बड़ी ही सरल है हिन्दी की परिभाषा
यह है भारत वर्ष की राजभाषा
संस्कृत की है यह बेटी प्यारी
शासन और प्रशासन की है राजदुलारी
संविधान में इसका दर्जा है बड़ा ही ऊंचा
सम्मान करता इसका भारत समूचा
सितम्बर माह में होता इसका बहुत ही महिमा मंडन
नहीं कर सकता कोई भी इस बात का खंडन
सुर, तुलसी, निराला और दिनकर सरीखे सरस्वती पुत्रों ने इसको सींचा और संभाला
अंग्रेजी के बावजूद है इसका खूब बोलबाला
14 सितंबर को हिंदी दिवस मना कर
दोस्तों ना केवल औपचारिक निभाइए
हिंदी को आत्मसात कर
हर रोज हिंदी को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाइए
हिंदी, हिंद और हिंदुस्तान का मान बढ़ाइए
हिंदी को आत्मसात कीजिए
हिंदी को अपनाइए
हिंदी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है
हमारी आत्मा का गान यही है
हमारा स्वाभिमान यही है
हमारा अभिमान यही है
जय हिंद, जय हिंदी…!
डॉ. मनोज कुमार “मन”
