जीवन : डॉ.सरला सिंह ‘स्निग्धा’
तेजी से पटरियों के बीचों-बीच दौड़ती हुई एक लड़की, ट्रेन के किनारे-किनारे पटरियों पर पड़े पानी के खाली बोतल उठा-उठा कर अपने बोरे में भर रही थी। कई बार वह गिर पड़ती, फिर से उठती संँभलती और फिर आगे बढ़ जाती। उसकी उम्र भी बमुश्किल कोई सात-आठ साल की रही होगी। नाम मिनी और…
