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भारत ने युद्धग्रस्त गाजा की स्थिति पर ‘चिंता’ व्यक्त की

भारत ने गाजा में युद्ध को “बड़ी चिंता” का विषय बताते हुए सोमवार को कहा कि संघर्षों से उत्पन्न मानवीय संकट के लिए एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है जो सबसे अधिक प्रभावित लोगों को तत्काल राहत दे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 55वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा…

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समुद्र की गहराई में ध्यान

कुशलेन्द्र श्रीवास्तव अब पष्चिम बंगाल के संदेषखाली को भारत के लोग जानने ही लगे हैं, सारी दुनिया के जागरूक लोग भी जानने लगे हैं । जिस तरह से वहां के लोगों के साथ और वहां की महिलाओं के साथ अत्याचार किए गए उसका घिनौना रूप् सामने आ गया है । सत्ता के मद में चूर…

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डॉक्टर सरोजनी प्रीतम कहिन

ग्रास मुर्गे उदास होते हैं काकटेल में वे बलि का बकरा बनते हैं दिग्गज के ग्रास होते हैं रीेतिकाल छात्रों ने पूछा दरबारी कवियों के राजकीय सम्मान से अभिप्राय वे बोले साहित्य के दिग्गज सलामी देते हैं सूंड उठाये अनुरोध उन्होंने साहित्यिक समारोह के निमंत्रण पत्र भिजवाये लिखा आप साहित्य के दिग्गज-कृप्या अपनी गजगामिनी भी…

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दुनियादारी

दोस्त, तेरा चेहरा जो है बिल्कुल नूरानी है। सो,  तुझको  चाहने  की  हमें बीमारी  है।। उसकी आँखों में तेवर और होशयारी है। आज फिर से पड़ोसी ने की ग़द्दारी है।। दिल से दिल तक पहुँचती हैं जिनकी बातें। असल में वही बातें होती असर कारी हैं।। और बेटी से होती  हरेक आँगन में रौनक। सच …

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कहानी :   सुनहरा मौका – डोली शाह

              दफ्तर जाने वाली लंबी कतारों में लगी गाड़ियों के बीच हम भी अपनी चार पहिया लेकर सपरिवार निकल चले एक लम्बे अरसे से बुलाते मित्र के पास । चलते- चलते हसीन वादियों के बीच मानो रास्ता खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था। प्रकृति की सुंदर छटा, ठंडी हवाएं,  कभी बालू…

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Saga of a lost battle

ज़माने ने मारे जवाँ कैसे-कैसे इतिहास गवाह है कि हम जब भी बाहरी आक्रान्ताओं से हारे तो उसका कारण न तो हमारे सैनिकों में शौर्य की कमी थी न गिनती की। हारे तो सिर्फ अपने आंतरिक विवादों और आपसी दुश्मनी के कारण। इतिहास के पन्ने खंगालिए जनाब और उनसे सबक सीखिए। इतिहास में दो भूलें…

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बुर्खा और घूँघट प्रथा —-एक सामाजिक बुराई

कभी तो देखे अपनी माँ को, जो बुर्खा मुख पर ओढ़े थी , कभी बोलती बिना जुबां के, माँ कब तू मुख खोलेगी ! क्या मेरी जवानी और बुढ़ापा तेरी तरह ही गुजरेगा , जो तेरे था साथ हुआ, क्या वो सब मुझपर बीतेगा ! कैसे गर्मी धूप में भी तू, सर ढक कर के…

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श्री भटनागर की पुस्तक शिव से संवाद का पद्म भूषण  श्रद्धेय दाजी द्वारा विमोचन

विश्व में विख्यात रामचंद्र मिशन हार्टफुलनेस मेडिटेशन के मार्गदर्शक एवं गुरु पद्म भूषण श्रद्धेय दाजी ने   इंदौर के हार्टफुलनेस मेडिटेशन सेंटर में एक समारोह में श्री अरुण एस भटनागर आई आर एस ,समूह सलाहकार आईआईएसटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स द्वारा लिखित कविताओं का एक उत्कृष्ट संग्रह “शिव से संवाद” का विमोचन किया।  एक गरिमामय कार्यक्रम में …

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राजनीति में वैश्य समाज की भागीदारी तय करेगा स्वाभिमान सम्मेलन 

चण्डीगढ़। आगामी लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश में पिछले 15 सालों से सक्रिय वैश्य समाज के सबसे बडे़ं संगठन अग्रवाल वैश्य समाज ने समाज की राजनीतिक भागीदारी के लिए कमर कस ली है। ये जानकारी देते हुए समाज के प्रदेश महासचिव राजेश सिंगला ने बताया कि अग्रवाल वैश्य समाज दो लोकसभा व…

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अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (गीत) मातृभाषा हिंदी भाषा है

हिमालय के भाल पर सूरज सी जो दमके,वही मेरी राष्ट्रभाषा हिंदी भाषा है। सूर तुलसी ने सजाई काव्य गहनों से,है बहुत सुंदर ये अपनी और बहनों से,अजंता की मूर्ति सा जिसको तराशा है,वही मेरी मातृभाषा हिंदी भाषा है। गीत सा श्रृंगार और संगीत सा स्वर है,भाव मन के जहां बसते हिंदी वह घर है,हिंद के…

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