से ही गुजरना हीगुजरना है।गौतम बुद्ध ने तो बूढ़े व्यक्ति को देखकर व्यथित हो वैराग्य ले कर राजपाट को ही त्याग दिया था। इन्सान अपनीजवानी के पैंतीस-चालीसवर्ष धनोपार्जन व बच्चों के पालनपोषण…
स्वतंत्रता से विकसित भारत की ओर
15 अगस्त भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम दिवस है जिसने करोड़ों भारतीयों को स्वतंत्रता का अमूल्य उपहार दिया। यह केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, कर्तव्यबोध और भविष्य के संकल्प का भी दिन है। स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई; इसके पीछे असंख्य स्वतंत्रता…
विमान हादसों में नेताओं की असमय विदाई: संयोग, चयन-पूर्वाग्रह या व्यवस्था की गहरी कमजोरी? — डॉ. सत्यवान सौरभ
भारत की राजनीतिक यात्रा बार-बार आकाशी हादसों की भेंट चढ़ती रही है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती विमान दुर्घटना ने एक बार फिर पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। पांच लोगों की मौत के साथ राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ, जिसकी भरपाई केवल संवेदनाओं से संभव नहीं। यह पहला मामला नहीं…
सोच बुद्धि और विचार – आशा सहाय
मैंने अपने चिन्तन की प्रक्रिया का आरम्भ संभवतः रात्रि के आकाश के निरीक्षण से ही किया था। निश्चय ही बाल मन की जिज्ञासा के तहत ही तरह तरह के प्रश्नों को जन्म देने वाली यह क्रिया अब एक विशाल चिन्तन प्रक्रिया बन गयी है और अन्ततः क्यों ,कैसे , कौन जैसे प्रश्नों से मस्तिष्क वैसे…
नयन पिरो रहे अश्रु माल हैं !
कदम कदम पर साथ मिला औ , काँधे पर चढ़ना , इठलाना ! दूर दूर तक रखी निगाहें , पलकों में सब सिमटा आना ! दूर आपसे रहकर जाना , जीना भी सचमुच बवाल है !! खेल कूद या खाना पीना , कैसे मस्ती में है जीना ! हार जीत कैसे पच जाये , कैसे…
अनुराधा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित 13 पुस्तकों का हिंदी भवन में होगा भव्य लोकार्पण
विभिन्न प्रदेशों से जुड़े साहित्यकारों के साझा संकलन 1. काव्य अमृत 2. कथा संचय 3. सीप में मोती 4. हास परिहास 5. दिव्य चेतना का लोकार्पण विश्व विख्यात कवयित्री डॉक्टर सरोजिनी प्रीतम, प्रसिद्ध गीतकार, पत्रकार पंकज शर्मा जी , राष्ट्रीय हास्य कवि महेंदर शर्मा जी , कविता मल्होत्राजी , मधु मधुबाला , मनमोहन शर्मा ‘शरण’…
होली के रंग भोजपुरी के संग” काव्यमय होली मिलनोत्सव
होली और ‘अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस’ के पावन पर्व का स्वागत करने के लिए “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था) की ओर से 20 मार्च, रविवार को सायं 5 बजे से एक काव्यमय होली मिलनोत्सव का आयोजन किया गया। विश्व स्तर पर भोजपुरी की महत्ता को देखते हुए “होली के रंग भोजपुरी के संग” के…
