“परदे में रहने दो, परदा न हटाओ……।” – मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (सम्पादकीय)
बात फिल्मों की करें या उसमें प्रस्तुत संगीत-गीत की वे सब भी हमारे ही बीच से हमारे लिए सृजित होते हैं। फिर एकाएक गीत बनता है- “परदे में रहने दो, परदा न उठाओ परदा जो उठ गया तो भेद खुल जायेगा।” बात आजकल राजनीति की जोर-शोर से हो रही है। पिक्चर साफ हो चुकी है…
