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ये हितैषी बच्चियों के

                      भगवती प्रसाद गेहलोत अलसुबह कड़कड़ाती ठंड में धुंध अपनी चादर समेटने की मशक्कत कर रही थी ।  मैले-कुचले  कपड़े व  अधफटे चप्पल  बिखरे बाल लिए दो बच्चियाँ अपने डेरे से सीधे उठकर झोला लिए बस स्टैंड आती है रात्री को भजन संध्या में फैंके गए झूठन वाले कचरे के ढेर से पन्नियाँ, प्लास्टिक, कुछ…

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छोटी सी मुलाकात उपहार बन गयी

फिल्म डायरेक्टर श्री अशोक त्यागी जी से अद्भुत भेंट जी हाँ आदरणीय मित्रो फिल्म एक्टर / डायरेक्टर अशोक त्यागी जी से 3-4 बार फ़ोन पर बात हुई , मिलने की जिज्ञासा दोनों को थी कल शनिवार (पालिका केंद्र, कनाट प्लेस) में समय निश्चित हुआ और सहृदयता से भेंट हुई, उनको उत्कर्ष मेल (राष्ट्रिय पाक्षिक पत्र)…

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तुम्हारे आगमन से

इक  तुम्हारे आगमन से खिली धरा, फैला उजास सृष्टि के कण कण में दिखता नित नया ही अब हुलास….. मन ने भँवर बांध तोड़े छोड़ बैठा हर प्रवास नव स्वप्न जीवित हो उठे दृष्टिगत है अब विभास….. प्रेम अनुभूति में भी है नवीन कल्पना का वास सब धुला व सजा है ज्यों आयोजन हो ख़ास…….

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वर्तमान परिपेक्ष्य में साहित्यकारों की भूमिका

अक्षत श्रीवास्तव हम यथार्थवादी युग में प्रवेश कर चुके हैं । कल्पनाओं में अब हम नहीं जी सकते । सभी को हकीकत का दर्शन चाहिये । हम कल्पनाओं में नहीं जी सकते । हमारी कल्पनायें भी बेरंग हो चुकी हैं । हमें यथार्थ ही चाहिए । यथार्थ याने कड़वी दवा जिसके मीठेपन में भी कसैलापन…

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लो कर गए प्रवेश नए वर्ष में फिर हम.

लो कर गए प्रवेश नए वर्ष में फिर हम बस देखते रहे गुज़रते पलों को हम l जाता हुआ साल इतिहास लिख गया क्या पाया हमने खोया सब हिसाब लिख गया कुछ हसरतें थीं दिल में जो पूरी न हो सकीं कुछ पल खुशी के साथ मेरे नाम लिख गया लेकर नई आशाएं बढ़ें सबके…

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दिल वालों की दिल्‍ली

गीतिका छंद विधाता मापनी- 1222 1222 1222 1222, समांत -आना, पदान्त-तुम कभी दिल्ली रुको तो बिन इसे देखे न जाना तुम। पुरानी अब नहीं यह आज देखो फिर बताना तुम ।1। यहाँ चारों तरफ हैं वन हरित उपवन हजारों में, प्रदूषणमुक्त दिल्ली के लिए पौधा लगाना तुम।2। यहाँ उपलब्ध हैं उत्कृष्ट पथ, बस, रेल सेवाएँ,…

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नववर्ष आ गया…….

बागों में कूके कोयल, भौरें विचर रहे हैं।बागों पे आया यौवन,कविमन खिल गए हैं।हरियाली से धरा का,सौन्दर्य बढ़ता जाए।नववर्ष आ गया है , ऋतुराज मुस्कुराए ।कलियाँ चहकती हैं,खुशियों से चमन गाये।ख्वाहिशें नई जगी है ,इरादे बदल गये हैं, ।रेतों के भी परिन्दे , हरियाली में मुस्कुराए।मंजिलों के नए सपने , अब जन्म ले रहे हैं…

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साहित्यकारा सविता चढ्ढा को मिली “विद्या वाचस्पति” की मानद उपाधि

दिल्ली। विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, गांधीनगर, ईशीपुर, जिला भागलपुर (बिहार) द्वारा साहित्यकार सविता चडढा को इनकी सुधीर्घ हिंदी सेवा, सारस्वत साधना,कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां, शैक्षिक प्रदेयों, महनीय शोधकार्यों  तथा राष्ट्रीय/ अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के आधार पर  विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ की अनुशंसा पर विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान दिया गया है। यह सम्मान हिंदी भवन में आयोजित…

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लौटें एक सार्वभौम संस्कृति की ओर —

यद्यपि  यह एक सार्वभौमिक विषय है , किसी स्थानविशेष से ही सम्बद्ध नही। मानवता के नाम पर कलंक समझी जाने लायक यह समस्या पुरुषों की  सबलता  के आदिकालीन अहंकार से जुड़ी है।  किन्तु आज भी सभ्यता के शिखर पर पहुँचने का दावा करनेवाला यह जगत  महिलाओं के   साथ इस प्रकार के व्यवहारों को अंजाम दे…

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युवाओं में अतिरेक भविष्य की चिंता से बिगड़ रहा वर्तमान ..!

कैसी विडम्बना है कि आज हमारा देश विज्ञान से कटता जा रहा है। हम भूल रहे हैं कि धर्म से नौकरियां पैदा नहीं हो सकतीं, नेताओं के पीछे चलकर रोजगार पैदा नहीं हो सकते। केवल विज्ञान ही तय कर सकता है हमारा भविष्य। फिर भी, हम धर्म, मजहब, मंदिर, मस्जिद, हिंदू, मुसलमान, बेकार के, फालतू…

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