ये हितैषी बच्चियों के
भगवती प्रसाद गेहलोत अलसुबह कड़कड़ाती ठंड में धुंध अपनी चादर समेटने की मशक्कत कर रही थी । मैले-कुचले कपड़े व अधफटे चप्पल बिखरे बाल लिए दो बच्चियाँ अपने डेरे से सीधे उठकर झोला लिए बस स्टैंड आती है रात्री को भजन संध्या में फैंके गए झूठन वाले कचरे के ढेर से पन्नियाँ, प्लास्टिक, कुछ…
